मुख्य सामग्री पर जाएँ

Psalms के बारे में बाइबल के वचन

896 वचन · 16 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. तब मैं परमेश्वर की वेदी के निकट जा सकूंगा, वही परमेश्वर, जो मेरे परमानंद हैं. तब परमेश्वर, मेरे परमेश्वर, मैं किन्‍नोर की संगत पर आपकी वंदना करूंगा.

  2. मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्‍न क्यों हो? क्यों मेरे हृदय में तुम ऐसे व्याकुल हो गए हो? परमेश्वर पर भरोसा रखो, क्योंकि यह सब होते हुए भी मैं याहवेह का स्तवन करूंगा.

  3. संगीत निर्देशक के लिये. कोराह के पुत्रों की रचना. एक स्तोत्र. समस्त राष्ट्रो, तालियां बजाओ; हर्षोल्लास में परमेश्वर का जय जयकार करो.

  4. याहवेह, सर्वोच्च परमेश्वर भय-योग्य हैं, वही समस्त पृथ्वी के ऊपर पराक्रमी राजा हैं.

  5. उन्हीं ने जनताओं को हमारे अधीन कर दिया है, लोग हमारे पैरों के नीचे हो गए हैं.

  6. उन्हीं ने हमारे लिए निज भाग को निर्धारित किया है, यही याकोब का गौरव है, जो उनका प्रिय है.

  7. जय जयकार की ध्वनि के मध्य से परमेश्वर ऊपर उठाए गए, तुरही नाद के मध्य याहवेह ऊपर उठाए गए.

  8. स्तुति गान में परमेश्वर की वंदना करो, वंदना करो; स्तुति गान में हमारे राजाधिराज की वंदना करो, वंदना करो.

  9. परमेश्वर संपूर्ण पृथ्वी के राजाधिराज हैं; उनके सम्मान में एक स्तवन गीत प्रस्तुत करो.

  10. संपूर्ण राष्ट्रों पर परमेश्वर का शासन है; परमेश्वर अपने महान सिंहासन पर विराजमान हैं.

  11. अब्राहाम के परमेश्वर की प्रजा के रूप में जनताओं के अध्यक्ष एकत्र हुए हैं, क्योंकि पृथ्वी की ढालों पर परमेश्वर का अधिकार है; परमेश्वर अत्यंत ऊंचे हैं.

  12. संगीत निर्देशक के लिये. दावीद की मसकील गीत रचना. इसका संदर्भ: एदोमवासी दोएग ने जाकर शाऊल को सूचित किया कि दावीद अहीमेलेख के आवास में ठहरे हैं. हे बलवान घमंडी, अपनी बुराई का अहंकार क्यों करता है? तू दिन भर क्यों घमंड करता है, तू जो परमेश्वर की नजर में एक अपमान है?

  13. तेज उस्तरे जैसी तुम्हारी जीभ विनाश की बुरी युक्ति रचती रहती है, और तुम छल के कार्य में लिप्‍त रहते हो.

  14. तुम्हें भलाई से ज्यादा अधर्म, और सत्य से अधिक झूठाचार पसंद है.

  15. हे छली जीभ, तुझे तो हर एक बुरा शब्द प्रिय है!

  16. यह सुनिश्चित है कि परमेश्वर ने तेरे लिए स्थायी विनाश निर्धारित किया है: वह तुझे उखाड़कर तेरे निवास से दूर कर देंगे; परमेश्वर तुझे जीव-लोक से उखाड़ देंगे.

  17. यह देख धर्मी भयभीत हो जाएंगे; वे उसे देख यह कहते हुए उपहास करेंगे,

  18. “उस पुरुष को देखो, जिसने परमेश्वर को अपना आश्रय बनाना उपयुक्त न समझा परंतु उसने अपनी धन-संपत्ति पर भरोसा किया और अन्यों पर दुष्कर्म करते हुए सशक्त होता गया!”

  19. किंतु मैं परमेश्वर के निवास के हरे-भरे जैतून वृक्ष के समान हूं; मैं परमेश्वर के करुणा-प्रेम पर सदा-सर्वदा भरोसा रखता हूं.

  20. परमेश्वर, मैं आपके द्वारा किए गए कार्यों के लिए सदा-सर्वदा आपका धन्यवाद करता रहूंगा. आपके नाम मेरी आशा रहेगी, क्योंकि वह उत्तम है, आपके भक्तों के उपस्थिति में मैं आपकी वंदना करता रहूंगा.

  21. संगीत निर्देशक के लिये. माख़लथ पर आधारित दावीद की मसकील गीत रचना मूर्ख मन ही मन में कहते हैं, “परमेश्वर है ही नहीं.” वे सभी भ्रष्‍ट हैं और उनकी जीवनशैली घिनौनी है; ऐसा कोई भी नहीं, जो भलाई करता हो.

  22. स्वर्ग से परमेश्वर मनुष्यों पर दृष्टि डालते हैं इस आशा में कि कोई तो होगा, जो बुद्धिमान है, जो परमेश्वर की खोज करता हो.

  23. सभी मनुष्य भटक गए हैं, सभी नैतिक रूप से भ्रष्‍ट हो चुके हैं; कोई भी सत्कर्म परोपकार नहीं करता, हां, एक भी नहीं.

  24. मेरी प्रजा के ये भक्षक, ये दुष्ट पुरुष, क्या ऐसे निर्बुद्धि हैं? जो उसे ऐसे खा जाते हैं, जैसे रोटी को; क्या उन्हें परमेश्वर की उपासना का कोई ध्यान नहीं?

  25. जहां भय का कोई कारण ही न था, वहां वे अत्यंत भयभीत हो गए. परमेश्वर ने उनकी हड्डियों को बिखरा दिया, जो तेरे विरुद्ध छावनी डाले हुए थे; तुमने उन्हें लज्जित कर डाला, क्योंकि वे परमेश्वर द्वारा लज्जित किये गये थे.