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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लूकॉस १:५२लगभग ५ ई.पू.

    परमेश्वर ने राजाओं को उनके सिंहासनों से नीचे उतार दिया तथा विनम्रों को उठाया है.

  2. लूकॉस १:५३लगभग ५ ई.पू.

    उन्होंने भूखों को उत्तम पदार्थों से तृप्‍त किया तथा सम्पन्‍नों को खाली लौटा दिया.

  3. लूकॉस १:५४लगभग ५ ई.पू.

    उन्होंने अपने सेवक इस्राएल की सहायता अपनी उस करुणा के स्मरण में की,

  4. लूकॉस १:५५लगभग ५ ई.पू.

    जिसकी प्रतिज्ञा उसने हमारे बाप-दादों से करी थी और जो अब्राहाम तथा उनके वंशजों पर सदा-सर्वदा रहेगी.”

  5. लूकॉस १:५६लगभग ५ ई.पू.

    लगभग तीन माह एलिज़ाबेथ के साथ रहकर मरियम अपने घर लौट गईं.

  6. लूकॉस १:५७लगभग ५ ई.पू.

    एलिज़ाबेथ का प्रसवकाल पूरा हुआ और उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया.

  7. लूकॉस १:५८लगभग ५ ई.पू.

    जब पड़ोसियों और परिजनों ने यह सुना कि एलिज़ाबेथ पर यह अनुग्रह हुआ है, तो वे भी उनके इस आनंद में सम्मिलित हो गए.

  8. लूकॉस १:५९लगभग ५ ई.पू.

    आठवें दिन वे शिशु के ख़तना के लिए इकट्ठा हुए. वे शिशु को उसके पिता के नाम पर ज़करयाह पुकारने लगे.

  9. लूकॉस १:६०लगभग ५ ई.पू.

    किंतु शिशु की माता ने उत्तर दिया; “नहीं! इसका नाम योहन होगा!”

  10. लूकॉस १:६१लगभग ५ ई.पू.

    इस पर उन्होंने एलिज़ाबेथ से कहा, “आपके परिजनों में तो इस नाम का कोई भी व्यक्ति नहीं है!”

  11. लूकॉस १:६२लगभग ५ ई.पू.

    तब उन्होंने शिशु के पिता से संकेत में प्रश्न किया कि वह शिशु का नाम क्या रखना चाहते हैं?

  12. लूकॉस १:६३लगभग ५ ई.पू.

    ज़करयाह ने एक लेखन पट्ट मंगा कर उस पर लिख दिया, “इसका नाम योहन है.” यह देख सभी चकित रह गए.

  13. लूकॉस १:६४लगभग ५ ई.पू.

    उसी क्षण उनकी आवाज लौट आई. उनकी जीभ के बंधन खुल गए और वह परमेश्वर की स्तुति करने लगे.

  14. लूकॉस १:६५लगभग ५ ई.पू.

    सभी पड़ोसियों में परमेश्वर के प्रति श्रद्धा भाव आ गया और यहूदिया प्रदेश के सभी पर्वतीय क्षेत्र में इसकी चर्चा होने लगी.

  15. लूकॉस १:६६लगभग ५ ई.पू.

    निःसंदेह प्रभु का हाथ उस बालक पर था. जिन्होंने यह सुना, उन्होंने इसे याद रखा और यह विचार करते रहे: “क्या होगा यह बालक!”

  16. लूकॉस १:६७लगभग ५ ई.पू.

    पवित्र आत्मा से भरकर उनके पिता ज़करयाह इस प्रकार भविष्यवाणियों का वर्णानुभाषण करना शुरू किया:

  17. लूकॉस १:६८लगभग ५ ई.पू.

    “धन्य हैं प्रभु, इस्राएल के परमेश्वर, क्योंकि उन्होंने अपनी प्रजा की सुधि ली और उसका उद्धार किया.

  18. लूकॉस १:६९लगभग ५ ई.पू.

    उन्होंने हमारे लिए अपने सेवक दावीद के वंश में एक उद्धारकर्ता पैदा किया है,

  19. लूकॉस १:७०लगभग ५ ई.पू.

    (जैसा उन्होंने प्राचीन काल के अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के माध्यम से प्रकट किया)

  20. लूकॉस १:७१लगभग ५ ई.पू.

    शत्रुओं तथा उन सबसे, जो हमसे घृणा करते हैं, बचाए रखा

  21. लूकॉस १:७२लगभग ५ ई.पू.

    कि वह हमारे पूर्वजों पर अपनी कृपादृष्टि प्रदर्शित करें तथा अपनी पवित्र वाचा को पूरा करें;

  22. लूकॉस १:७३लगभग ५ ई.पू.

    वही वाचा, जो उन्होंने हमारे पूर्वज अब्राहाम से स्थापित की थी:

  23. लूकॉस १:७४लगभग ५ ई.पू.

    वह हमें हमारे शत्रुओं के हाथ से छुड़ाएंगे,

  24. लूकॉस १:७५लगभग ५ ई.पू.

    कि हम पवित्रता और धार्मिकता में निर्भय हो जीवन भर उनकी सेवा कर सकें.

  25. लूकॉस १:७६लगभग ५ ई.पू.

    “और बालक तुम, मेरे पुत्र, परम प्रधान परमेश्वर के भविष्यवक्ता कहलाओगे; क्योंकि तुम उनका मार्ग तैयार करने के लिए प्रभु के आगे-आगे चलोगे,