circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- लूकॉस २१:१९लगभग ३३ ई.
तुम्हारे धीरज में छिपी होगी तुम्हारे जीवन की सुरक्षा.
- लूकॉस २१:२०लगभग ३३ ई.
“जिस समय येरूशलेम नगर सेनाओं द्वारा घिरा हुआ दिखे, तब यह समझ लेना कि विनाश पास है.
- लूकॉस २१:२१लगभग ३३ ई.
तो वे, जो यहूदिया प्रदेश में हों पर्वतों पर भागकर जाएं; वे, जो नगर में हैं, नगर छोड़कर चले जाएं; जो नगर के बाहर हैं, वे नगर में प्रवेश न करें
- लूकॉस २१:२२लगभग ३३ ई.
क्योंकि यह बदला लेने का समय होगा कि वह सब, जो लेखों में पहले से लिखा है, पूरा हो जाए.
- लूकॉस २१:२३लगभग ३३ ई.
दयनीय होगी गर्भवती और दूध पिलाती स्त्रियों की स्थिति! क्योंकि यह मनुष्यों पर क्रोध तथा पृथ्वी पर घोर संकट का समय होगा.
- लूकॉस २१:२४लगभग ३३ ई.
वे तलवार से घात किए जाएंगे, अन्य राष्ट्र उन्हें बंदी बनाकर ले जाएंगे. येरूशलेम नगर गैर-यहूदियों द्वारा उस समय तक रौंदा जाएगा जब तक गैर-यहूदियों का समय पूरा न हो जाए.
- लूकॉस २१:२५लगभग ३३ ई.
“सूर्य, चंद्रमा और तारों में अद्भुत चिह्न दिखाई देंगे. पृथ्वी पर राष्ट्रों में आतंक छा जाएगा. गरजते सागर की लहरों के कारण लोग घबरा जाएंगे.
- लूकॉस २१:२६लगभग ३३ ई.
लोग भय और इस आशंका से मूर्च्छित हो जाएंगे कि अब संसार का क्या होगा क्योंकि आकाशमंडल की शक्तियां हिलायी जाएंगी.
- लूकॉस २१:२७लगभग ३३ ई.
तब वे मनुष्य के पुत्र को बादल में सामर्थ्य और प्रताप में नीचे आता हुआ देखेंगे.
- लूकॉस २१:२८लगभग ३३ ई.
जब ये घटनाएं घटित होने लगें, साहस के साथ स्थिर खड़े होकर आनेवाली घटना की प्रतीक्षा करो क्योंकि समीप होगा तुम्हारा छुटकारा.”
- लूकॉस २१:२९लगभग ३३ ई.
तब प्रभु येशु ने उन्हें इस दृष्टांत के द्वारा शिक्षा दी: “अंजीर के पेड़ तथा अन्य वृक्षों पर ध्यान दो.
- लूकॉस २१:३०लगभग ३३ ई.
जब उनमें कोंपलें निकलने लगती हैं तो तुम स्वयं जान जाते हो कि गर्मी का समय पास है.
- लूकॉस २१:३१लगभग ३३ ई.
इसी प्रकार, जब तुम इन घटनाओं को घटित होते हुए देखो तो तुम यह जान जाओगे कि परमेश्वर का राज्य अब पास है.
- लूकॉस २१:३२लगभग ३३ ई.
“सच्चाई तो यह है कि इन घटनाओं के हुए बिना इस युग का अंत नहीं होगा.
- लूकॉस २१:३३लगभग ३३ ई.
आकाश तथा पृथ्वी खत्म हो जाएंगे किंतु मेरे कहे हुए शब्द कभी नहीं.
- लूकॉस २१:३४लगभग ३३ ई.
“सावधान रहना कि तुम्हारा हृदय जीवन संबंधी चिंताओं, दुर्व्यसनों तथा मतवालेपन में पड़कर सुस्त न हो जाए और वह दिन तुम पर अचानक से फंदे जैसा आ पड़े.
- लूकॉस २१:३५लगभग ३३ ई.
उस दिन का प्रभाव पृथ्वी के हर एक मनुष्य पर पड़ेगा.
- लूकॉस २१:३६लगभग ३३ ई.
हमेशा सावधान रहना, प्रार्थना करते रहना कि तुम्हें इन आनेवाली घटनाओं से निकलने के लिए बल प्राप्त हो और तुम मनुष्य के पुत्र की उपस्थिति में खड़े हो सको.”
- लूकॉस २१:३७लगभग ३३ ई.
दिन के समय प्रभु येशु मंदिर में शिक्षा दिया करते तथा संध्याकाल में वह ज़ैतून पर्वत पर जाकर प्रार्थना करते हुए रात बिताया करते थे.
- लूकॉस २१:३८लगभग ३३ ई.
लोग भोर में उनका प्रवचन सुनने मंदिर आ जाया करते थे.
- लूकॉस २२:१लगभग ३३ ई.
अखमीरी रोटी का उत्सव, जो फ़सह पर्व कहलाता है, पास आ रहा था.
- लूकॉस २२:२लगभग ३३ ई.
प्रधान पुरोहित तथा शास्त्री इस खोज में थे कि प्रभु येशु को किस प्रकार मार डाला जाए, किंतु उन्हें लोगों का भय था.
- लूकॉस २२:३लगभग ३३ ई.
शैतान ने कारियोतवासी यहूदाह में, जो बारह शिष्यों में से एक था, प्रवेश किया.
- लूकॉस २२:४लगभग ३३ ई.
उसने प्रधान पुरोहितों तथा अधिकारियों से मिलकर निश्चित किया कि वह किस प्रकार प्रभु येशु को पकड़वा सकता है.
- लूकॉस २२:५लगभग ३३ ई.
इस पर प्रसन्न हो वे उसे इसका दाम देने पर सहमत हो गए.