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circa 1010–970 BC

The Reign of David

David unites the tribes, conquers Jerusalem, and establishes Israel's golden age—even through deep personal failure.

1,230 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 2 शमुएल ४:३लगभग १०४८ ई.पू.

    बीरोथवासियों को पलायन कर गित्ताईम नगर में जा बसना पड़ा, और वे वहां आज तक परदेशी ही माने जाते हैं.

  2. 2 शमुएल ४:४लगभग १०४८ ई.पू.

    शाऊल के पुत्र योनातन के एक पुत्र था, जो पैरों से विकलांग था. जब येज़्रील से शाऊल और योनातन से संबंधित समाचार उन्हें दिया गया, वह सिर्फ पांच वर्ष का था. उसकी सेविका उसे लेकर भाग रही थी; उतावली में वह गिर पड़ा और विकलांग रह गया. उसका नाम मेफ़िबोशेथ था.

  3. 2 शमुएल ४:५लगभग १०४८ ई.पू.

    बीरोथवासी रिम्मोन के दोनों पुत्रों, रेखाब और बाअनाह ने यात्रा प्रारंभ की, और वे इश-बोशेथ के आवास पर उस समय जा पहुंचे जब दिन की गर्मी के समय इश-बोशेथ विश्राम कर रहा था.

  4. 2 शमुएल ४:६लगभग १०४८ ई.पू.

    वे भवन के बीचवाले कमरे में कुछ इस ढंग से जा पहुंचे मानो वे वहां गेहूं लेने आए थे. वहां उन्होंने इश-बोशेथ के पेट में वार कर दिया. यह करके रेखाब और उसका भाई बाअनाह भाग निकले.

  5. 2 शमुएल ४:७लगभग १०४८ ई.पू.

    जब उन्होंने भवन में प्रवेश किया, इश-बोशेथ अपने कमरे में बिछौने पर लेटे हुए थे. उन्होंने उन पर वार किया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई. इसके बाद उन्होंने उनका सिर काट लिया और उसे लेकर वे सारी रात अराबाह मार्ग पर चलते रहे.

  6. 2 शमुएल ४:८लगभग १०४८ ई.पू.

    इश-बोशेथ के सिर को लेकर दावीद के पास हेब्रोन जा पहुंचे और उन्हें यह सूचना दी, “यह देखिए, आपके शत्रु शाऊल के पुत्र इश-बोशेथ का सिर, जो आपके प्राणों के प्यासे रहे थे. अब आज याहवेह ने राजा, मेरे स्वामी को शाऊल और उनके वंशजों का बदला दे दिया है.”

  7. 2 शमुएल ४:९लगभग १०४८ ई.पू.

    दावीद ने बीरोथवासी रिम्मोन के पुत्रों रेखाब और उसके भाई बाअनाह को उत्तर दिया, “जीवित याहवेह की शपथ, जिन्होंने मेरे जीवन को सभी पीड़ाओं से छुड़ाया है,

  8. 2 शमुएल ४:१०लगभग १०४८ ई.पू.

    जब उस व्यक्ति ने आकर मुझे सूचना दी, सुनिए, ‘शाऊल की मृत्यु हो चुकी है,’ वह यह समझ रहा था कि वह मेरे लिए शुभ संदेश लेकर आया है, मैंने उसे पकड़ा और उसका वध कर दिया, यह ज़िकलाग की घटना है. उसके द्वारा लाए गए समाचार का ईनाम मैंने उसे इस रीति से दिया था.

  9. 2 शमुएल ४:११लगभग १०४८ ई.पू.

    अब यह विचार करो कि और कितनी अधिक होगी वह प्रतिक्रिया, जब दुष्ट व्यक्तियों ने एक धर्मी व्यक्ति की हत्या उसके घर में जाकर उसके बिछौने पर की है. क्या सही नहीं कि उसके रक्त का बदला तुम्हीं से लेकर तुम्हें पृथ्वी पर से मिटा दूं!”

  10. 2 शमुएल ४:१२लगभग १०४८ ई.पू.

    तब दावीद ने युवाओं को आदेश दिया और उन्होंने उन दोनों की हत्या कर दी, उनके हाथ और पांव काटकर उनके शव हेब्रोन के ताल के निकट लटका दिए. मगर उन्होंने इश-बोशेथ के सिर को हेब्रोन में अबनेर की कब्र में गाड़ दिया.

  11. 2 शमुएल ५:१लगभग १०४८ ई.पू.

    इसके बाद इस्राएल के सारे गोत्र हेब्रोन में दावीद से भेंटकरने आए और उनके समक्ष यह प्रस्ताव रखा, “विचार कीजिए, हम आप ही की अस्थि और मांस हैं.

  12. 2 शमुएल ५:२लगभग १०४८ ई.पू.

    पिछले सालों में जब राजा तो शाऊल थे किंतु ये आप ही थे, जो हमारा मार्गदर्शन और इस्राएली सेना को चलाते रहे. याहवेह ने आपसे कहा था, ‘तुम मेरी प्रजा इस्राएल के चरवाहे होगे, तुम मेरी प्रजा इस्राएल के शासक होगे.’ ”

  13. 2 शमुएल ५:३लगभग १०४८ ई.पू.

    अत: इस्राएल के सारे प्राचीन हेब्रोन नगर में राजा के सामने इकट्ठा हुए. दावीद ने याहवेह के सामने उनसे वाचा बांधी. तत्पश्चात उन्होंने इस्राएल के लिए दावीद का राजाभिषेक किया.

  14. 2 शमुएल ५:४लगभग १०४८ ई.पू.

    शासन प्रारंभ करते समय दावीद की आयु तीस वर्ष की थी, और उन्होंने चालीस वर्ष शासन किया.

  15. 2 शमुएल ५:५लगभग १०४८ ई.पू.

    उन्होंने हेब्रोन में रहते हुए यहूदिया पर सात वर्ष छः माह शासन किया और येरूशलेम में उन्होंने संपूर्ण इस्राएल और यहूदिया पर तैंतीस वर्ष शासन किया.

  16. 2 शमुएल ५:६लगभग १०४८ ई.पू.

    राजा ने अपनी सेना के साथ येरूशलेम जाकर उस देश के निवासी यबूसियों पर आक्रमण किया. यबूसियों ने दावीद को संदेश भेजा, “तुम तो यहां प्रवेश भी न कर सकोगे; तुम्हें तो हमारे अंधे और लंगड़े ही पछाड़ देंगे!” उनका विचार था, “दावीद के लिए यहां प्रवेश करना संभव नहीं है.”

  17. 2 शमुएल ५:७लगभग १०४८ ई.पू.

    फिर भी, दावीद ने ज़ियोन गढ़ पर अधिकार कर लिया. अब यह दावीद के नगर के नाम से प्रख्यात हो गया है.

  18. 2 शमुएल ५:८लगभग १०४८ ई.पू.

    उस अवसर पर दावीद ने अपने लोगों से कहा, “यदि तुम लोग यबूसियों को हराना चाहते हो तो जल सुरंग से जाओ, और उन ‘अंधों तथा विकलांगों’ पर हमला करो.” यही कारण है कि लोग कहते हैं “अंधों और विकलांग को (राज) निवास में प्रवेश निषेध है.”

  19. 2 शमुएल ५:९लगभग १०४८ ई.पू.

    दावीद ने गढ़ पर अधिकार कर लिया और उसे दावीद-नगर नाम दिया. दावीद ने मिल्लो से प्रारंभ कर इसके चारों ओर भीतर की ओर नगर का निर्माण किया.

  20. 2 शमुएल ५:१०लगभग १०४८ ई.पू.

    दावीद पर सर्वशक्तिमान याहवेह परमेश्वर की कृपादृष्टि थी, इसलिए दावीद धीरे धीरे मजबूत होते चले गए.

  21. 2 शमुएल ५:११लगभग १०४८ ई.पू.

    इसके बाद सोर के राजा हीराम ने दावीद के पास अपने दूत भेजे, जो दावीद के घर को बनाने के लिए अपने साथ देवदार की लकड़ी, बढ़ई और राजमिस्त्री भी ले आए.

  22. 2 शमुएल ५:१२लगभग १०४८ ई.पू.

    इससे दावीद को यह अहसास हो गया कि याहवेह ने उन्हें इस्राएल के राजा के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया है, और यह भी कि याहवेह ने अपनी प्रजा इस्राएल के हित में अपने राज्य को उन्‍नत किया है.

  23. 2 शमुएल ५:१३लगभग १०४८ ई.पू.

    हेब्रोन से येरूशलेम आकर बसने पर दावीद और भी उपपत्नियां और पत्नियां ले आए. उनको और भी संतान पैदा हुई.

  24. 2 शमुएल ५:१४लगभग १०४८ ई.पू.

    येरूशलेम में पैदा उनकी संतान के नाम ये हैं: शम्मुआ, शोबाब, नाथान, शलोमोन,

  25. 2 शमुएल ५:१५लगभग १०४८ ई.पू.

    इबहार, एलिशुआ, नेफ़ेग, याफिया,