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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लूकॉस १:२७लगभग ५ ई.पू.

    एक कुंवारी कन्या के पास भेजा गया, जिसका विवाह योसेफ़ नामक एक पुरुष से होना निश्चित हुआ था. योसेफ़, राजा दावीद के वंशज थे. कन्या का नाम था मरियम.

  2. लूकॉस १:२८लगभग ५ ई.पू.

    मरियम को संबोधित करते हुए स्वर्गदूत ने कहा, “प्रभु की कृपापात्री, नमस्कार! प्रभु आपके साथ हैं.”

  3. लूकॉस १:२९लगभग ५ ई.पू.

    इस कथन को सुन वह बहुत ही घबरा गईं कि इस प्रकार के नमस्कार का क्या अर्थ हो सकता है.

  4. लूकॉस १:३०लगभग ५ ई.पू.

    स्वर्गदूत ने उनसे कहा, “मत डरिए, मरियम! क्योंकि आप परमेश्वर की कृपा की पात्र हैं.

  5. लूकॉस १:३१लगभग ५ ई.पू.

    सुनिए! आप गर्भधारण कर एक पुत्र को जन्म देंगी. आप उनका नाम येशु रखें.

  6. लूकॉस १:३२लगभग ५ ई.पू.

    वह महान होंगे. परम प्रधान के पुत्र कहलाएंगे और प्रभु परमेश्वर उन्हें उनके पूर्वज दावीद का सिंहासन सौंपेंगे,

  7. लूकॉस १:३३लगभग ५ ई.पू.

    वह याकोब के वंश पर हमेशा के लिए राज्य करेंगे तथा उनके राज्य का अंत कभी न होगा.”

  8. लूकॉस १:३४लगभग ५ ई.पू.

    मरियम ने स्वर्गदूत से प्रश्न किया, “यह कैसे संभव होगा क्योंकि मैं तो कुंवारी हूं?”

  9. लूकॉस १:३५लगभग ५ ई.पू.

    स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, “पवित्र आत्मा आप पर उतरेंगे तथा परम प्रधान का सामर्थ्य आप पर छाया करेगा. इसलिये जो जन्म लेंगे, वह पवित्र और परमेश्वर-पुत्र कहलाएंगे.

  10. लूकॉस १:३६लगभग ५ ई.पू.

    और यह भी सुनिए आपकी परिजन एलिज़ाबेथ ने अपनी वृद्धावस्था में एक पुत्र गर्भधारण किया है. वह, जो बांझ कहलाती थी, उन्हें छः माह का गर्भ है.

  11. लूकॉस १:३७लगभग ५ ई.पू.

    परमेश्वर के लिए असंभव कुछ भी नहीं.”

  12. लूकॉस १:३८लगभग ५ ई.पू.

    मरियम ने कहा, “देखिए, मैं प्रभु की दासी हूं. मेरे लिए वही सब हो, जैसा आपने कहा है.” तब वह स्वर्गदूत उनके पास से चला गया.

  13. लूकॉस १:३९लगभग ५ ई.पू.

    मरियम तुरंत यहूदिया प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र के एक नगर को चली गईं.

  14. लूकॉस १:४०लगभग ५ ई.पू.

    वहां उन्होंने ज़करयाह के घर पर जाकर एलिज़ाबेथ को नमस्कार किया.

  15. लूकॉस १:४१लगभग ५ ई.पू.

    जैसे ही एलिज़ाबेथ ने मरियम का नमस्कार सुना, उनके गर्भ में शिशु उछल पड़ा और एलिज़ाबेथ पवित्र आत्मा से भर गईं.

  16. लूकॉस १:४२लगभग ५ ई.पू.

    वह उल्‍लसित शब्द में बोल उठी, “तुम सभी नारियों में धन्य हो और धन्य है तुम्हारे गर्भ का फल!

  17. लूकॉस १:४३लगभग ५ ई.पू.

    मुझ पर यह कैसी कृपादृष्टि हुई है, जो मेरे प्रभु की माता मुझसे भेंट करने आई हैं!

  18. लूकॉस १:४४लगभग ५ ई.पू.

    देखो तो, जैसे ही तुम्हारा नमस्कार मेरे कानों में पड़ा, हर्षोल्लास से मेरे गर्भ में शिशु उछल पड़ा.

  19. लूकॉस १:४५लगभग ५ ई.पू.

    धन्य है वह, जिसने प्रभु द्वारा कही हुई बातों के पूरा होने का विश्वास किया है!”

  20. लूकॉस १:४६लगभग ५ ई.पू.

    इस पर मरियम के वचन ये थे: “मेरा प्राण प्रभु की प्रशंसा करता है

  21. लूकॉस १:४७लगभग ५ ई.पू.

    और मेरी अंतरात्मा परमेश्वर, मेरे उद्धारकर्ता में आनंदित हुई है,

  22. लूकॉस १:४८लगभग ५ ई.पू.

    क्योंकि उन्होंने अपनी दासी की दीनता की ओर दृष्टि की है. अब से सभी पीढ़ियां मुझे धन्य कहेंगी,

  23. लूकॉस १:४९लगभग ५ ई.पू.

    क्योंकि सामर्थ्यी ने मेरे लिए बड़े-बड़े काम किए हैं. पवित्र है उनका नाम.

  24. लूकॉस १:५०लगभग ५ ई.पू.

    उनकी दया उनके श्रद्धालुओं पर पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है.

  25. लूकॉस १:५१लगभग ५ ई.पू.

    अपने भुजबल से उन्होंने प्रतापी काम किए हैं और अभिमानियों को बिखरा दिया है.