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The Tribes of Israel के बारे में बाइबल के वचन

241 वचन · 21 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. किंतु यदि वे इस्राएलियों में से किसी दूसरे गोत्र के पुत्रों में विवाह करती हैं, उनकी मीरास तो उस गोत्र में मिल जाएगी, जो उनके पतियों के है.

  2. इस प्रकार योवेल वर्ष में उन युवतियों के गोत्र की मीरास हमारे पूर्वजों की मीरास में से घटती चली जाएगी.”

  3. इसलिये मोशेह ने याहवेह की आज्ञा के अनुसार इस्राएलियों को आदेश दिया, “योसेफ़ गोत्र के वंशज सही बात कह रहे हैं.

  4. याहवेह ने ज़लोफेहाद की पुत्रियों के विषय में यह आदेश दिया है, ‘उन्हें अपनी इच्छा के वर से विवाह कर लेने दिया जाए; सिर्फ ध्यान रहे कि वे अपने पिता के गोत्र के परिवार में ही विवाह करें.’

  5. परिणामस्वरूप इस्राएलियों में मीरास एक गोत्र से दूसरे गोत्र में न मिल सकेगी. ज़रूरी है कि हर एक इस्राएली अपने-अपने पिता के गोत्र की मीरास को अपने अधिकार में बनाए रखे.

  6. And every daughter, that possesseth an inheritance in any tribe of the children of Israel, shall be wife unto one of the family of the tribe of her father, that the children of Israel may enjoy every man the inheritance of his fathers.

  7. इस प्रक्रिया से कोई भी मीरास एक गोत्र से अन्य गोत्र में न मिल पाएगी; क्योंकि इस्राएलियों के लिए ज़रूरी है कि हर एक अपनी-अपनी मीरास को अपने ही अधिकार में बनाए रखे.”

  8. फिर हमने उसी समय इस देश को अपने अधिकार में कर लिया. यह आरनोन की घाटी अरोअर से गिलआद के आधे क्षेत्र और इसमें स्थित नगरों का क्षेत्र है, जो मैंने रियूबेन और गाद के घराने को दे दिया.

  9. बचा हुआ गिलआद, सारा बाशान अर्थात् जो ओग का साम्राज्य था, मैंने मनश्शेह के आधे गोत्र को दे दिया. (यह था अरगोब का पूरा क्षेत्र. सारे बाशान के बारे में कहा जाता है, कि यह रेफाइम का देश है.

  10. मनश्शेह के पुत्र याईर ने गेशूरियों और माकाहथियों की सीमाओं तक पूरा क्षेत्र अपने अधिकार में कर लिया, अर्थात् अपने नाम के अनुरूप बाशान और हव्वोथ-याईर, जो उसका आधुनिक नाम है.)

  11. माखीर को मैंने गिलआद दे दिया.

  12. रियूबेन और गाद के घराने को मैंने गिलआद का वह क्षेत्र दे दिया, जो आरनोन की घाटी तक फैला है (इसकी सीमा घाटी के बीच तक थी) और यब्बोक नदी तक, जो अम्मोनियों की सीमा भी थी.

  13. इसके अलावा अराबाह भी, जिसकी सीमा यरदन हो गई, किन्‍नेरेथ से लेकर अराबाह सागर तक, लवण-सागर, जिसके पूर्व में पिसगाह की ढलान की तलहटी है.

  14. इसके बाद मैंने उस समय तुम्हें यह आदेश दिया, “याहवेह, तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें यह देश अपने अधिकार में करने के उद्देश्य से दे दिया. तुम्हारे सारे वीर योद्धा शस्त्रों से सुसज्जित हो इस्राएल वंशज तुम्हारे भाइयों के आगे-आगे नदी पार करेंगे.

  15. मगर तुम्हारी पत्नियां, तुम्हारे बालक और तुम्हारे पशु मुझे मालूम है कि तुम्हारे पास बहुत पशु धन है, तुम्हारे साथ उसी समय तक उन्हीं नगरों में रहेंगे, जो मैंने तुम्हें दे दिए हैं,

  16. जब तक याहवेह तुम्हारे बंधुओं को तुम्हारे समान शांति और विश्राम न दे दें, और वे भी उस देश को अपने अधिकार में न कर लें, जो याहवेह, तुम्हारे परमेश्वर तुम्हें यरदन पार देने पर हैं. यह सब होने पर तुममें से हर एक मेरे द्वारा तुम्हें सौंपी गई संपत्ति को लौटाओगे.”

  17. जब तुम यरदन नदी को पार करोगे, गेरिज़िम पर्वत पर खड़े होकर लोगों के लिए आशीर्वाद देने के लिए तय व्यक्ति इन गोत्रों से होंगे: शिमओन, लेवी, यहूदाह, इस्साखार, योसेफ़ और बिन्यामिन.

  18. शाप उच्चारण के लिए एबल पर्वत पर खड़े व्यक्ति इन गोत्रों से होंगे: रियूबेन, गाद, आशेर, ज़ेबुलून, दान और नफताली.

  19. “रियूबेन जीवित रहे, उसकी मृत्यु न हो, और न ही उसके गोत्र की गिनती कम हो.”

  20. यहूदाह के लिए मोशेह के वचन थे: “याहवेह, यहूदाह की विनती सुनिए, उसे अपने लोगों तक ले आइए. उसके हाथों को मजबूत कर दीजिए, आप ही उसके शत्रुओं के विरुद्ध उसकी सहायता बने रहें!”

  21. लेवी के विषय में मोशेह के वचन थे, “याहवेह, आपका थुम्मीम और आपका उरीम आपके विश्वासयोग्य लोगों के अधिकार में बना रहे, जिसे आप मस्साह में परख चुके हैं, जिसके साथ आपने मेरिबाह जल के सोते पर वाद-विवाद किया था;

  22. जिसने अपने पिता और अपनी माता के विषय में कहा था, ‘वे मेरे लिए कोई नहीं हैं.’ उसने अपने भाइयों को भी नहीं अपनाया, और न ही अपनी ही संतान को, क्योंकि वे आपके आदेश के पालक बने रहे, उन्होंने आपकी वाचा का सम्मान बनाए रखा.

  23. वे ही हैं, जो याकोब को आपके नियमों की शिक्षा देंगे, और इस्राएल को आपके विधान की. वे आपके सामने धूप जलाएंगे, और आपकी वेदी पर पूरी होमबलि भी.

  24. याहवेह, उसकी संपदा को समृद्धि प्रदान कीजिए, उसके हाथों के परिश्रम को स्वीकार कीजिए; उसके शत्रुओं की कमर को चूर-चूर कर दीजिए, कि वे कभी उठ न सकें.”

  25. बिन्यामिन के विषय में मोशेह ने कहा: “याहवेह का प्रिय, यह गोत्र उनके द्वारा दी गई सुरक्षा में रहता रहे, याहवेह उसे हमेशा सुरक्षा प्रदान करते रहते हैं, मानो वे याहवेह के दोनों कांधों के बीच सुरक्षित हैं.”