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Music के बारे में बाइबल के वचन

324 वचन · 57 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. सातवें में येशारेलाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  2. आठवें में येशाइयाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  3. नवें में मत्तनियाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  4. दसवें में शिमेई, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  5. ग्यारहवें में अज़रेल, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  6. बारहवें में हशाबियाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  7. तेरहवें में शेबुएल, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  8. चौदहवें में मत्तीथियाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  9. पन्द्रहवें में येरेमोथ, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  10. सोलहवें में हनानियाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  11. सत्रहवें में योषबेकाषाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  12. अठारहवें में हनानी, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  13. उन्‍नीसवें में मल्लोथी, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  14. बीसवें में एलियाथाह, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  15. इक्कीसवें में होथीर, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  16. बाईसवें में गिद्दालती, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  17. तेईसवें में माहाज़ीयोथ, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति,

  18. चोबीसवें में रोमामती-एत्सर, उसके पुत्र और संबंधी, कुल 12 व्यक्ति.

  19. पवित्र स्थल से पुरोहित बाहर आ गए. हर एक दल के पुरोहित ने अपने आपको शुद्ध किया हुआ था.

  20. संपूर्ण लेवी गायकों ने अर्थात् आसफ, हेमान, यदूथून और उनके पुत्र और संबंधी महीन मलमल के कपड़े पहने हुए झांझ और तन्तु वाद्यों को लिए हुए वेदी के पूर्व की ओर खड़े हुए थे. उनके साथ एक सौ बीस पुरोहित तुरही फूंक रहे थे.

  21. तुरहीवादकों और गायकों से यह अपेक्षित था कि जब वे याहवेह की स्तुति और धन्यवाद के गीत गाएं, तब यह गायन ऊंची आवाज में हो रहा हो और याहवेह की स्तुति में तुरहियां, झांझ और अन्य वाद्य यंत्र भी शामिल हो गए हों: “वे भले हैं; उनकी करुणा सदा की है.” तब याहवेह का वह भवन एक बादल से भर गया,

  22. पुरोहित अपनी-अपनी चौकियों पर खड़े थे, लेवी भी याहवेह की स्तुति के लिए ठहराए गए वाद्य यंत्र लिए हुए खड़े थे, जो राजा दावीद ने याहवेह की स्तुति के उद्देश्य से बनाए थे, कि वह इन वाद्य-यंत्रों की धुन पर, “उनकी करुणा सदा की है.” गाएं, जब दूसरी ओर इस्राएल खड़ा हुआ होता था.

  23. कोहाथ और कोराह के वंशज लेवियों ने खड़े होकर बड़ी ही ऊंची आवाज में याहवेह, इस्राएल के परमेश्वर की स्तुति की.

  24. जब राजा लोगों से सलाह-मशवरा कर चुका, उसने याहवेह के स्तुति के लिए गायक चुने. इनका काम था पवित्र वस्त्र पहनकर सेना के आगे-आगे चलते हुए इन शब्दों में याहवेह की स्तुति करना, “याहवेह का धन्यवाद करो-वे भले हैं; उनकी करुणा सदा की है.”

  25. जब उन्होंने याहवेह की स्तुति में गाना शुरू किया, याहवेह ने यहूदिया के विरुद्ध उठे अम्मोनिया, मोआबियों और सेईर पर्वत के वासियों पर वार करने के लिए सैनिक घात लगाकर बैठा दिए. इस प्रकार शत्रुओं के पैर उखड़ गए.