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Adultery के बारे में बाइबल के वचन

242 वचन · 4 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. और मसीह येशु से प्रश्न किया, “गुरु, यह स्त्री व्यभिचार करते हुए पकड़ी गई है.

  2. मोशेह ने व्यवस्था में हमें ऐसी स्त्रियों को पथराव द्वारा मार डालने की आज्ञा दी है; किंतु आप क्या कहते हैं?”

  3. मसीह येशु ने सीधे खड़े होते हुए स्त्री की ओर देखकर उससे पूछा, “हे स्त्री! वे सब कहां हैं? क्या तुम्हें किसी ने भी दंडित नहीं किया?”

  4. उसने उत्तर दिया, “किसी ने भी नहीं, प्रभु.” मसीह येशु ने उससे कहा, “मैं भी तुम्हें दंडित नहीं करता. जाओ, अब फिर पाप न करना.”

  5. परंतु अच्छा यह होगा कि हम उन्हें यह आज्ञा लिख भेजें कि वे मूर्तियों की अशुद्धता से खुद को बचाए रखें, वेश्यागामी तथा गला घोंट कर मारे गए पशुओं के मांस से दूर रहें और लहू का सेवन न करें.

  6. मूर्तियों को चढ़ाए गए भोजन, लहू, गला घोंट कर मारे गए जीवों के मांस के सेवन से तथा वेश्यागामी से परे रहो. यही तुम्हारे लिए उत्तम है. सबको शुभेच्छा!

  7. इसके बाद भी उन्होंने यह उचित न समझा कि परमेश्वर के समग्र ज्ञान को स्वीकार करें, इसलिये परमेश्वर ने उन्हें वह सब करने के लिए, जो अनुचित था, निकम्मे मन के वश में छोड़ दिया.

  8. उनमें सब प्रकार की बुराइयां समा गईं: दुष्टता, लोभ, दुष्कृति, जलन, हत्या, झगड़ा, छल, दुर्भाव, कानाफूसी,

  9. यद्यपि वे परमेश्वर के धर्ममय अध्यादेश से परिचित हैं कि इन सबका दोषी व्यक्ति मृत्यु दंड के योग्य है, वे न केवल स्वयं ऐसा काम करते हैं, परंतु उन्हें भी पूरा समर्थन देते हैं, जो इनका पालन करते हैं.

  10. यदि अपने पति के जीवित रहते हुए वह किसी अन्य पुरुष से संबंध बनाती है तो वह व्यभिचारिणी कहलाती है किंतु अपने पति की मृत्यु के बाद वह कानूनी रूप से स्वतंत्र हो जाती है और अन्य पुरुष से विवाह करने पर व्यभिचारिणी नहीं कहलाती.

  11. क्योंकि: व्यभिचार मत करो, हत्या मत करो, चोरी मत करो, लोभ मत करो, तथा इसके अतिरिक्त यदि कोई भी अन्य आज्ञा हो तो उसका सार यही है: अपने पड़ोसी के लिए तुम्हारा प्रेम वैसा ही हो जैसा तुम्हारा स्वयं के लिए है.

  12. हमारा स्वभाव समय के अनुसार—दिन के अनुकूल हो, न कि लीला-क्रीड़ा, पियक्कड़पन, व्यभिचार, भ्रष्‍ट आचरण, झगड़ा तथा जलन से भरा,

  13. तुम्हारे बीच में हो रहा वेश्यागामी हर जगह चर्चा का विषय बन गया है, वह भी ऐसा यौनाचार, जो गैर-यहूदियों तक में नहीं पाया जाता: किसी ने तो अपने पिता की स्त्री को ही रख लिया है.

  14. इसके अलावा इस पर लज्जित होने के बजाय तुम्हें इसका गर्व है! ऐसे व्यक्ति को तो तुम्हारे बीच से निकाल देना चाहिए था?

  15. शारीरिक रूप से अनुपस्थित होने पर भी मैं तुम्हारे बीच आत्मा में उपस्थित हूं और मैं उस बुरा काम करनेवाले के विरुद्ध अपना निर्णय ऐसे दे चुका हूं मानो मैं स्वयं वहां उपस्थित हूं.

  16. जब तुम प्रभु येशु मसीह के नाम में इकट्ठा होते हो, और मसीह येशु की सामर्थ्य के साथ आत्मा में मैं तुम्हारे बीच,

  17. तब उस बुरा काम करनेवाले को शैतान के हाथों सौंप दिया जाए कि उसका शरीर तो नाश हो जाए, किंतु प्रभु के दिन उसकी आत्मा का उद्धार हो.

  18. तुम्हारा घमंड करना बिलकुल भी अच्छा नहीं है. क्या तुम नहीं जानते कि थोड़े से खमीर से ही पूरा गूंथा हुआ आटा खमीर हो जाता है?

  19. निकाल फेंको इस खमीर को कि तुम एक नया गूंथा हुआ आटा बन जाओ, जैसे कि तुम अखमीरी ही हो, क्योंकि हमारा फ़सह वास्तव में मसीह की बलि द्वारा पूरा हुआ है.

  20. हम बुराई व दुष्टता के पुराने खमीर से नहीं परंतु सीधाई व सच्चाई की अखमीरी रोटी से उत्सव मनाएं.

  21. अपने पत्र में मैंने तुम्हें लिखा था कि बुरा काम करनेवालों से कोई संबंध न रखना.

  22. मेरा मतलब यह बिलकुल न था कि तुम संसार के उन सभी व्यक्तियों से, जो बुरा काम करनेवाले, लोभी, ठग या मूर्तिपूजक हैं, कोई संबंध न रखना, अन्यथा तुम्हें तो संसार से ही बाहर हो जाना पड़ेगा.

  23. वास्तव में मेरा मतलब यह था कि तुम्हारा ऐसे किसी साथी विश्वासी के साथ, जो बुरा काम करनेवाले, लोभी, मूर्तिपूजक, बकवादी, पियक्कड़ या ठग हो, संबंध रखना तो दूर, भोजन करना तक ठीक न होगा.

  24. कलीसिया से बाहर के व्यक्तियों का न्याय भला मैं क्यों करूं? किंतु क्या, यह तुम्हारा काम नहीं है कि उनकी जांच करना, जो कलीसिया में हैं?

  25. बाहरी व्यक्तियों का न्याय परमेश्वर करेंगे. “बाहर निकाल दो अपने बीच से कुकर्मी को.”