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circa 1010–970 BC

The Reign of David

David unites the tribes, conquers Jerusalem, and establishes Israel's golden age—even through deep personal failure.

1,230 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 2 शमुएल २१:१८लगभग १०१८ ई.पू.

    इसके बाद गोब नामक स्थान पर फिलिस्तीनियों से दोबारा युद्ध छिड़ गया. हुशाथी सिब्बेकाई ने साफ़ को मार गिराया. यह भी दानवों का वंशज था.

  2. 2 शमुएल २१:१९लगभग १०१८ ई.पू.

    एक बार फिर गोब नामक स्थान पर ही फिलिस्तीनियों से युद्ध छिड़ गया. बेथलेहेमवासी जारे-ओरेगीम के पुत्र एलहानन ने गाथवासी गोलियथ को मार गिराया. उसका भाला बुनकर की धरणी के समान विशाल था.

  3. 2 शमुएल २१:२०लगभग १०१८ ई.पू.

    उसके बाद गाथ में एक बार फिर युद्ध छिड़ गया. वहां एक बहुत ही विशाल डीलडौल का आदमी था, जिसके हाथों और पांवों में छः-छः उंगलियां थीं; पूरी चौबीस. वह भी दानवों के वंश का था.

  4. 2 शमुएल २१:२१लगभग १०१८ ई.पू.

    जब उसने इस्राएल को चुनौती देने शुरू किए, दावीद के भाई सिमअह के पुत्र योनातन ने उसको मार दिया.

  5. 2 शमुएल २१:२२लगभग १०१८ ई.पू.

    ये चारों गाथ नगर में दानवों का ही वंशज था. वे दावीद और उनके सेवकों द्वारा मार गिराए गए.

  6. 2 शमुएल २२:१लगभग १०१८ ई.पू.

    जब याहवेह ने दावीद को उनके शत्रुओं तथा शाऊल के आक्रमण से बचा लिया था, तब दावीद ने यह गीत याहवेह के सामने गाया:

  7. 2 शमुएल २२:२लगभग १०१८ ई.पू.

    दावीद ने कहा: “याहवेह मेरी चट्टान, मेरा गढ़ और मेरे छुड़ानेवाले हैं.

  8. 2 शमुएल २२:३लगभग १०१८ ई.पू.

    मेरे परमेश्वर, जिनमें मैं आसरा लेता हूं, मेरे लिए चट्टान हैं. वह मेरी ढाल और मेरे उद्धार का सींग हैं. वह मेरा गढ़, मेरी शरण और मेरा छुड़ाने वाला हैं, जो कष्टों से मेरी रक्षा करते हैं.

  9. 2 शमुएल २२:४लगभग १०१८ ई.पू.

    “मैं दोहाई याहवेह की देता हूं, सिर्फ वही स्तुति के योग्य हैं, और मैं शत्रुओं से छुटकारा पा लेता हूं.

  10. 2 शमुएल २२:५लगभग १०१८ ई.पू.

    मृत्यु की लहरों में घिर चुका था; मुझ पर विध्वंस की तेज धारा का वार हो रहा था.

  11. 2 शमुएल २२:६लगभग १०१८ ई.पू.

    अधोलोक के तंतुओं ने मुझे उलझा लिया था; मैं मृत्यु के जाल के आमने-सामने आ गया था.

  12. 2 शमुएल २२:७लगभग १०१८ ई.पू.

    “अपनी वेदना में मैंने याहवेह की दोहाई दी; मैंने अपने ही परमेश्वर को पुकारा. अपने मंदिर में उन्होंने मेरी आवाज सुन ली, उनके कानों में मेरा रोना जा पड़ा.

  13. 2 शमुएल २२:८लगभग १०१८ ई.पू.

    पृथ्वी झूलकर कांपने लगी, आकाश की नींव थरथरा उठी; और कांपने लगी. क्योंकि वह क्रुद्ध थे.

  14. 2 शमुएल २२:९लगभग १०१८ ई.पू.

    उनके नथुनों से धुआं उठ रहा था, उनके मुख की आग चट करती जा रही थी, उसने कोयलों को दहका रखा था.

  15. 2 शमुएल २२:१०लगभग १०१८ ई.पू.

    उन्होंने आकाशमंडल को झुकाया, और उतर आए; उनके पैरों के नीचे घना अंधकार था.

  16. 2 शमुएल २२:११लगभग १०१८ ई.पू.

    वह करूब पर चढ़कर उड़ गए; वह हवा के पंखों पर चढ़कर उड़ गये!

  17. 2 शमुएल २२:१२लगभग १०१८ ई.पू.

    उन्होंने अंधकार ओढ़ लिया, वह उनका छाता बन गया, घने-काले वर्षा के मेघ में घिरे हुए.

  18. 2 शमुएल २२:१३लगभग १०१८ ई.पू.

    उनके सामने के तेज से कोयलों में आग जल गई.

  19. 2 शमुएल २२:१४लगभग १०१८ ई.पू.

    स्वर्ग से याहवेह ने गर्जन की, और परम प्रधान ने अपने शब्द सुनाए.

  20. 2 शमुएल २२:१५लगभग १०१८ ई.पू.

    उन्होंने बाण छोड़े, और उन्हें बिखरा दिया. बिजलियों ने उनके पैर उखाड़ दिए.

  21. 2 शमुएल २२:१६लगभग १०१८ ई.पू.

    याहवेह की प्रताड़ना से, नथुनों से उनके सांस के झोंके से, सागर के जलमार्ग दिखाई देने लगे; संसार की नीवें खुल गई.

  22. 2 शमुएल २२:१७लगभग १०१८ ई.पू.

    “उन्होंने स्वर्ग से हाथ बढ़ा मुझे थाम लिया; प्रबल जल प्रवाह से उन्होंने मुझे बाहर निकाल लिया.

  23. 2 शमुएल २२:१८लगभग १०१८ ई.पू.

    उन्होंने मुझे मेरे प्रबल शत्रु से मुक्त किया, उनसे, जिन्हें मुझसे घृणा थी. वे मुझसे कहीं अधिक शक्तिमान थे.

  24. 2 शमुएल २२:१९लगभग १०१८ ई.पू.

    संकट के दिन उन्होंने मुझ पर आक्रमण कर दिया था, किंतु मेरी सहायता याहवेह में मगन थी.

  25. 2 शमुएल २२:२०लगभग १०१८ ई.पू.

    वह मुझे खुले स्थान पर ले आए; मुझसे अपनी प्रसन्‍नता के कारण उन्होंने मुझे छुड़ाया है.