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circa 1010–970 BC

The Reign of David

David unites the tribes, conquers Jerusalem, and establishes Israel's golden age—even through deep personal failure.

1,230 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 2 शमुएल २२:२१लगभग १०१८ ई.पू.

    “मेरी भलाई के अनुसार ही याहवेह ने मुझे प्रतिफल दिया है; मेरे हाथों की स्वच्छता के अनुसार उन्होंने मुझे ईनाम दिया है.

  2. 2 शमुएल २२:२२लगभग १०१८ ई.पू.

    मैं याहवेह की नीतियों का पालन करता रहा हूं; मैंने परमेश्वर के विरुद्ध कोई दुराचार नहीं किया है.

  3. 2 शमुएल २२:२३लगभग १०१८ ई.पू.

    उनके सारे नियम मेरे सामने बने रहे; उनके नियमों से मैं कभी भी विचलित नहीं हुआ.

  4. 2 शमुएल २२:२४लगभग १०१८ ई.पू.

    मैं उनके सामने निर्दोष बना रहा. दोष भाव मुझसे दूर ही दूर रहा.

  5. 2 शमुएल २२:२५लगभग १०१८ ई.पू.

    इसलिये याहवेह ने मुझे मेरी भलाई के अनुसार ही प्रतिफल दिया है, उनकी नज़रों में मेरी शुद्धता के अनुसार.

  6. 2 शमुएल २२:२६लगभग १०१८ ई.पू.

    “सच्चे लोगों के प्रति आप स्वयं विश्वासयोग्य साबित होते हैं, निर्दोष व्यक्ति पर आप स्वयं को निर्दोष ही प्रकट करते हैं,

  7. 2 शमुएल २२:२७लगभग १०१८ ई.पू.

    वह, जो निर्मल है, उस पर अपनी निर्मलता प्रकट करते हैं, कुटिल व्यक्ति पर आप अपनी चतुरता प्रगट करते हैं.

  8. 2 शमुएल २२:२८लगभग १०१८ ई.पू.

    विनम्र व्यक्ति को आप छुटकारा प्रदान करते हैं, मगर आपकी दृष्टि घमंडियों पर लगी रहती है, कि कब उसे नीचा किया जाए.

  9. 2 शमुएल २२:२९लगभग १०१८ ई.पू.

    याहवेह, आप मेरे दीपक हैं; याहवेह मेरे अंधकार को ज्योतिर्मय कर देते हैं.

  10. 2 शमुएल २२:३०लगभग १०१८ ई.पू.

    जब आप मेरी ओर हैं, तो मैं सेना से टक्कर ले सकता हूं; मेरे परमेश्वर के कारण मैं दीवार तक फांद सकता हूं.

  11. 2 शमुएल २२:३१लगभग १०१८ ई.पू.

    “यह वह परमेश्वर हैं, जिनकी नीतियां खरी हैं: ताया हुआ है याहवेह का वचन; अपने सभी शरणागतों के लिए वह ढाल बन जाते हैं.

  12. 2 शमुएल २२:३२लगभग १०१८ ई.पू.

    क्योंकि याहवेह के अलावा कोई परमेश्वर है? और हमारे परमेश्वर के अलावा कोई चट्टान है?

  13. 2 शमुएल २२:३३लगभग १०१८ ई.पू.

    वही परमेश्वर मेरे मजबूत आसरा हैं; वह निर्दोष व्यक्ति को अपने मार्ग पर चलाते हैं.

  14. 2 शमुएल २२:३४लगभग १०१८ ई.पू.

    उन्हीं ने मेरे पांवों को हिरण के पांवों के समान बना दिया है; ऊंचे स्थानों पर वह मुझे सुरक्षा देते हैं.

  15. 2 शमुएल २२:३५लगभग १०१८ ई.पू.

    वह मेरे हाथों को युद्ध की क्षमता प्रदान करते हैं; कि अब मेरी बांहें कांसे के धनुष तक को इस्तेमाल कर लेती हैं.

  16. 2 शमुएल २२:३६लगभग १०१८ ई.पू.

    आपने मुझे छुटकारे की ढाल दी है; आपकी सहायता ने मुझे विशिष्ट पद दिया है.

  17. 2 शमुएल २२:३७लगभग १०१८ ई.पू.

    मेरे पांवों के लिए आपने चौड़ा रास्ता दिया है, इसमें मेरे पगों के लिए कोई फिसलन नहीं है.

  18. 2 शमुएल २२:३८लगभग १०१८ ई.पू.

    “मैंने अपने शत्रुओं का पीछा कर उन्हें नाश कर दिया है; जब तक वे पूरी तरह नाश न हो गए, मैं लौटकर नहीं आया.

  19. 2 शमुएल २२:३९लगभग १०१८ ई.पू.

    मैंने उन्हें ऐसा पूरी तरह कुचल दिया कि वे पुनः सिर न उठा सकें; वे तो मेरे पैरों में आ गिरे.

  20. 2 शमुएल २२:४०लगभग १०१८ ई.पू.

    शक्ति से आपने मुझे युद्ध के लिए सशस्त्र बना दिया; आपने उन्हें, जो मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए थे, मेरे सामने झुका दिया.

  21. 2 शमुएल २२:४१लगभग १०१८ ई.पू.

    आपने मेरे शत्रुओं को पीठ दिखाकर भागने पर विवश कर दिया, जो मेरे विरोधी थे. मैंने उन्हें नष्ट कर दिया.

  22. 2 शमुएल २२:४२लगभग १०१८ ई.पू.

    वे आशा ज़रूर करते रहे, मगर उनकी रक्षा के लिए कोई भी न आया. यहां तक कि उन्होंने याहवेह की भी दोहाई दी, मगर उन्होंने भी उन्हें उत्तर न दिया.

  23. 2 शमुएल २२:४३लगभग १०१८ ई.पू.

    मैंने उन्हें पीसकर भूमि की धूल के समान बना दिया; मैंने उन्हें कुचल दिया, मैंने उन्हें गली के कीचड़ के समान रौंद डाला.

  24. 2 शमुएल २२:४४लगभग १०१८ ई.पू.

    “आपने मुझे सजातियों के द्वारा उठाए कलह से छुटकारा दिया है; आपने मुझे सारे राष्ट्रों पर सबसे ऊपर बनाए रखा; अब वे लोग मेरी सेवा कर रहे हैं, जिनसे मैं पूरी तरह अपरिचित हूं.

  25. 2 शमुएल २२:४५लगभग १०१८ ई.पू.

    विदेशी मेरे सामने झुकते आए; जैसे ही उन्हें मेरे विषय में मालूम होते ही वे मेरे प्रति आज्ञाकारी हो गए.