circa AD 48–96
Letters to the Churches
Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.
इस काल के वचन
- 1 तिमोथियॉस १:१०लगभग ६५ ई.
व्यभिचारी, समलैंगिक, अपहरण करनेवाले, झूठ बोलनेवाले, झूठे गवाह तथा शेष सब कुछ के लिए किया गया है, जो निर्मल उपदेश के विरोध में है.
- 1 तिमोथियॉस १:११लगभग ६५ ई.
वह धन्य परमेश्वर के गौरवान्वित ईश्वरीय सुसमाचार के अनुसार है, जो मुझे सौंपी गई है.
- 1 तिमोथियॉस १:१२लगभग ६५ ई.
मैं हमारे प्रभु येशु मसीह के प्रति, जिन्होंने मुझे सामर्थ्य प्रदान किया है, धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे विश्वासयोग्य समझा और अपनी सेवा में चुना.
- 1 तिमोथियॉस १:१३लगभग ६५ ई.
हालांकि पहले मैं परमेश्वर की निंदा करनेवाला था, अत्याचारी तथा अधर्मी था किंतु मुझ पर कृपा की गई क्योंकि अपनी अज्ञानता में उनमें अविश्वास के कारण मैंने यह सब किया था.
- 1 तिमोथियॉस १:१४लगभग ६५ ई.
मसीह येशु में हमारे प्रभु का बहुत अधिक अनुग्रह विश्वास और प्रेम के साथ मुझ पर हुआ.
- 1 तिमोथियॉस १:१५लगभग ६५ ई.
यह बात सच है, जो हर प्रकार से मानने योग्य है: मसीह येशु पापियों के उद्धार के लिए संसार में आए. इनमें सबसे बड़ा पापी मैं हूं.
- 1 तिमोथियॉस १:१६लगभग ६५ ई.
किंतु मुझ पर कृपा इसलिये हुई कि मुझ बड़े पापी में मसीह येशु आदर्श के रूप में अपनी पूरी सहनशीलता का प्रमाण उनके हित में प्रस्तुत करें, जो अनंत जीवन के लिए उनमें विश्वास करेंगे.
- 1 तिमोथियॉस १:१७लगभग ६५ ई.
सनातन राजा, अविनाशी, अनदेखे तथा एकमात्र परमेश्वर का आदर और महिमा सदा-सर्वदा होती रहे, आमेन.
- 1 तिमोथियॉस १:१८लगभग ६५ ई.
मेरे पुत्र, तिमोथियॉस, मैं तुम्हें यह आज्ञा तुम्हारे विषय में पहले से की गई भविष्यवाणियों के अनुसार सौंप रहा हूं कि उनकी प्रेरणा से तुम निरंतर संघर्ष कर सको,
- 1 तिमोथियॉस १:१९लगभग ६५ ई.
तथा विश्वास और अच्छे विवेक को थामे रखो, कुछ ने जिसकी उपेक्षा की और अपने विश्वास का सर्वनाश कर बैठे.
- 1 तिमोथियॉस १:२०लगभग ६५ ई.
ह्यूमैनेऑस तथा अलेक्सान्दरॉस इन्हीं में से हैं, जिन्हें मैंने शैतान को सौंप दिया है कि उन्हें परमेश्वर-निंदा न करने का पाठ सिखा दिया जाए.
- 1 तिमोथियॉस २:१लगभग ६५ ई.
इसलिये सबसे पहली विनती यह है कि सभी के लिए विनती, प्रार्थनाएं, दूसरों के लिए प्रार्थनाएं और धन्यवाद प्रस्तुत किए जाएं,
- 1 तिमोथियॉस २:२लगभग ६५ ई.
राजाओं तथा अधिकारियों के लिए कि हमारा जीवन सम्मान तथा परमेश्वर की भक्ति में शांति और चैन से हो.
- 1 तिमोथियॉस २:३लगभग ६५ ई.
यह परमेश्वर, हमारे उद्धारकर्ता को प्रिय तथा ग्रहण योग्य है,
- 1 तिमोथियॉस २:४लगभग ६५ ई.
जिनकी इच्छा है कि सभी मनुष्यों का उद्धार हो तथा वे सच को उसकी भरपूरी में जानें.
- 1 तिमोथियॉस २:५लगभग ६५ ई.
परमेश्वर एक ही हैं तथा परमेश्वर और मनुष्यों के मध्यस्थ भी एक ही हैं—देहधारी मसीह येशु,
- 1 तिमोथियॉस २:६लगभग ६५ ई.
जिन्होंने स्वयं को सबके छुटकारे के लिए बलिदान कर दिया—ठीक समय पर प्रस्तुत एक सबूत.
- 1 तिमोथियॉस २:७लगभग ६५ ई.
इसी उद्देश्य के लिए मेरा चुनाव प्रचारक और प्रेरित के रूप में अन्यजातियों में विश्वास और सच्चाई की शिक्षा देने के लिए किया गया. मैं सच कह रहा हूं—झूठ नहीं.
- 1 तिमोथियॉस २:८लगभग ६५ ई.
मैं चाहता हूं कि हर जगह सभाओं में पुरुष, बिना क्रोध तथा विवाद के, परमेश्वर को समर्पित हाथों को ऊपर उठाकर प्रार्थना किया करें.
- 1 तिमोथियॉस २:९लगभग ६५ ई.
इसी प्रकार स्त्रियों का संवारना समय के अनुसार हो—शालीनता भरा तथा विवेकशील—सिर्फ बाल-सजाने तथा स्वर्ण, मोतियों या कीमती वस्त्रों से नहीं,
- 1 तिमोथियॉस २:१०लगभग ६५ ई.
परंतु अच्छे कामों से, जो परमेश्वर भक्त स्त्रियों के लिए उचित है.
- 1 तिमोथियॉस २:११लगभग ६५ ई.
स्त्री, मौन रहकर पूरी अधीनता में शिक्षा ग्रहण करे.
- 1 तिमोथियॉस २:१२लगभग ६५ ई.
मेरी ओर से स्त्री को पुरुष पर प्रभुता जताने और शिक्षा देने की आज्ञा नहीं है. वह मौन रहे.
- 1 तिमोथियॉस २:१३लगभग ६५ ई.
क्योंकि आदम की सृष्टि हव्वा से पहले हुई थी.
- 1 तिमोथियॉस २:१४लगभग ६५ ई.
छल आदम के साथ नहीं परंतु स्त्री के साथ हुआ, जो आज्ञा न मानने की अपराधी हुई.