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Creation Era

Creation & The Fall

God creates the heavens and earth, forming humanity in his image before sin enters the world.

138 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति २:२०लगभग ४००४ ई.पू.

    आदम ने सब जंतुओं का नाम रख दिया. किंतु आदम के लिए कोई साथी नहीं था, जो उसके साथ रह सके.

  2. उत्पत्ति २:२१लगभग ४००४ ई.पू.

    इसलिये याहवेह परमेश्वर ने आदम को गहरी नींद में डाला; जब वह सो गया, याहवेह परमेश्वर ने उसकी एक पसली निकाली और उस जगह को मांस से भर दिया.

  3. उत्पत्ति २:२२लगभग ४००४ ई.पू.

    फिर याहवेह परमेश्वर ने उस पसली से एक स्त्री बना दी और उसे आदम के पास ले गए.

  4. उत्पत्ति २:२३लगभग ४००४ ई.पू.

    आदम ने कहा, “अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है; उसे ‘नारी’ नाम दिया जायेगा, क्योंकि यह ‘नर’ से निकाली गई थी.”

  5. उत्पत्ति २:२४लगभग ४००४ ई.पू.

    इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा तथा वे दोनों एक देह होंगे.

  6. उत्पत्ति २:२५लगभग ४००४ ई.पू.

    आदम एवं उसकी पत्नी नग्न तो थे पर लजाते न थे.

  7. उत्पत्ति ३:१लगभग ४००४ ई.पू.

    याहवेह परमेश्वर के बनाये सब जंतुओं में सांप सबसे ज्यादा चालाक था. उसने स्त्री से कहा, “क्या सच में परमेश्वर ने तुमसे कहा, ‘तुम इस बगीचे के किसी भी पेड़ का फल न खाना’?”

  8. उत्पत्ति ३:२लगभग ४००४ ई.पू.

    तब स्त्री ने उत्तर दिया, “हम बगीचे के वृक्षों के फलों को खा सकते हैं,

  9. उत्पत्ति ३:३लगभग ४००४ ई.पू.

    लेकिन बगीचे के बीच में जो पेड़ है, उसके बारे में परमेश्वर ने कहा है ‘न तो तुम उसका फल खाना और न ही उसको छूना, नहीं तो तुम मर जाओगे.’ ”

  10. उत्पत्ति ३:४लगभग ४००४ ई.पू.

    सांप ने स्त्री से कहा, “निश्चय तुम नहीं मरोगे!

  11. उत्पत्ति ३:५लगभग ४००४ ई.पू.

    परमेश्वर यह जानते हैं कि जिस दिन तुम इसमें से खाओगे, तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी तथा तुम्हें भले और बुरे का ज्ञान हो जाएगा और तुम परमेश्वर के समान हो जाओगे.”

  12. उत्पत्ति ३:६लगभग ४००४ ई.पू.

    जब स्त्री ने उस पेड़ के फल की ओर देखा कि वह खाने में अच्छा तथा देखने में सुंदर और बुद्धि देनेवाला है, तब उसने उस पेड़ के फलों में से एक लेकर खाया. और उसने यह फल अपने पति को भी दिया, जो उसके पास ही था. उसने भी उसे खाया.

  13. उत्पत्ति ३:७लगभग ४००४ ई.पू.

    तब उन दोनों की आंखें खुल गईं और उन्हें महसूस हुआ कि वे नंगे हैं. इसलिये उन्होंने अंजीर की पत्तियां जोड़कर कपड़े बनाए और अपने नंगेपन को ढक दिया.

  14. उत्पत्ति ३:८लगभग ४००४ ई.पू.

    जब आदम और स्त्री ने दिन के ठण्डे समय में याहवेह परमेश्वर के आने की आवाज बगीचे में सुनी, तब आदम और उसकी पत्नी पेड़ों के बीच में छिप गये.

  15. उत्पत्ति ३:९लगभग ४००४ ई.पू.

    किंतु याहवेह परमेश्वर ने आदम को बुलाया और पूछा, “तुम कहां हो?”

  16. उत्पत्ति ३:१०लगभग ४००४ ई.पू.

    आदम ने उत्तर दिया, “आपके आने का शब्द सुनकर हम डर गये और हम छिप गये क्योंकि हम नंगे हैं.”

  17. उत्पत्ति ३:११लगभग ४००४ ई.पू.

    याहवेह ने कहा, “किसने तुमसे कहा कि तुम नंगे हो? कहीं ऐसा तो नहीं, कि तुमने उस पेड़ का फल खा लिया हो, जिसको खाने के लिए मैंने मना किया था?”

  18. उत्पत्ति ३:१२लगभग ४००४ ई.पू.

    आदम ने कहा, “साथ में रहने के लिए जो स्त्री आपने मुझे दी है, उसी ने मुझे उस पेड़ से वह फल दिया, जिसे मैंने खाया.”

  19. उत्पत्ति ३:१३लगभग ४००४ ई.पू.

    यह सुन याहवेह परमेश्वर ने स्त्री से पूछा, “यह क्या किया तुमने?” स्त्री ने उत्तर दिया, “सांप ने मुझे बहकाया, इसलिये मैंने वह फल खा लिया.”

  20. उत्पत्ति ३:१४लगभग ४००४ ई.पू.

    याहवेह परमेश्वर ने सांप से कहा, तूने ऐसा करके गलत किया, “इसलिये तू सभी पालतू पशुओं से तथा सभी वन्य पशुओं से अधिक शापित है! तू पेट के बल चला करेगा और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा.

  21. उत्पत्ति ३:१५लगभग ४००४ ई.पू.

    मैं तेरे तथा स्त्री के बीच, तेरी संतान तथा स्त्री की संतान के बीच बैर पैदा करूंगा; वह तेरे सिर को कुचलेगा, तथा तू उसकी एड़ी को डसेगा.”

  22. उत्पत्ति ३:१६लगभग ४००४ ई.पू.

    स्त्री से परमेश्वर ने कहा, “मैं तुम्हारी गर्भावस्था के दर्द को बहुत बढ़ाऊंगा; तुम दर्द के साथ संतान को जन्म दोगी. यह होने पर भी तुम्हारी इच्छा तुम्हारे पति की ओर होगी, और पति तुम पर अधिकार करेगा.”

  23. उत्पत्ति ३:१७लगभग ४००४ ई.पू.

    फिर आदम से परमेश्वर ने कहा, “तुमने अपनी पत्नी की बात सुनकर उस पेड़ से फल खाया, ‘जिसे खाने के लिये मैंने तुम्हें मना किया था,’ “इस कारण यह पृथ्वी जिस पर तुम रह रहे हो, श्रापित हो गई है; तुम जीवन भर कड़ी मेहनत करके जीवन चलाओगे.

  24. उत्पत्ति ३:१८लगभग ४००४ ई.पू.

    तुम खेती करोगे लेकिन उसमें कांटे और जंगली पेड़ उगेंगे, और तुम खेत की उपज खाओगे.

  25. उत्पत्ति ३:१९लगभग ४००४ ई.पू.

    तुम अपने पसीने ही की रोटी खाया करोगे और अंततः मिट्टी में मिल जाओगे क्योंकि तुम मिट्टी ही हो, मिट्टी से ही बने हो.”