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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लूकॉस २०:१६लगभग ३३ ई.

    यही कि वह आएगा और इन किसानों का वध कर बारी अन्य किसानों को सौंप देगा.” यह सुन लोगों ने कहा, “ऐसा कभी न हो!”

  2. लूकॉस २०:१७लगभग ३३ ई.

    तब उनकी ओर देखकर प्रभु येशु ने उनसे प्रश्न किया, “तो इस लेख का मतलब क्या है: “ ‘राजमिस्त्रियों द्वारा निकम्मी ठहराई शिला ही आधार की शिला बन गई’?”

  3. लूकॉस २०:१८लगभग ३३ ई.

    “हर एक, जो इस पत्थर पर गिरेगा, टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा किंतु जिस किसी पर यह पत्थर गिरेगा उसे कुचलकर चूर्ण बना देगा.”

  4. लूकॉस २०:१९लगभग ३३ ई.

    फलस्वरूप प्रधान पुरोहित तथा शास्त्री तत्क्षण प्रभु येशु को पकड़ने की योजना में जुट गए, क्योंकि वे यह समझ गए थे कि प्रभु येशु ने उन पर ही यह दृष्टांत कहा है. किंतु उन्हें भीड़ का भय था.

  5. लूकॉस २०:२०लगभग ३३ ई.

    वे प्रभु येशु की गतिविधियों पर दृष्टि रखे हुए थे. उन्होंने प्रभु येशु के पास अपने गुप्‍तचर भेजे कि वे धर्म का ढोंग कर प्रभु येशु को उनकी ही किसी बात में फंसाकर उन्हें राज्यपाल को सौंप दें.

  6. लूकॉस २०:२१लगभग ३३ ई.

    गुप्‍तचरों ने प्रभु येशु से प्रश्न किया, “गुरुवर, यह तो हम जानते हैं कि आपकी बातें तथा शिक्षाएं सही हैं और आप किसी के प्रति पक्षपाती भी नहीं हैं. आप पूरी सच्चाई में परमेश्वर के विषय में शिक्षा दिया करते हैं.

  7. लूकॉस २०:२२लगभग ३३ ई.

    इसलिये यह बताइए कि कयसर को कर देना न्याय संगत है या नहीं?”

  8. लूकॉस २०:२३लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने उनकी चतुराई जानते हुए उनसे कहा.

  9. लूकॉस २०:२४लगभग ३३ ई.

    “मुझे एक दीनार दिखाओ. इस पर आकृति तथा मुद्रण किसका है?” उन्होंने उत्तर दिया, “कयसर का.”

  10. लूकॉस २०:२५लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने उनसे कहा, “तो जो कयसर का है. वह कयसर को और जो परमेश्वर का है, वह परमेश्वर को दो.”

  11. लूकॉस २०:२६लगभग ३३ ई.

    भीड़ की उपस्थिति में वे प्रभु येशु को उनकी बातों के कारण पकड़ने में असफल रहे. प्रभु येशु के इस उत्तर से वे चकित थे और आगे कुछ भी न कह पाए.

  12. लूकॉस २०:२७लगभग ३३ ई.

    सदूकी समुदाय के कुछ लोग, जो पुनरुत्थान में विश्वास नहीं करते, प्रभु येशु के पास आए.

  13. लूकॉस २०:२८लगभग ३३ ई.

    उन्होंने उनसे प्रश्न किया, “गुरुवर, हमारे लिए मोशेह के निर्देश हैं यदि किसी निःसंतान पुरुष का पत्नी के रहते हुए निधन हो जाए तो उसका भाई उस स्त्री से विवाह कर अपने भाई के लिए संतान पैदा करे.

  14. लूकॉस २०:२९लगभग ३३ ई.

    सात भाई थे. पहले ने विवाह किया और निःसंतान ही उसकी मृत्यु हो गई.

  15. लूकॉस २०:३०लगभग ३३ ई.

    तब दूसरे ने

  16. लूकॉस २०:३१लगभग ३३ ई.

    और फिर तीसरे ने उससे विवाह किया और इस प्रकार सातों ही निःसंतान चल बसे.

  17. लूकॉस २०:३२लगभग ३३ ई.

    अंततः उस स्त्री की भी मृत्यु हो गई.

  18. लूकॉस २०:३३लगभग ३३ ई.

    अब यह बताइए कि पुनरुत्थान पर वह किसकी पत्नी कहलाएगी? क्योंकि उसका विवाह तो सातों भाइयों से हुआ था.”

  19. लूकॉस २०:३४लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने उन्हें उत्तर दिया, “विवाह केवल इसी लोक में होते हैं.

  20. लूकॉस २०:३५लगभग ३३ ई.

    वे, जो आनेवाले लोक में प्रवेश तथा मरे हुओं में से जी उठने के योग्य गिने जाते हैं, वैवाहिक अवस्था में प्रवेश नहीं करते.

  21. लूकॉस २०:३६लगभग ३३ ई.

    जी उठने पर लोग न तो वैवाहिक अवस्था में होंगे और न ही कभी उनकी मृत्यु होगी क्योंकि वहां वे स्वर्गदूतों जैसे होते हैं. जी उठने के परिणामस्वरूप वे परमेश्वर की संतान होंगे.

  22. लूकॉस २०:३७लगभग ३३ ई.

    मरे हुओं का जी उठना एक सच्चाई है, इसकी पुष्टि स्वयं मोशेह ने जलती हुई झाड़ी के विवरण में की है, जहां वह प्रभु को अब्राहाम का परमेश्वर, यित्सहाक का परमेश्वर तथा याकोब का परमेश्वर कहते हैं.

  23. लूकॉस २०:३८लगभग ३३ ई.

    इसलिये वह मरे हुओं के नहीं, जीवितों के परमेश्वर हैं क्योंकि उनके सामने ये सभी जीवित हैं.”

  24. लूकॉस २०:३९लगभग ३३ ई.

    कुछ शास्त्रियों ने इसके उत्तर में कहा, “गुरुवर, अति उत्तम उत्तर दिया आपने!”

  25. लूकॉस २०:४०लगभग ३३ ई.

    उनमें से किसी को भी अब उनसे किसी भी विषय में प्रश्न करने का साहस न रहा.