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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मार्कास १४:४१लगभग ३३ ई.

    जब मसीह येशु तीसरी बार उनके पास आए तो उन्होंने उनसे कहा, “अभी भी सो रहे हो? सोते रहो और विश्राम करो! बहुत हो गया! वह क्षण आ गया है. देख लो कैसे मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथों में सौंपा जा रहा है!

  2. मार्कास १४:४२लगभग ३३ ई.

    उठो! यहां से चलें. देखो, जो मुझे पकड़वाने पर है, वह आ गया!”

  3. मार्कास १४:४३लगभग ३३ ई.

    जब मसीह येशु यह कह ही रहे थे, उसी क्षण यहूदाह, जो बारह शिष्यों में से एक था, आ पहुंचा. उसके साथ तलवार और लाठियां लिए हुए एक भीड़ भी थी. ये सब प्रधान पुरोहितों, शास्त्रियों तथा पुरनियों द्वारा भेजे गए थे.

  4. मार्कास १४:४४लगभग ३३ ई.

    पकड़वानेवाले ने उन्हें यह संकेत दिया था: “मैं जिसे चूमूं, वही होगा वह. उसे पकड़कर सिपाहियों की सुरक्षा में ले जाना.”

  5. मार्कास १४:४५लगभग ३३ ई.

    वहां पहुंचते ही यहूदाह सीधे मसीह येशु के पास गया और उनसे कहा, “रब्बी” और उन्हें चूम लिया.

  6. मार्कास १४:४६लगभग ३३ ई.

    इस पर उन्होंने मसीह येशु को पकड़कर बांध लिया.

  7. मार्कास १४:४७लगभग ३३ ई.

    उनमें से, जो मसीह के साथ थे, एक ने तलवार खींची और महापुरोहित के दास पर प्रहार कर दिया जिससे उसका एक कान कट गया.

  8. मार्कास १४:४८लगभग ३३ ई.

    मसीह येशु ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे पकड़ने के लिए तुम तलवार और लाठियां लेकर आए हो मानो मैं कोई डाकू हूं!

  9. मार्कास १४:४९लगभग ३३ ई.

    मंदिर में शिक्षा देते हुए मैं प्रतिदिन तुम्हारे साथ ही होता था, तब तो तुमने मुझे नहीं पकड़ा किंतु अब जो कुछ घटित हो रहा है वह इसलिये कि पवित्र शास्त्र का लेख पूरा हो.”

  10. मार्कास १४:५०लगभग ३३ ई.

    सभी शिष्य मसीह येशु को छोड़ भाग चुके थे.

  11. मार्कास १४:५१लगभग ३३ ई.

    एक युवक था, जो मसीह येशु के पीछे-पीछे आ रहा था. उसने अपने शरीर पर मात्र एक चादर लपेटी हुई थी. जब उन्होंने उसे पकड़ना चाहा,

  12. मार्कास १४:५२लगभग ३३ ई.

    वह अपनी उस चादर को छोड़ नंगा ही भाग निकला.

  13. मार्कास १४:५३लगभग ३३ ई.

    वे मसीह येशु को महापुरोहित के सामने ले गए, वहां सभी प्रधान पुरोहित, वरिष्ठ नागरिक तथा शास्त्री इकट्ठा थे.

  14. मार्कास १४:५४लगभग ३३ ई.

    पेतरॉस दूर ही दूर, उनके पीछे-पीछे आ रहे थे और वह महापुरोहित के आंगन में भी आ गए. वह अधिकारियों के साथ बैठ गए और उनके साथ आग तापने लगे.

  15. मार्कास १४:५५लगभग ३३ ई.

    मसीह येशु को मृत्यु दंड देने की इच्छा लिए हुए प्रधान पुरोहित तथा पूरी महासभा मसीह येशु के विरुद्ध गवाह खोजने का यत्न कर रही थी किंतु इसमें वे विफल ही रहे.

  16. मार्कास १४:५६लगभग ३३ ई.

    निःसंदेह उनके विरुद्ध अनेक झूठे गवाह उठ खड़े हुए थे, किंतु उनकी गवाही मेल न खायी.

  17. मार्कास १४:५७लगभग ३३ ई.

    तब कुछ ने मसीह येशु के विरुद्ध यह झूठी गवाही दी:

  18. मार्कास १४:५८लगभग ३३ ई.

    “हमने इसे कहते सुना है: ‘मैं मनुष्य के द्वारा बनाए गए इस मंदिर को ढाह दूंगा और तीन दिन में एक दूसरा बना दूंगा, जो हाथ से बना न होगा.’ ”

  19. मार्कास १४:५९लगभग ३३ ई.

    इस आरोप में भी उनके गवाह में समानता न थी.

  20. मार्कास १४:६०लगभग ३३ ई.

    तब महापुरोहित उनके सामने खड़े हुए तथा मसीह येशु से पूछा, “क्या तुम्हें अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है? ये सब तुम्हारे विरुद्ध क्या-क्या गवाही दे रहे हैं!”

  21. मार्कास १४:६१लगभग ३३ ई.

    किंतु मसीह येशु ने कोई उत्तर न दिया. वह मौन ही बने रहे. तब महापुरोहित ने उन पर व्यंग्य करते हुए पूछा, “क्या तुम ही मसीह हो—परम प्रधान के पुत्र?”

  22. मार्कास १४:६२लगभग ३३ ई.

    मसीह येशु ने उत्तर दिया, “जी हां, मैं हूं. आप मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान के दायें पक्ष में आसीन तथा आकाश के बादलों पर लौटता हुआ देखेंगे.”

  23. मार्कास १४:६३लगभग ३३ ई.

    इस पर महापुरोहित ने अपने वस्त्र फाड़ते हुए कहा, “अब क्या ज़रूरत रह गई किसी अन्य गवाह की?

  24. मार्कास १४:६४लगभग ३३ ई.

    तुम सभी ने परमेश्वर-निंदा सुन ली है. क्या विचार है तुम्हारा?” सबने एक मत से उन्हें मृत्यु दंड का भागी घोषित किया.

  25. मार्कास १४:६५लगभग ३३ ई.

    कुछ ने उन पर थूकना प्रारंभ कर दिया. उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर कुछ उन्हें घूंसे मारते हुए कहने लगे, “कर भविष्यवाणी!” और प्रहरियों ने उनके मुख पर थप्पड़ भी मारे.