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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मीकाह ३:६लगभग ७१० ई.पू.

    इसलिये तुम्हें बिना बताये तुम्हारे ऊपर रात्रि आ जाएगी, और बिना बताये तुम्हारे ऊपर अंधेरा छा जाएगा. इन भविष्यवक्ताओं के लिये सूर्यास्त हो जाएगा, और दिन रहते उन पर अंधेरा छा जाएगा.

  2. मीकाह ३:७लगभग ७१० ई.पू.

    भविष्यदर्शी लज्जित होंगे और भविष्य बतानेवाले कलंकित होंगे. वे सब लज्जा से अपना मुंह ढांप लेंगे क्योंकि उन्हें परमेश्वर से कोई उत्तर न मिलेगा.”

  3. मीकाह ३:८लगभग ७१० ई.पू.

    पर जहां तक मेरा सवाल है, मैं याहवेह के आत्मा के साथ सामर्थ्य से, तथा न्याय और बल से भरा हुआ हूं, ताकि याकोब को उसका अपराध, और इस्राएल को उसका पाप बता सकूं.

  4. मीकाह ३:९लगभग ७१० ई.पू.

    हे याकोब के अगुओ, हे इस्राएल के शासको, यह बात सुनो, तुम जो न्याय को तुच्छ समझते हो और सब सही बातों को बिगाड़ते हो;

  5. मीकाह ३:१०लगभग ७१० ई.पू.

    तुम जो ज़ियोन को रक्तपात से, और येरूशलेम को दुष्टता से भरते हो.

  6. मीकाह ३:११लगभग ७१० ई.पू.

    उसके अगुए घूस लेकर न्याय करते हैं, उसके पुरोहित दाम लेकर शिक्षा देते हैं, और उसके भविष्यवक्ता पैसों के लिये भविष्य बताते हैं. तौभी वे याहवेह की मदद की कामना करते हुए कहते हैं, “क्या याहवेह हमारे मध्य में नहीं हैं? कोई भी विपत्ति हमारे ऊपर नहीं आएगी.”

  7. मीकाह ३:१२लगभग ७१० ई.पू.

    इसलिये तुम्हारे ही कारण, ज़ियोन पर खेत के सदृश हल चला दिया जाएगा, येरूशलेम खंडहर हो जाएगा, तथा भवन की पहाड़ी वन में पूजा-स्थल का स्वरूप ले लेगी.

  8. मीकाह ४:१लगभग ७१० ई.पू.

    कि अंत के दिनों में वह पर्वत और पहाड़ जिस पर याहवेह का भवन है; उसे दृढ़ और ऊंचा किया जायेगा, और सब जाति के लोग बहती हुई नदी के समान उस ओर आएंगे.

  9. मीकाह ४:२लगभग ७१० ई.पू.

    और जाति के लोग कहेंगे, “आओ, हम याहवेह के पर्वत, याकोब के परमेश्वर के भवन को चलें. कि वह हमें अपने नियम सिखाएं, और हम उनके मार्गों पर चलें.” क्योंकि ज़ियोन से व्यवस्था निकलेगी, और येरूशलेम से याहवेह का वचन आएगा.

  10. मीकाह ४:३लगभग ७१० ई.पू.

    परमेश्वर जनताओं के बीच न्याय करेंगे और लोगों की परेशानियां दूर करेंगे. तब वे अपनी तलवारों को पीट-पीटकर हल के फाल तथा अपने भालों को हंसिया बना लेंगे. एक देश दूसरे के विरुद्ध तलवार नहीं उठायेगा, तथा उन्हें फिर कभी लड़ने के लिए तैयार नहीं किया जाएगा.

  11. मीकाह ४:४लगभग ७१० ई.पू.

    हर एक जन अपनी ही अंगूर की लता और अपने ही अंजीर के वृक्ष के नीचे बैठेगा, और उन्हें कोई नहीं डराएगा, क्योंकि सर्वशक्तिमान याहवेह ने कहा है.

  12. मीकाह ४:५लगभग ७१० ई.पू.

    सब जातियां अपने-अपने देवताओं का नाम लेकर चलें तो चलें, पर हम सदा-सर्वदा याहवेह अपने परमेश्वर का नाम लेकर चलेंगे.

  13. मीकाह ४:६लगभग ७१० ई.पू.

    “उस दिन,” यह याहवेह की घोषणा है, “मैं लंगड़ों को इकट्ठा करूंगा; मैं बंधुवा लोगों को और उन लोगों को भी इकट्ठा करूंगा जिन्हें मैंने दुःख दिया है.

  14. मीकाह ४:७लगभग ७१० ई.पू.

    मैं लंगड़ों को अपना बचा हुआ भाग, और भगाये हुओं को एक मजबूत जाति बनाऊंगा. तब उस समय से लेकर सदा-सर्वदा तक याहवेह ज़ियोन पर्वत से उन पर शासन करते रहेंगे.

  15. मीकाह ४:८लगभग ७१० ई.पू.

    जहां तक तुम्हारा सवाल है, हे झुंड की चौकसी के मचान, हे ज़ियोन की पुत्री के सुरक्षा गढ़, तुम्हें तुम्हारे पहले का राज्य दे दिया जाएगा; येरूशलेम की पुत्री को राजपद दिया जाएगा.”

  16. मीकाह ४:९लगभग ७१० ई.पू.

    तुम उच्च स्वर में क्यों चिल्ला रही हो, क्या तुम्हारा कोई राजा नहीं है? क्या तुम्हारा शासन करनेवाला नाश हो गया है, कि तुम जच्चा स्त्री के समान दर्द से छटपटा रही हो?

  17. मीकाह ४:१०लगभग ७१० ई.पू.

    हे ज़ियोन की बेटी, जच्चा स्त्री की तरह दर्द से छटपटाओ, क्योंकि अब तुम्हें शहर छोड़कर खुले मैदान में डेरा डालना ज़रूरी है. तुम बाबेल जाओगी; और तुम बचाई जाओगी. वहां याहवेह तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं के हाथ से छुड़ाएंगे.

  18. मीकाह ४:११लगभग ७१० ई.पू.

    पर अब तो तुम्हारे विरुद्ध में बहुत से राष्ट्र इकट्‍ठे हुए हैं. वे कहते हैं, “उसे अशुद्ध होने दो, ज़ियोन की दुर्गति हमारे आनंद का विषय हो!”

  19. मीकाह ४:१२लगभग ७१० ई.पू.

    पर वे याहवेह के विचारों को नहीं जानते हैं; वे उसकी उस योजना को नहीं समझते, कि उसने उन्हें पूलियों के समान खलिहान में इकट्ठा किया है.

  20. मीकाह ४:१३लगभग ७१० ई.पू.

    “हे ज़ियोन की बेटी, उठ और दांवनी कर, क्योंकि मैं तुम्हें लोहे के सींग दूंगा; मैं तुम्हें पीतल के खुर दूंगा, और तुम बहुत सी जातियों को टुकड़े-टुकड़े कर दोगी.” तुम उनकी लूटी गई चीज़ें याहवेह को, और उनकी संपत्ति सारे पृथ्वी के प्रभु को अर्पित करोगी.

  21. मीकाह ५:१लगभग ७१० ई.पू.

    हे सैन्य-दलों के शहर, अपने सैनिकों को क़तार में कर लो, क्योंकि हमारे विरुद्ध एक घेरा डाला गया है. वे इस्राएल के शासक के गाल पर लाठी से प्रहार करेंगे.

  22. मीकाह ५:२लगभग ७१० ई.पू.

    “पर तुम, हे एफ़राथा के बेथलेहेम, यद्यपि तुम यहूदिया के वंशजों में छोटे हो, तुमसे ही मेरे लिए एक व्यक्ति का आगमन होगा जो इस्राएल के ऊपर शासक होगा, जिसका उद्गम पुराने समय से, प्राचीन काल से है.”

  23. मीकाह ५:३लगभग ७१० ई.पू.

    इसलिये इस्राएल को उस समय तक त्याग दिया जाएगा, जब तक वह जो प्रसव पीड़ा में है, एक बालक को जन्म नहीं दे देती, और उसके बाकी भाई इस्राएलियों से मिल जाने के लिये लौट नहीं जाते.

  24. मीकाह ५:४लगभग ७१० ई.पू.

    वह याहवेह के बल से, याहवेह अपने परमेश्वर के नाम के प्रताप से उठ खड़ा होगा और अपने झुंड की देखरेख करेगा. और वे सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि तब पृथ्वी की छोर तक लोग उसकी महानता को जानेंगे.

  25. मीकाह ५:५लगभग ७१० ई.पू.

    और वह हमारी शांति होगा जब अश्शूरवासी हमारे देश पर आक्रमण करेंगे और हमारे गढ़ों में प्रवेश करेंगे. हम उनके विरुद्ध सात चरवाहे, वरन आठ सेनापति खड़े कर देंगे,