मुख्य सामग्री पर जाएँ

Creation Era

The Great Flood

Humanity's wickedness fills the earth; God preserves Noah and his family through a catastrophic flood.

97 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ७:४लगभग २३४८ ई.पू.

    क्योंकि अब से सात दिन के बाद, मैं पृथ्वी पर जल बरसाऊंगा, चालीस दिन तथा चालीस रात तक जल बरसाता रहूंगा और भूमि पर मेरे द्वारा रचे गये सभी जीवित प्राणी नष्ट हो जायेंगे.”

  2. उत्पत्ति ७:५लगभग २३४८ ई.पू.

    नोहा ने याहवेह की सब बातों को माना.

  3. उत्पत्ति ७:६लगभग २३४८ ई.पू.

    जब पृथ्वी पर जलप्रलय शुरू हुआ, तब नोहा छः सौ वर्ष के थे.

  4. उत्पत्ति ७:७लगभग २३४८ ई.पू.

    नोहा, उनकी पत्नी, उनके पुत्र, तथा उनकी बहुएं प्रलय से बचने के लिए जहाज़ में चले गए.

  5. उत्पत्ति ७:८लगभग २३४८ ई.पू.

    शुद्ध तथा अशुद्ध पशु, पक्षी तथा भूमि पर रेंगनेवाले जंतु,

  6. उत्पत्ति ७:९लगभग २३४८ ई.पू.

    नर एवं मादा को जोड़ों में नोहा ने जहाज़ में लिया, जैसा परमेश्वर ने नोहा से कहा था.

  7. उत्पत्ति ७:१०लगभग २३४८ ई.पू.

    सात दिन बाद पृथ्वी पर पानी बरसना शुरू हुआ.

  8. उत्पत्ति ७:११लगभग २३४८ ई.पू.

    नोहा के छः सौ वर्ष के दूसरे महीने के सत्रहवें दिन महासागर के सोते फूट पड़े तथा आकाश को खोल दिया गया.

  9. उत्पत्ति ७:१२लगभग २३४८ ई.पू.

    और पृथ्वी पर चालीस दिन तथा चालीस रात लगातार बरसात होती रही.

  10. उत्पत्ति ७:१३लगभग २३४८ ई.पू.

    ठीक उसी दिन नोहा, उनके पुत्र शेम, हाम तथा याफेत, नोहा की पत्नी तथा उनकी तीनों बहुएं जहाज़ में चले गए.

  11. उत्पत्ति ७:१४लगभग २३४८ ई.पू.

    और उनके साथ सब जाति के वन्य पशु, पालतू पशु, रेंगनेवाले जंतु, सभी प्रकार के पक्षी और वे सभी जिनके पंखे हैं, जहाज़ में गए.

  12. उत्पत्ति ७:१५लगभग २३४८ ई.पू.

    इस प्रकार वे सभी, जिसमें जीवन था, दो-दो नोहा के पास जहाज़ में पहुंच गए.

  13. उत्पत्ति ७:१६लगभग २३४८ ई.पू.

    नोहा को परमेश्वर के आदेश के अनुसार, जो जहाज़ में पहुंचे, वे सभी प्राणियों के नर एवं मादा थे. जहाज़ में आए सबके अंदर जाते ही याहवेह ने द्वार बंद कर दिया.

  14. उत्पत्ति ७:१७लगभग २३४८ ई.पू.

    पृथ्वी पर चालीस दिन तथा चालीस रात तक पानी बरसता रहा. पानी ऊपर होता गया और जहाज़ भी ऊपर उठता गया.

  15. उत्पत्ति ७:१८लगभग २३४८ ई.पू.

    पानी से पूरी पृथ्वी डूब गई, और जहाज़ पानी के ऊपर तैरता रहा.

  16. उत्पत्ति ७:१९लगभग २३४८ ई.पू.

    जल पृथ्वी पर इतना बढ़ गया कि आकाश के नीचे के बड़े-बड़े पहाड़ भी डूब गए.

  17. उत्पत्ति ७:२०लगभग २३४८ ई.पू.

    पानी पहाड़ के लगभग सात मीटर ऊंचा हो गया.

  18. उत्पत्ति ७:२१लगभग २३४८ ई.पू.

    पृथ्वी पर का सब कुछ नाश हो गया; प्रत्येक जीवित प्राणी जो भूमि पर चलती थी—पक्षी, पशु, जंगली जानवर, वे सभी प्राणी जो पृथ्वी पर तैरते हैं, और पूरी मानव जाति.

  19. उत्पत्ति ७:२२लगभग २३४८ ई.पू.

    थल के सभी जीवित प्राणी मर गये.

  20. उत्पत्ति ७:२३लगभग २३४८ ई.पू.

    इस प्रकार याहवेह ने पृथ्वी के सभी मनुष्य, पशु, रेंगनेवाले जंतु आकाश के पक्षी, सभी को नाश कर दिया. केवल नोहा और उनका परिवार तथा जो जीव-जन्तु जहाज़ में थे, वही बचे.

  21. उत्पत्ति ७:२४लगभग २३४८ ई.पू.

    150 दिन पृथ्वी पानी से ढकी रही.

  22. फिर परमेश्वर ने नोहा और सभी जंगली जानवरों और घरेलू पशुओं को याद किया जो जहाज़ में थे और एक हवा चलाई. तब पानी सूखने लगे और धीरे धीरे पानी कम होने लगा.

  23. आकाश से पानी बरसना रोक दिया गया, और पृथ्वी के नीचे से पानी का बहना भी रोक दिया गया.

  24. इसलिये जलप्रलय धीरे धीरे पृथ्वी से हट गए, 150 दिन पूरे होते-होते पानी कम हो चुका था.

  25. सातवें महीने के सत्रहवें दिन जहाज़ अरारात पर्वत पर जा टिका.