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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लूकॉस २३:३५लगभग ३३ ई.

    भीड़ खड़ी हुई यह सब देख रही थी. यहूदी राजा यह कहते हुए प्रभु येशु का ठट्ठा कर रहे थे, “इसने अन्य लोगों की रक्षा की है. यदि यह परमेश्वर का मसीह, उनका चुना हुआ है, तो अब अपनी रक्षा स्वयं कर ले.”

  2. लूकॉस २३:३६लगभग ३३ ई.

    सैनिक भी उनका ठट्ठा किये. वे प्रभु येशु के पास आकर उन्हें घटिया दाखरस प्रस्तुत करके कहे,

  3. लूकॉस २३:३७लगभग ३३ ई.

    “यदि यहूदियों के राजा हो तो स्वयं को बचा लो.”

  4. लूकॉस २३:३८लगभग ३३ ई.

    क्रूस पर उनके सिर के ऊपर सूचना पत्र के रूप में यह लिखा था: यही वह यहूदियों का राजा है.

  5. लूकॉस २३:३९लगभग ३३ ई.

    वहां लटकाए गए राजद्रोहियों में से एक ने प्रभु येशु पर अपशब्दों की बौछार करते हुए कहा: “अरे! क्या तुम मसीह नहीं हो? स्वयं अपने आपको बचाओ और हमको भी!”

  6. लूकॉस २३:४०लगभग ३३ ई.

    किंतु दूसरे राजद्रोही ने डपटते हुए उससे कहा, “क्या तुझे परमेश्वर का थोड़ा भी भय नहीं है? तुझे भी तो वही दंड दिया जा रहा है!

  7. लूकॉस २३:४१लगभग ३३ ई.

    हमारे लिए तो यह दंड सही ही है क्योंकि हमें वही मिल रहा है, जो हमारे बुरे कामों के लिए सही है किंतु इन्होंने तो कुछ भी गलत नहीं किया.”

  8. लूकॉस २३:४२लगभग ३३ ई.

    तब प्रभु येशु की ओर देखकर उसने उनसे विनती की, “आदरणीय येशु! अपने राज्य में मुझ पर दया कीजिएगा.”

  9. लूकॉस २३:४३लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने उसे आश्वासन दिया, “मैं तुम पर यह सच्चाई प्रकट कर रहा हूं: आज ही तुम मेरे साथ स्वर्गलोक में होगे.”

  10. लूकॉस २३:४४लगभग ३३ ई.

    यह दिन का मध्याह्न था. सारे क्षेत्र पर अंधकार छा गया और यह तीन बजे तक छाया रहा.

  11. लूकॉस २३:४५लगभग ३३ ई.

    सूर्य अंधियारा हो गया, मंदिर का पर्दा फटकर दो भागों में बांट दिया गया.

  12. लूकॉस २३:४६लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु ने ऊंचे शब्द में पुकारते हुए कहा, “पिता! मैं अपनी आत्मा आपके हाथों में सौंपता हूं.” यह कहते हुए उन्होंने प्राण त्याग दिए.

  13. लूकॉस २३:४७लगभग ३३ ई.

    वह शताधिपति, जो यह सब देख रहा था, यह कहते हुए परमेश्वर की वंदना करने लगा, “सचमुच यह व्यक्ति निर्दोष था.”

  14. लूकॉस २३:४८लगभग ३३ ई.

    इस घटना को देखने के लिए इकट्ठा भीड़ यह सब देख छाती पीटकर विलाप करती हुई घर लौट गयी.

  15. लूकॉस २३:४९लगभग ३३ ई.

    प्रभु येशु के परिचित और गलील प्रदेश से प्रभु येशु के साथ आई स्त्रियां कुछ दूर खड़ी हुई ये सब देख रही थी.

  16. लूकॉस २३:५०लगभग ३३ ई.

    योसेफ़ नामक एक व्यक्ति थे. वह महासभा के सदस्य, सज्जन तथा धर्मी थे.

  17. लूकॉस २३:५१लगभग ३३ ई.

    वह न तो यहूदी अगुओं की योजना से और न ही उसके कामों से सहमत थे. योसेफ़ यहूदियों के एक नगर अरिमथिया के निवासी थे और वह परमेश्वर के राज्य की प्रतीक्षा कर रहे थे.

  18. लूकॉस २३:५२लगभग ३३ ई.

    योसेफ़ ने पिलातॉस के पास जाकर प्रभु येशु का शरीर के लिए विनती की.

  19. लूकॉस २३:५३लगभग ३३ ई.

    उन्होंने शरीर को क्रूस से उतारकर मलमल के वस्त्र में लपेटा और चट्टान में खोदकर बनाई गई एक कब्र की गुफ़ा में रख दिया. इस कब्र में अब तक कोई भी शरीर रखा नहीं गया था.

  20. लूकॉस २३:५४लगभग ३३ ई.

    यह शब्बाथ की तैयारी का दिन था. शब्बाथ प्रारंभ होने पर ही था.

  21. लूकॉस २३:५५लगभग ३३ ई.

    गलील प्रदेश से आई हुई स्त्रियां भी उनके साथ वहां गईं. उन्होंने उस कब्र को देखा तथा यह भी कि शरीर को वहां कैसे रखा गया था.

  22. लूकॉस २३:५६लगभग ३३ ई.

    तब वे सब घर लौट गए और उन्होंने अंत्येष्टि के लिए उबटन-लेप तैयार किए. व्यवस्था के अनुसार उन्होंने शब्बाथ पर विश्राम किया.

  23. लूकॉस २४:१लगभग ३३ ई.

    सप्‍ताह के प्रथम दिन पौ फटते ही वे तैयार किए गए उबटन-लेपों को लेकर कंदरा-क़ब्र पर आईं.

  24. लूकॉस २४:२लगभग ३३ ई.

    उन्होंने कब्र के द्वार का पत्थर कब्र से लुढ़का हुआ पाया

  25. लूकॉस २४:३लगभग ३३ ई.

    किंतु जब उन्होंने कब्र की गुफ़ा में प्रवेश किया, वहां प्रभु येशु का शरीर नहीं था.