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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 1 पेतरॉस ४:१०लगभग ६० ई.

    हर एक ने परमेश्वर द्वारा विशेष क्षमता प्राप्‍त की है इसलिये वह परमेश्वर के असीम अनुग्रह के उत्तम भंडारी होकर एक दूसरे की सेवा करने के लिए उनका अच्छी तरह से उपयोग करें.

  2. 1 पेतरॉस ४:११लगभग ६० ई.

    यदि कोई प्रवचन करे, तो इस भाव में, मानो वह स्वयं परमेश्वर का वचन हो; यदि कोई सेवा करे, तो ऐसी सामर्थ्य से, जैसा परमेश्वर प्रदान करते हैं कि सभी कामों में मसीह येशु के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद हो, जिनका साम्राज्य और महिमा सदा-सर्वदा है. आमेन.

  3. 1 पेतरॉस ४:१२लगभग ६० ई.

    प्रियो, उस अग्नि रूपी परीक्षा से चकित न हो जो तुम्हें परखने के उद्देश्य से तुम पर आएगी, मानो कुछ अनोखी घटना घट रही है,

  4. 1 पेतरॉस ४:१३लगभग ६० ई.

    परंतु जब तुम मसीह के दुःखों में सहभागी होते हो, आनंदित होते रहो कि मसीह येशु की महिमा के प्रकट होने पर तुम्हारा आनंद उत्तम विजय आनंद हो जाए.

  5. 1 पेतरॉस ४:१४लगभग ६० ई.

    यदि मसीह के कारण तुम्हारी निंदा की जाती है तो तुम आशीषित हो क्योंकि तुम पर परमेश्वर की महिमा का आत्मा छिपा है.

  6. 1 पेतरॉस ४:१५लगभग ६० ई.

    तुममें से कोई भी किसी भी रीति से हत्यारे, चोर, दुराचारी या हस्तक्षेपी के रूप में यातना न भोगे;

  7. 1 पेतरॉस ४:१६लगभग ६० ई.

    परंतु यदि कोई मसीही विश्वासी होने के कारण दुःख भोगे, वह इसे लज्जा की बात न समझे परंतु मसीह की महिमा के कारण परमेश्वर की स्तुति करे.

  8. 1 पेतरॉस ४:१७लगभग ६० ई.

    परमेश्वर के न्याय के प्रारंभ होने का समय आ गया है, जो परमेश्वर की संतान से प्रारंभ होगा और यदि यह सबसे पहले हमसे प्रारंभ होता है तो उनका अंत क्या होगा, जो परमेश्वर के ईश्वरीय सुसमाचार को नहीं मानते हैं?

  9. 1 पेतरॉस ४:१८लगभग ६० ई.

    और, “यदि धर्मी का ही उद्धार कठिन होता है तो भक्तिहीन व पापी का क्या होगा?”

  10. 1 पेतरॉस ४:१९लगभग ६० ई.

    इसलिये वे भी, जो परमेश्वर की इच्छानुसार दुःख सहते हैं, अपनी आत्मा विश्वासयोग्य सृजनहार को सौंप दें, और भले काम करते रहें.

  11. 1 पेतरॉस ५:१लगभग ६० ई.

    इसलिये मैं, एक सह प्राचीन होकर, जो मसीह येशु के दुःखों का प्रत्यक्ष गवाह तथा उस महिमा का सहभागी हूं, जो भविष्य में प्रकट होने पर है, तुम्हारे पुरनियों से विनती कर रहा हूं

  12. 1 पेतरॉस ५:२लगभग ६० ई.

    कि वे परमेश्वर की इच्छा में परमेश्वर के झुंड की देखरेख करें—दबाव में नहीं परंतु अपनी इच्छा के अनुसार; अनुचित लाभ की दृष्टि से नहीं परंतु शुद्ध सेवाभाव में,

  13. 1 पेतरॉस ५:३लगभग ६० ई.

    अपने झुंड पर प्रभुता दिखाकर नहीं परंतु उनके लिए एक आदर्श बनकर;

  14. 1 पेतरॉस ५:४लगभग ६० ई.

    क्योंकि प्रधान चरवाहे के प्रकट होने पर तुम महिमा का अविनाशी मुकुट प्राप्‍त करोगे.

  15. 1 पेतरॉस ५:५लगभग ६० ई.

    इसी प्रकार युवाओ, तुम प्राचीनों के अधीन रहो तथा तुम सभी एक दूसरे के प्रति दीनता की भावना धारण करो क्योंकि, “परमेश्वर घमंडियों के विरुद्ध रहते और दीनों को अनुग्रह देते हैं.”

  16. 1 पेतरॉस ५:६लगभग ६० ई.

    इसलिये परमेश्वर के सामर्थ्यी हाथों के नीचे स्वयं को दीन बनाए रखो कि वह तुम्हें सही समय पर बढ़ाएं.

  17. 1 पेतरॉस ५:७लगभग ६० ई.

    अपनी सारी चिंता का बोझ परमेश्वर पर डाल दो क्योंकि वह तुम्हारा ध्यान रखते हैं.

  18. 1 पेतरॉस ५:८लगभग ६० ई.

    धीरज रखो, सावधान रहो. तुम्हारा विरोधी शैतान गरजते हुए सिंह जैसे इस खोज में फिरता रहता है कि किसको फाड़ खाए.

  19. 1 पेतरॉस ५:९लगभग ६० ई.

    विश्वास में स्थिर रहकर उसका सामना करो क्योंकि तुम जानते हो कि इस संसार में साथी विश्वासी इसी प्रकार दुःख-भोग रहे हैं.

  20. 1 पेतरॉस ५:१०लगभग ६० ई.

    जब तुम थोड़े समय के लिए दुःख-भोग चुके होगे तब सारे अनुग्रह के परमेश्वर, जिन्होंने तुम्हें मसीह में अपनी अनंत काल की महिमा में आमंत्रित किया है, स्वयं तुम्हें सिद्ध, स्थिर, मजबूत तथा प्रतिष्ठित करेंगे.

  21. 1 पेतरॉस ५:११लगभग ६० ई.

    उनका अधिकार सदा-सर्वदा हो, आमेन.

  22. 1 पेतरॉस ५:१२लगभग ६० ई.

    सिलवानॉस की सहायता से, जिसे मैं एक विश्वासयोग्य भाई मानता हूं, मैंने तुम्हें प्रोत्साहित तथा आश्वस्त करते हुए संक्षेप में लिखा है कि यही परमेश्वर का वास्तविक अनुग्रह है. तुम इसी में स्थिर रहो.

  23. 1 पेतरॉस ५:१३लगभग ६० ई.

    तुम्हें उसकी शुभकामनाएं, जो बाबेल में है, जिसे तुम्हारे ही साथ चुनकर अलग किया गया है और उसी प्रकार मेरे पुत्र मार्कास की भी.

  24. 1 पेतरॉस ५:१४लगभग ६० ई.

    प्रेम के चुंबन के द्वारा एक दूसरे को नमस्कार करो. तुम सभी को, जो मसीह में हैं, शांति!

  25. 2 पेतरॉस १:१लगभग ६६ ई.

    मसीह येशु के दास तथा प्रेरित शिमओन पेतरॉस की ओर से उन्हें, जिन्होंने हमारे परमेश्वर तथा उद्धारकर्ता मसीह येशु की धार्मिकता के द्वारा हमारे समान बहुमूल्य विश्वास प्राप्‍त किया है: