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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मार्कास १३:३लगभग ३३ ई.

    मसीह येशु ज़ैतून पर्वत पर मंदिर की ओर मुख किए हुए बैठे थे. एकांत पाकर पेतरॉस, याकोब, योहन तथा आन्द्रेयास ने मसीह येशु से यह प्रश्न किया,

  2. मार्कास १३:४लगभग ३३ ई.

    “हमको यह बताइए कि यह कब घटित होगा तथा इन सबके निष्पादन (पूरा किया जाना) के समय का लक्षण क्या होगा?”

  3. मार्कास १३:५लगभग ३३ ई.

    तब मसीह येशु ने यह वर्णन करना प्रारंभ किया: “इस विषय में सावधान रहना कि कोई तुम्हें भरमाने न पाए

  4. मार्कास १३:६लगभग ३३ ई.

    क्योंकि मेरे नाम में अनेक यह दावा करते आएंगे, ‘मैं ही मसीह हूं’ और इसके द्वारा अनेकों को भरमा देंगे.

  5. मार्कास १३:७लगभग ३३ ई.

    तुम युद्धों के विषय में तो सुनोगे ही साथ ही उनके विषय में उड़ते-उड़ते समाचार भी. ध्यान रहे कि तुम इससे घबरा न जाओ क्योंकि इनका होना अवश्य है—किंतु इसे ही अंत न समझ लेना.

  6. मार्कास १३:८लगभग ३३ ई.

    राष्ट्र-राष्ट्र के तथा, राज्य-राज्य के विरुद्ध उठ खड़ा होगा. हर जगह अकाल पड़ेंगे तथा भूकंप आएंगे, किंतु ये सब घटनाएं प्रसववेदना का प्रारंभ मात्र होंगी.

  7. मार्कास १३:९लगभग ३३ ई.

    “फिर भी चौकस रहना. वे तुम्हें पकड़कर न्यायालय को सौंप देंगे, यहूदी सभागृहों में तुम्हें कोड़े लगाए जाएंगे, मेरे लिए तुम्हें शासकों तथा राजाओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा कि तुम उनके सामने मेरे गवाह हो जाओ.

  8. मार्कास १३:१०लगभग ३३ ई.

    यह ज़रूरी है कि इसके पहले सभी राष्ट्रों में सुसमाचार का प्रचार किया जाए.

  9. मार्कास १३:११लगभग ३३ ई.

    जब तुम बंदी बनाए जाओ और तुम पर मुकद्दमा चलाया जाए तो यह चिंता न करना कि तुम्हें वहां क्या कहना है. तुम वही कहोगे, जो कुछ तुम्हें वहां उसी समय बताया जाएगा क्योंकि वहां तुम नहीं परंतु पवित्र आत्मा अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे होंगे.

  10. मार्कास १३:१२लगभग ३३ ई.

    “भाई अपने भाई को तथा पिता अपनी संतान को हत्या के लिए पकड़वाएगा. बालक अपने माता-पिता के विरुद्ध हो जाएंगे और उनकी हत्या का कारण बन जाएंगे.

  11. मार्कास १३:१३लगभग ३३ ई.

    मेरे कारण सभी तुमसे घृणा करेंगे किंतु उद्धार वही पाएगा, जो अंत तक धीरज धरेगा तथा स्थिर रहेगा.

  12. मार्कास १३:१४लगभग ३३ ई.

    “उस समय, जब तुम उस विनाशकारी घृणित वस्तु को ऐसे स्थान में खड़ी दिखे, जो उसका निर्धारित स्थान नहीं है—पाठक इसे समझ ले—तब वे, जो यहूदिया प्रदेश में हों पर्वतों पर भागकर जाएं.

  13. मार्कास १३:१५लगभग ३३ ई.

    वह, जो घर की छत पर हो, घर में से सामान लेने नीचे न आए.

  14. मार्कास १३:१६लगभग ३३ ई.

    वह, जो खेत में हो, अपना कपड़ा लेने पीछे न लौटे.

  15. मार्कास १३:१७लगभग ३३ ई.

    दयनीय होगी गर्भवती और शिशुओं को दूध पिलाती स्त्रियों की स्थिति!

  16. मार्कास १३:१८लगभग ३३ ई.

    प्रार्थना करते रहो, ऐसा न हो कि तुम्हें जाड़े में भागना पड़े

  17. मार्कास १३:१९लगभग ३३ ई.

    क्योंकि वह महाक्लेश काल होगा—ऐसा कि जो न तो सृष्टि के प्रारंभ से आज तक देखा गया, न ही इसके बाद दोबारा देखा जाएगा.

  18. मार्कास १३:२०लगभग ३३ ई.

    “यदि प्रभु द्वारा इसकी काल-अवधि घटाई न जाती, तो कोई भी जीवित न रहता. कुछ चुने हुए विशेष लोगों के लिए यह अवधि घटा दी जाएगी.

  19. मार्कास १३:२१लगभग ३३ ई.

    उस समय यदि कोई आकर तुम्हें सूचित करे, ‘सुनो-सुनो, मसीह यहां हैं,’ या ‘वह वहां हैं,’ तो विश्वास न करना,

  20. मार्कास १३:२२लगभग ३३ ई.

    क्योंकि अनेक झूठे मसीह तथा अनेक झूठे भविष्यवक्ता उठ खड़े होंगे. वे प्रभावशाली चमत्कार चिह्न दिखाएंगे तथा अद्भुत काम करेंगे कि यदि संभव हुआ तो परमेश्वर द्वारा चुने हुओं को भी भटका दें.

  21. मार्कास १३:२३लगभग ३३ ई.

    सावधान रहना, मैंने समय से पूर्व ही तुम्हें इसकी चेतावनी दे दी है.

  22. मार्कास १३:२४लगभग ३३ ई.

    “उन दिनों में क्लेश के तुरंत बाद, “ ‘सूर्य अंधेरा हो जाएगा, और चंद्रमा प्रकाश न देगा;

  23. मार्कास १३:२५लगभग ३३ ई.

    तथा आकाश से तारे नीचे गिरने लगेंगे. आकाशमंडल की शक्तियां हिलायी जाएंगी.’

  24. मार्कास १३:२६लगभग ३३ ई.

    “तब आकाश में मनुष्य के पुत्र का चिह्न प्रकट होगा, और वे मनुष्य के पुत्र को आकाश में बादलों पर सामर्थ्य और प्रताप के साथ आता हुआ देखेंगे.

  25. मार्कास १३:२७लगभग ३३ ई.

    मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, जो चारों दिशाओं से, पृथ्वी के एक छोर से आकाश के दूसरे छोर तक जाकर उनके चुने हुओं को इकट्ठा करेंगे.