circa AD 48–96
Letters to the Churches
Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.
इस काल के वचन
- 1 तिमोथियॉस ४:९लगभग ६५ ई.
यह बात सच है, जो हर प्रकार से मानने योग्य है:
- 1 तिमोथियॉस ४:१०लगभग ६५ ई.
हम उसी के लिए परिश्रम तथा संघर्ष करते हैं क्योंकि हमने अपनी आशा जीवित परमेश्वर पर लगाई है, जो सब मनुष्यों के उद्धारकर्ता हैं, विशेषकर उनके, जो विश्वास करते हैं.
- 1 तिमोथियॉस ४:११लगभग ६५ ई.
तुम्हारे आदेशों और शिक्षाओं के विषय ये ही हों.
- 1 तिमोथियॉस ४:१२लगभग ६५ ई.
तुलना में कम आयु के कारण कोई तुम्हें तुच्छ न समझे परंतु बातचीत, स्वभाव, प्रेम, विश्वास तथा पवित्रता में मसीह के विश्वासियों का आदर्श बनो.
- 1 तिमोथियॉस ४:१३लगभग ६५ ई.
मेरे वहां पहुंचने तक पवित्र शास्त्र के सार्वजनिक रीति से पढ़ने, उपदेश तथा शिक्षा पाने में लीन रहो.
- 1 तिमोथियॉस ४:१४लगभग ६५ ई.
अंदर बसे हुए पवित्र आत्मा द्वारा दी गई क्षमता की उपेक्षा न करो, जो तुम्हें भविष्यवाणी के द्वारा उस समय प्रदान की गई, जब कलीसिया के पुरनियों ने तुम पर हाथ रखे.
- 1 तिमोथियॉस ४:१५लगभग ६५ ई.
इन निर्देशों पर विशेष ध्यान दो, इनमें लीन हो जाओ कि तुम्हारी उन्नति सब पर प्रकट हो जाए.
- 1 तिमोथियॉस ४:१६लगभग ६५ ई.
अपने जीवन और शिक्षा का पूरी शक्ति से ध्यान रखो. इसमें लगातार चौकस रहो क्योंकि तुम ऐसा करने के द्वारा दोनों का उद्धार निश्चित करोगे—स्वयं अपना तथा अपने सुननेवालों का.
- 1 तिमोथियॉस ५:१लगभग ६५ ई.
अपने से अधिक उम्र के व्यक्ति को अपमान के भाव से न डांटो किंतु उसे पिता मानकर उससे विनती करो. अपने से कम उम्र के व्यक्ति को भाई,
- 1 तिमोथियॉस ५:२लगभग ६५ ई.
अधिक उम्र की स्त्रियों को माता तथा कम उम्र की स्त्रियों को निर्मल भाव से बहन मानो.
- 1 तिमोथियॉस ५:३लगभग ६५ ई.
असमर्थ विधवाओं का सम्मान करो.
- 1 तिमोथियॉस ५:४लगभग ६५ ई.
परंतु यदि किसी विधवा के पुत्र-पौत्र हों तो वे सबसे पहले अपने ही परिवार के प्रति अपने कर्तव्य-पालन द्वारा परमेश्वर के भक्त होना सीखें तथा अपने माता-पिता के उपकारों का फल दें क्योंकि परमेश्वर को यही भाता है.
- 1 तिमोथियॉस ५:५लगभग ६५ ई.
वह, जो वास्तव में विधवा है तथा जो अकेली रह गई है, परमेश्वर पर ही आश्रित रहती है और दिन-रात परमेश्वर से विनती तथा प्रार्थना करने में लवलीन रहती है.
- 1 तिमोथियॉस ५:६लगभग ६५ ई.
पर वह विधवा, जिसकी जीवनशैली निर्लज्जता भरी है, जीते जी मरी हुई है.
- 1 तिमोथियॉस ५:७लगभग ६५ ई.
तुम उन्हें ऊपर बताए गए निर्देश भी दो कि वे निर्दोष रहें.
- 1 तिमोथियॉस ५:८लगभग ६५ ई.
यदि कोई अपने परिजनों, विशेषकर अपने परिवार की चिंता नहीं करता है, उसने विश्वास का त्याग कर दिया है और वह अविश्वासी व्यक्ति से भी तुच्छ है.
- 1 तिमोथियॉस ५:९लगभग ६५ ई.
उसी विधवा का पंजीकरण करो जिसकी आयु साठ वर्ष से अधिक हो तथा जिसका एक ही पति रहा हो;
- 1 तिमोथियॉस ५:१०लगभग ६५ ई.
जो अपने भले कामों के लिए सुनाम हो; जिसने अपनी संतान का उत्तम पालन पोषण किया हो; आतिथ्य सत्कार किया हो; पवित्र लोगों के चरण धोए हों; दीन-दुःखियों की सहायता की हो तथा सब प्रकार के भले कामों में लीन रही हो.
- 1 तिमोथियॉस ५:११लगभग ६५ ई.
तुलना में कम आयु की विधवाओं के नाम न लिखना क्योंकि काम-वासना प्रबल होने पर वे मसीह से दूर हो दूसरे विवाह की कामना करने लगेंगी.
- 1 तिमोथियॉस ५:१२लगभग ६५ ई.
न्याय-दंड ही उनकी नियति होगी क्योंकि उन्होंने पंजीकरण से संबंधित अपनी पूर्व शपथ तोड़ दी है.
- 1 तिमोथियॉस ५:१३लगभग ६५ ई.
इसके अलावा वे आलसी रहने लगती हैं तथा घर-घर घूमा करती हैं. वे न केवल आलसी रहती हैं परंतु बाकियों के कामों में हस्तक्षेप करती तथा दूसरों की बुराई में आनंद लेती हैं, तथा वे बातें बोलती है, जो उन्हें नहीं बोलनी चाहिये.
- 1 तिमोथियॉस ५:१४लगभग ६५ ई.
इसलिये मैं चाहता हूं कि कम आयु की विधवाएं विवाह करें, संतान पैदा करें, गृहस्थी सम्भालें तथा विरोधियों को निंदा का कोई अवसर न दें.
- 1 तिमोथियॉस ५:१५लगभग ६५ ई.
कुछ हैं, जो पहले ही मुड़कर शैतान की शिष्य बन चुकी हैं.
- 1 तिमोथियॉस ५:१६लगभग ६५ ई.
यदि किसी विश्वासी परिवार में आश्रित विधवाएं हैं तो वही उसकी सहायता करे कि उसका बोझ कलीसिया पर न पड़े, कि कलीसिया ऐसों की सहायता कर सके, जो वास्तव में असमर्थ हैं.
- 1 तिमोथियॉस ५:१७लगभग ६५ ई.
जो कलीसिया के प्राचीन अपनी ज़िम्मेदारी का कुशलतापूर्वक निर्वाह करते हैं, वे दुगने सम्मान के अधिकारी हैं विशेषकर वे, जो वचन सुनाने में तथा शिक्षा देने के काम में परिश्रम करते हैं.