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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लूकॉस २२:६लगभग ३३ ई.

    यहूदाह प्रभु येशु को उनके हाथ पकड़वा देने के ऐसे सुअवसर की प्रतीक्षा करने लगा, जब आस-पास भीड़ न हो.

  2. लूकॉस २२:७लगभग ३३ ई.

    तब अखमीरी रोटी का उत्सव आ गया, जब फ़सह का मेमना बलि किया जाता था.

  3. लूकॉस २२:८लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने पेतरॉस और योहन को इस आज्ञा के साथ भेजा, “जाओ और हमारे लिए फ़सह की तैयारी करो.”

  4. लूकॉस २२:९लगभग ३३ ई.

    उन्होंने उनसे प्रश्न किया, “प्रभु, हम किस स्थान पर इसकी तैयारी करें, आप क्या चाहते हैं?”

  5. लूकॉस २२:१०लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने उन्हें उत्तर दिया, “नगर में प्रवेश करते ही तुम्हें एक व्यक्ति पानी का घड़ा ले जाता हुआ मिलेगा. उसका पीछा करते हुए तुम उस घर में चले जाना,

  6. लूकॉस २२:११लगभग ३३ ई.

    जिस घर में वह प्रवेश करेगा. उस घर के स्वामी से कहना, ‘गुरु ने पूछा है, “वह अतिथि कक्ष कहां है जहां मैं अपने शिष्यों के साथ फ़सह खाऊंगा?” ’

  7. लूकॉस २२:१२लगभग ३३ ई.

    वह तुमको एक विशाल, सुसज्जित ऊपरी कक्ष दिखाएगा; तुम वहीं सारी तैयारी करना.”

  8. लूकॉस २२:१३लगभग ३३ ई.

    यह सुन वे दोनों वहां से चले गए और सब कुछ ठीक वैसा ही पाया जैसा प्रभु येशु ने कहा था. उन्होंने वहां फ़सह तैयार किया.

  9. लूकॉस २२:१४लगभग ३३ ई.

    नियत समय पर प्रभु येशु अपने प्रेरितों के साथ भोज पर बैठे.

  10. लूकॉस २२:१५लगभग ३३ ई.

    उन्होंने प्रेरितों से कहा, “मेरी बड़ी लालसा थी कि मैं अपने दुःख-भोग के पहले यह फ़सह तुम्हारे साथ खाऊं.

  11. लूकॉस २२:१६लगभग ३३ ई.

    क्योंकि सच यह है कि मैं इसे दोबारा तब तक नहीं खाऊंगा जब तक यह परमेश्वर के राज्य में पूरा न हो.”

  12. लूकॉस २२:१७लगभग ३३ ई.

    तब उन्होंने प्याला उठाया, परमेश्वर के प्रति धन्यवाद दिया और कहा, “इसे लो, आपस में बांट लो

  13. लूकॉस २२:१८लगभग ३३ ई.

    क्योंकि यह निर्धारित है कि जब तक परमेश्वर के राज्य का आगमन न हो जाए, दाख का रस तब तक मैं नहीं पिऊंगा.”

  14. लूकॉस २२:१९लगभग ३३ ई.

    तब उन्होंने रोटी ली, धन्यवाद देते हुए उसे तोड़ा और शिष्यों को यह कहते हुए दे दी, “यह मेरा शरीर है, जो तुम्हारे लिए दिया जा रहा है. मेरी याद में तुम ऐसा ही किया करना.”

  15. लूकॉस २२:२०लगभग ३३ ई.

    इसी प्रकार इसके बाद प्रभु येशु ने प्याला उठाया और कहा, “यह प्याला मेरे लहू में, जो तुम्हारे लिए बहाया जा रहा है, नई वाचा है.

  16. लूकॉस २२:२१लगभग ३३ ई.

    वह, जो मुझे पकड़वाएगा हमारे साथ इस भोज में शामिल है.

  17. लूकॉस २२:२२लगभग ३३ ई.

    मनुष्य का पुत्र, जैसा उसके लिए तय किया गया है, आगे बढ़ रहा है, किंतु धिक्कार है उस व्यक्ति पर जो उसे पकड़वा रहा है!”

  18. लूकॉस २२:२३लगभग ३३ ई.

    यह सुन वे आपस में विचार-विमर्श करने लगे कि वह कौन हो सकता है, जो यह करने पर है.

  19. लूकॉस २२:२४लगभग ३३ ई.

    उनके बीच यह विवाद भी उठ खड़ा हुआ कि उनमें से सबसे बड़ा कौन है.

  20. लूकॉस २२:२५लगभग ३३ ई.

    यह जान प्रभु येशु ने उनसे कहा, “गैर-यहूदियों के राजा उन पर शासन करते हैं और वे, जिन्हें उन पर अधिकार है, उनके हितैषी कहलाते हैं.

  21. लूकॉस २२:२६लगभग ३३ ई.

    किंतु तुम वह नहीं हो—तुममें जो बड़ा है, वह सबसे छोटे के समान हो जाए और राजा सेवक समान.

  22. लूकॉस २२:२७लगभग ३३ ई.

    बड़ा कौन है—क्या वह, जो भोजन पर बैठा है या वह, जो खड़ा हुआ सेवा कर रहा है? तुम्हारे मध्य मैं सेवक के समान हूं.

  23. लूकॉस २२:२८लगभग ३३ ई.

    तुम्हीं हो, जो मेरे विषम समयों में मेरा साथ देते रहे हो.

  24. लूकॉस २२:२९लगभग ३३ ई.

    इसलिये जैसा मेरे पिता ने मुझे एक राज्य प्रदान किया है,

  25. लूकॉस २२:३०लगभग ३३ ई.

    वैसा ही मैं भी तुम्हें यह अधिकार देता हूं कि तुम मेरे राज्य में मेरी मेज़ पर बैठकर मेरे साथ संगति करो, और सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह वंशों का न्याय.