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Heman

12 वचन · 15 परिवार के सदस्य

Heman का उल्लेख करने वाले वचन

  1. सेवा के लिए चुने गए उन व्यक्तियों और उनके पुत्रों के नाम इस प्रकार है: कोहाथ के पुत्रों में से: गायक, हेमान, जो योएल का पुत्र, शमुएल का पुत्र था,

  2. इसलिये लेवियों ने इसके लिए इन लोगों चुना: योएल के पुत्र हेमान और उसके संबंधियों को, बेरेखियाह के पुत्र आसफ और मेरारी के पुत्रों में से उनके संबंधियों को, कुशायाह के पुत्र एथन को;

  3. संगीतकार हेमान, आसफ और एथन की जवाबदारी थी कांसे की झांझ को बजाना.

  4. इनके साथ हेमान और यदूथून भी थे और शेष वे थे जो इसके लिए अलग किए गए थे, जिन्हें उनके नाम से चुना गया था कि वे याहवेह के प्रति उनके अपार प्रेम के लिए धन्यवाद करते रहें, “जो सदा के लिए है.”

  5. हेमान और यदूथून का एक और काम भी था; तुरहियों, झांझों और अन्य वाद्य-यंत्रों पर उस समय बजाना, जब परमेश्वर के लिए गीत गाए जा रहे होते थे. यदूथून के पुत्र द्वारपाल थे.

  6. दावीद और सेनापतियों ने मिलकर आसफ, हेमान और यदूथून के पुत्रों को अलग कर दिया कि जब वे नेबेल और किन्‍नोर नामक वाद्य यंत्र और झांझ बजाएं, वे भविष्यवाणी किया करें. जिन्हें इस सेवा की जवाबदारी सौंपी गई थी, उनकी सूची इस प्रकार है.

  7. हेमान वंशज: हेमान के पुत्र थे बुक्कियाह, मत्तनियाह, उज्ज़िएल, शुबेल और येरीमोथ, हननियाह, हनानी, एलियाथाह, गिद्दालती और रोमामती-एत्सर, योषबेकाषाह, मल्लोथी, होथीर, माहाज़ीयोथ.

  8. (ये सभी राजा के दर्शी हेमान के पुत्र थे. इनकी जवाबदारी थी परमेश्वर के आदेश के अनुसार उनकी स्तुति करते रहना; क्योंकि परमेश्वर ने हेमान को चौदह पुत्र और तीन पुत्रियां दी थी.)

  9. ये सभी याहवेह के भवन में उनके पिता की ही अगुवाई में, परमेश्वर के भवन की आराधना में झांझों, नेबेलों और किन्‍नोरों के संगीत पर गाने के लिए चुने गये थे. आसफ, यदूथून और हेमान राजा के सामने उनकी अगुवाई में काम करते थे.

  10. संपूर्ण लेवी गायकों ने अर्थात् आसफ, हेमान, यदूथून और उनके पुत्र और संबंधी महीन मलमल के कपड़े पहने हुए झांझ और तन्तु वाद्यों को लिए हुए वेदी के पूर्व की ओर खड़े हुए थे. उनके साथ एक सौ बीस पुरोहित तुरही फूंक रहे थे.

  11. हेमान के वंशजों में से: येहिएल और शिमेई; यदूथून के वंशजों में से: शेमायाह और उज्ज़िएल.

  12. दावीद, आसफ, हेमान और राजा के दर्शी यदूथून द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार, आसफ के वंशज गायक भी अपने-अपने ठहराए गए स्थानों पर खड़े हुए थे. द्वारपालों को द्वार छोड़कर जाना ज़रूरी नहीं था, क्योंकि आवश्यक तैयारी उनके भाई-बन्धु लेवियों ने उनके लिए पहले ही कर ली थी.