circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- मत्तियाह २२:२३लगभग ३३ ई.
उसी समय सदूकी संप्रदाय के कुछ लोग, जिनकी यह मान्यता है कि पुनरुत्थान जैसा कुछ नहीं होता, येशु के पास आए और उनसे प्रश्न करने लगे,
- मत्तियाह २२:२४लगभग ३३ ई.
“गुरुवर, मोशेह की शिक्षा है: यदि कोई पुरुष निःसंतान हो और उसकी मृत्यु हो जाए तो उसका भाई उसकी पत्नी से विवाह करके अपने भाई के लिए संतान पैदा करे.
- मत्तियाह २२:२५लगभग ३३ ई.
इसी विषय में एक घटना इस प्रकार है: एक परिवार में सात भाई थे. पहले का विवाह हुआ किंतु उसकी मृत्यु हो गई. इसलिये कि वह निःसंतान था वह अपनी पत्नी को अपने भाई के लिए छोड़ गया.
- मत्तियाह २२:२६लगभग ३३ ई.
ऐसा ही दूसरे, तीसरे भाई से लेकर सातवें भाई तक होता रहा.
- मत्तियाह २२:२७लगभग ३३ ई.
अंत में उस स्त्री की भी मृत्यु हो गई.
- मत्तियाह २२:२८लगभग ३३ ई.
अब यह बताइए कि पुनरुत्थान पर वह किसकी पत्नी कहलाएगी? क्योंकि उसका विवाह तो उन सबके साथ हुआ था.”
- मत्तियाह २२:२९लगभग ३३ ई.
येशु ने उन्हें उत्तर दिया, “तुम लोग बड़ी भूल कर रहे हो: तुमने न तो पवित्र शास्त्र के लेखों को समझा है और न ही परमेश्वर के सामर्थ्य को.
- मत्तियाह २२:३०लगभग ३३ ई.
पुनरुत्थान में न तो लोग वैवाहिक अवस्था में होंगे और न ही वहां उनके विवाह होंगे. वहां तो वे सभी स्वर्ग के दूतों के समान होंगे.
- मत्तियाह २२:३१लगभग ३३ ई.
मरे हुओं के जी उठने के विषय में क्या आपने पढ़ा नहीं कि परमेश्वर ने आपसे यह कहा था:
- मत्तियाह २२:३२लगभग ३३ ई.
‘मैं ही अब्राहाम का परमेश्वर, यित्सहाक का परमेश्वर तथा याकोब का परमेश्वर हूं’? वह मरे हुओं के नहीं परंतु जीवितों के परमेश्वर हैं.”
- मत्तियाह २२:३३लगभग ३३ ई.
भीड़ उनकी शिक्षा को सुनकर चकित थी.
- मत्तियाह २२:३४लगभग ३३ ई.
जब फ़रीसियों को यह मालूम हुआ कि येशु ने सदूकियों का मुंह बंद कर दिया है, वे स्वयं एकजुट हो गए.
- मत्तियाह २२:३५लगभग ३३ ई.
उनमें से एक व्यवस्थापक ने येशु को परखने की मंशा से उनके सामने यह प्रश्न रखा:
- मत्तियाह २२:३६लगभग ३३ ई.
“गुरुवर, व्यवस्था के अनुसार सबसे बड़ी आज्ञा कौन सी है?”
- मत्तियाह २२:३७लगभग ३३ ई.
येशु ने उसे उत्तर दिया, “तुम प्रभु, अपने परमेश्वर से, अपने सारे हृदय, अपने सारे प्राण तथा अपनी सारी समझ से प्रेम करो.
- मत्तियाह २२:३८लगभग ३३ ई.
यही प्रमुख तथा सबसे बड़ी आज्ञा है.
- मत्तियाह २२:३९लगभग ३३ ई.
ऐसी ही दूसरी सबसे बड़ी आज्ञा है: ‘अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे तुम स्वयं से करते हो.’
- मत्तियाह २२:४०लगभग ३३ ई.
इन्हीं दो आदेशों पर सारी व्यवस्था और भविष्यवाणियां आधारित हैं.”
- मत्तियाह २२:४१लगभग ३३ ई.
वहां इकट्ठा फ़रीसियों के सामने येशु ने यह प्रश्न रखा,
- मत्तियाह २२:४२लगभग ३३ ई.
“मसीह के विषय में क्या मत है आपका—किसकी संतान है वह?” “दावीद की,” उन्होंने उत्तर दिया.
- मत्तियाह २२:४३लगभग ३३ ई.
तब येशु ने उनसे आगे पूछा, “तब फिर पवित्र आत्मा से भरकर दावीद उसे ‘प्रभु’ कहकर संबोधित क्यों करते हैं? दावीद ने कहा है
- मत्तियाह २२:४४लगभग ३३ ई.
“ ‘प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा, “मेरी दायीं ओर बैठे रहो, जब तक मैं तुम्हारे शत्रुओं को तुम्हारे अधीन न कर दूं.” ’
- मत्तियाह २२:४५लगभग ३३ ई.
यदि दावीद मसीह को प्रभु कहकर संबोधित करते हैं तो वह उनकी संतान कैसे हुए?”
- मत्तियाह २२:४६लगभग ३३ ई.
इसके उत्तर में न तो फ़रीसी कुछ कह सके और न ही इसके बाद किसी को भी उनसे कोई प्रश्न करने का साहस हुआ.
- मत्तियाह २३:१लगभग ३३ ई.
इसके बाद येशु ने भीड़ और शिष्यों को संबोधित करते हुए कहा,