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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मार्कास १५:१९लगभग ३३ ई.

    वे मसीह येशु के सिर पर सरकंडों से मारते जा रहे थे. इसके अतिरिक्त वे उन पर थूक रहे थे और उपहास में उनके सामने घुटने टेककर झुक रहे थे.

  2. मार्कास १५:२०लगभग ३३ ई.

    जब वे उपहास कर चुके, उन्होंने वह बैंगनी वस्त्र उतार लिया और उनके वस्त्र उन्हें दोबारा पहना दिए और उन्हें क्रूस पर चढ़ाने के लिए ले जाने लगे.

  3. मार्कास १५:२१लगभग ३३ ई.

    मार्ग में उन्हें कुरेनायॉस नगरवासी शिमओन नामक व्यक्ति मिला, जो अलेक्सान्दरॉस तथा रूफ़ॉस का पिता था, जिसे उन्होंने मसीह येशु का क्रूस उठाकर ले चलने के लिए विवश किया.

  4. मार्कास १५:२२लगभग ३३ ई.

    वे मसीह येशु को लेकर गोलगोथा नामक स्थल पर आए, जिसका अर्थ है “खोपड़ी का स्थान.”

  5. मार्कास १५:२३लगभग ३३ ई.

    उन्होंने मसीह येशु को गन्धरस मिला हुआ दाखरस देना चाहा किंतु मसीह येशु ने उसे स्वीकार न किया.

  6. मार्कास १५:२४लगभग ३३ ई.

    तब उन्होंने मसीह येशु को क्रूस पर चढ़ा दिया. उन्होंने मसीह येशु के वस्त्र बांटने के लिए पासा फेंका कि वस्त्र किसे मिलें.

  7. मार्कास १५:२५लगभग ३३ ई.

    यह दिन का तीसरा घंटा था जब उन्होंने मसीह येशु को क्रूस पर चढ़ाया था.

  8. मार्कास १५:२६लगभग ३३ ई.

    उनके दोषपत्र पर लिखा था: यहूदियों का राजा.

  9. मार्कास १५:२७लगभग ३३ ई.

    मसीह येशु के साथ दो राजद्रोहियों को भी क्रूस पर चढ़ाया गया था—एक उनकी दायीं ओर, दूसरा बायीं ओर. [

  10. मार्कास १५:२८लगभग ३३ ई.

    यह होने पर पवित्र शास्त्र का यह लेख पूरा हो गया: उसकी गिनती अपराधियों के साथ की गई.]

  11. मार्कास १५:२९लगभग ३३ ई.

    आते जाते यात्री उपहास-मुद्रा में सिर हिला-हिला कर मज़ाक उड़ा रहे थे, “अरे ओ मंदिर को नाश कर, तीन दिन में उसको दुबारा बनानेवाले!

  12. मार्कास १५:३०लगभग ३३ ई.

    बचा ले अपने आपको—उतर आ क्रूस से!”

  13. मार्कास १५:३१लगभग ३३ ई.

    इसी प्रकार प्रधान पुरोहित भी शास्त्रियों के साथ मिलकर आपस में उनका उपहास कर रहे थे, “अन्यों को तो बचाता रहा, स्वयं को नहीं बचा सकता!

  14. मार्कास १५:३२लगभग ३३ ई.

    यह मसीह—यह इस्राएल का राजा, अभी क्रूस से नीचे उतरे, तो हम उसमें विश्वास कर लेंगे!” मसीह येशु के साथ क्रूस पर चढ़ाए गए राजद्रोही भी उनकी ऐसी ही निंदा कर रहे थे.

  15. मार्कास १५:३३लगभग ३३ ई.

    मध्याह्न सारे क्षेत्र पर अंधकार छा गया, जो तीन बजे तक छाया रहा.

  16. मार्कास १५:३४लगभग ३३ ई.

    नवें घंटे मसीह येशु ने ऊंचे शब्द में पुकारते हुए कहा, “एलोई, एलोई, लमा सबख़थानी?” जिसका अर्थ है, “मेरे परमेश्वर, मेरे परमेश्वर, आपने मुझे क्यों छोड़ दिया है?”

  17. मार्कास १५:३५लगभग ३३ ई.

    पास खड़े व्यक्तियों में से कुछ ने यह सुनकर कहा, “अरे! सुनो-सुनो! एलियाह को पुकार रहा है!”

  18. मार्कास १५:३६लगभग ३३ ई.

    यह सुन एक व्यक्ति ने दौड़कर एक स्पंज को दाख के सिरके में डुबाकर उसे सरकंडे पर रख यह कहते हुए मसीह येशु को पीने के लिए दिया, “अब उसे छोड़ दो; चलो देखें, क्या एलियाह इसे क्रूस से नीचे उतारने आते हैं या नहीं.”

  19. मार्कास १५:३७लगभग ३३ ई.

    ऊंचे शब्द में पुकारने के साथ मसीह येशु ने अपने प्राण त्याग दिए.

  20. मार्कास १५:३८लगभग ३३ ई.

    मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फटकर दो भागों में बट गया.

  21. मार्कास १५:३९लगभग ३३ ई.

    क्रूस के सामने खड़े रोमी शताधिपति ने मसीह येशु को इस रीति से प्राण त्यागते देखकर कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि यह व्यक्ति परमेश्वर का पुत्र था.”

  22. मार्कास १५:४०लगभग ३३ ई.

    कुछ महिलाएं दूर खड़ी हुई यह सब देख रही थी. इनमें मगदालावासी मरियम, कनिष्ठ याकोब और योसेस की माता मरियम तथा शालोमे थी.

  23. मार्कास १५:४१लगभग ३३ ई.

    मसीह येशु के गलील प्रवास के समय ये ही उनके पीछे चलते हुए उनकी सेवा करती रही थी. अन्य अनेक स्त्रियां भी थी, जो मसीह येशु के साथ येरूशलेम आई हुई थी.

  24. मार्कास १५:४२लगभग ३३ ई.

    यह शब्बाथ के पहले का तैयारी का दिन था. शाम हो गई थी.

  25. मार्कास १५:४३लगभग ३३ ई.

    अरिमथिया नगरवासी योसेफ़ ने, जो महासभा के प्रतिष्ठित सदस्य थे और स्वयं परमेश्वर के राज्य की प्रतीक्षा कर रहे थे, साहसपूर्वक पिलातॉस से मसीह येशु का शव ले जाने की अनुमति मांगी.