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Egypt

561 verses · 4 known names

इन्हें भी कहा जाता है: Egyptian, Egyptians, Egyptian's

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Egypt का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. “हे मनुष्य के पुत्र, मिस्र के राजा फ़रोह के बारे में एक विलापगीत लो और उसे सुनाओ: “ ‘जाति-जाति के लोगों के बीच तुम एक सिंह की तरह हो; समुद्र में तुम एक विशाल और विलक्षण प्राणी की तरह हो, तुम अपने सोतों में मजा लेते, पांव से पानी को मथते, और सोतों को कीचड़ से भर देते हो.

  2. मैं शक्तिशाली लोगों की तलवार से तुम्हारे उपद्रवी लोगों को मरवाऊंगा— ये शक्तिशाली लोग सब जातियों में सबसे अधिक निर्दयी हैं. वे मिस्र के अहंकार को चकनाचूर कर देंगे, और उसके सब उपद्रवी लोग नाश कर दिये जाएंगे.

  3. जब मैं मिस्र देश को उजाड़ दूंगा और देश से सब चीज़ों को छीन लूंगा, जब मैं उन सबको मारूंगा, जो वहां रहते हैं, तब वे जानेंगे कि मैं याहवेह हूं.’

  4. “यह वह विलापगीत है, जिसे वे उसके लिये गाएंगे. जनताओं की बेटियां इसे गाएंगी; मिस्र देश और उसके सब उपद्रवी लोगों के लिये वे इसे गाएंगी, परम प्रधान याहवेह की घोषणा है.”

  5. “हे मनुष्य के पुत्र, मिस्र देश के उपद्रवी लोगों के लिये शोक मनाओ और उसे तथा शक्तिशाली जाति के बेटियों को उन लोगों के साथ पृथ्वी को सौंप दो, जो नीचे कब्र में जाते हैं.

  6. “और अब, हे प्रभु, हमारे परमेश्वर, जिसने अपने बलवान हाथ से अपने लोगों को मिस्र देश से निकाल लाया और अपने लिये एक नाम स्थापित किया, जो आज तक बना हुआ है, परंतु हमने पाप किया है, हमने दुष्टता ही की है.

  7. वह उनके देवताओं को, उनके धातु की मूर्तियों को और उनके चांदी एवं सोने के बहुमूल्य पात्रों को ज़ब्त कर लेगा और अपने साथ मिस्र देश ले जाएगा. कुछ वर्षों तक, वह उत्तर के राजा को अकेला छोड़ देगा.

  8. वह कई देशों पर अपनी शक्ति का विस्तार करेगा; मिस्र देश भी न बचेगा.

  9. वह मिस्र देश के सोने और चांदी के खजानों और सब बहुमूल्य चीज़ों को अपने अधीन कर लेगा, और लिबिया तथा कूश देशवासी उसकी अधीनता स्वीकार कर लेंगे.

  10. वहां मैं उसे उसकी अंगूर की बारियां लौटा दूंगा, और आकोर घाटी को आशा का द्वार बना दूंगा. वहां वह ऐसे जवाब देगी जैसे वह अपने जवानी के दिनों में दिया करती थी, अर्थात् जैसे वह मिस्र देश से निकलकर आने के समय दिया करती थी.”

  11. “एफ्राईम एक पेंडुकी की तरह है, जो आसानी से धोखा खाता है और निर्बुद्धि है— उन्होंने सहायता के लिए मिस्र को पुकारा, अब अश्शूर की ओर जाते हैं.

  12. वे सर्वोच्च परमेश्वर की ओर नहीं फिर रहे हैं; वे त्रुटिपूर्ण धनुष के समान हैं. उनके अगुएं घमंड से भरी बातों के कारण तलवार से मारे जाएंगे. इसी कारण से उन्हें मिस्र देश में ठट्ठों में उड़ाया जाएगा.

  13. यद्यपि वे मुझे भेंट के रूप में बलिदान चढ़ाते हैं, और यद्यपि वे मांस खाते हैं, पर याहवेह उनसे खुश नहीं हैं. अब वह उनके दुष्ट कामों को याद करेंगे और उनके पापों के लिये दंड देंगे: वे मिस्र देश को लौटेंगे.

  14. वे याहवेह के देश में नहीं रहने पाएंगे; एफ्राईम मिस्र देश को लौट जाएगा और अश्शूर में वे अशुद्ध भोजन खाएंगे.

  15. यदि वे विनाश से बच निकलते हैं, तो मिस्र देश उन्हें इकट्ठा करेगा, और मोफ उन्हें दफन कर देगा. कंटीली झाड़ियां उनके चांदी के वस्तुओं को ले लेंगी, और उनके तंबुओं पर कांटे उग आएंगे.

  16. “जब इस्राएल बालक था, मैंने उससे प्रेम किया, और मिस्र देश से मैंने अपने पुत्र को बुलाया.

  17. “क्या वे मिस्र देश नहीं लौटेंगे और अश्शूर का राजा उन पर शासन नहीं करेगा क्योंकि वे प्रायश्चित करना नहीं चाहते?

  18. वे मिस्र देश से, गौरेया पक्षी की तरह कांपती हुई, और अश्शूर देश से पंड़की की तरह पंख फड़फड़ाते हुए आएंगी. मैं उन्हें उनके घरों में बसाऊंगा,” याहवेह घोषणा करते हैं.

  19. एफ्राईम हवा को अपना भोजन बनाता है; वह सारा दिन पूर्वी वायु का पीछा करता है और अपने झूठ और हिंसा को बढ़ाता रहता है. वह अश्शूर देश से संधि करता है और मिस्र देश को जैतून का तेल भेजता है.

  20. “जब से तुम मिस्र देश से निकलकर आये, मैं याहवेह तुम्हारा परमेश्वर हूं; मैं फिर तुम्हें तंबुओं में निवास कराऊंगा, जैसे कि तुम्हारे ठहराए त्योहार के दिनों में हुआ करता था.

  21. याहवेह ने मिस्र से इस्राएल को निकालने के लिये एक भविष्यवक्ता का उपयोग किया, एक भविष्यवक्ता के द्वारा उसने उसका ध्यान रखा.

  22. “परंतु मैं तब से याहवेह तुम्हारा परमेश्वर हूं, जब से तुम मिस्र देश से निकलकर आये. तुम मेरे सिवाय किसी और को परमेश्वर करके न मानना, मेरे अलावा कोई और उद्धारकर्ता नहीं है.

  23. पर मिस्र देश उजाड़ हो जाएगा, और एदोम एक बेकार निर्जन देश, क्योंकि इन्होंने यहूदिया के लोगों पर अत्याचार किया था, और इन्होंने उनके देश में निर्दोष लोगों का खून बहाया था.

  24. मैं ही था, जिसने तुम्हें मिस्र देश से बाहर निकाला और चालीस वर्ष मरुभूमि में तुम्हारी अगुवाई करता रहा, ताकि तुम अमोरियों के देश पर अधिकार कर सको.

  25. हे इस्राएलियो, सुनो यह वह संदेश है, जिसे याहवेह ने तुम्हारे विरुद्ध कहा है—पूरे वंश के विरुद्ध जिसे मैंने मिस्र देश से बाहर निकाल लाया है: