circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- लूकॉस २४:२९लगभग ३३ ई.
किंतु उन शिष्यों ने विनती की, “हमारे साथ ही ठहर जाइए क्योंकि दिन ढल चला है और शाम होने को है.” इसलिये प्रभु येशु उनके साथ भीतर चले गए.
- लूकॉस २४:३०लगभग ३३ ई.
जब वे सब भोजन के लिए बैठे, प्रभु येशु ने रोटी लेकर आशीर्वाद के साथ उसे तोड़ा और उन्हें दे दिया.
- लूकॉस २४:३१लगभग ३३ ई.
तब उनकी आंखों को देखने लायक बना दिया गया और वे प्रभु येशु को पहचान गए किंतु उसी क्षण प्रभु येशु उनकी आंखों से ओझल हो गए.
- लूकॉस २४:३२लगभग ३३ ई.
वे आपस में विचार करने लगे, “मार्ग में जब वह हमसे बातचीत कर रहे थे और पवित्र शास्त्र की व्याख्या कर रहे थे तो हमारे मन में उत्तेजना हुई थी न!”
- लूकॉस २४:३३लगभग ३३ ई.
तत्काल ही वे उठे और येरूशलेम को लौट गए. वहां उन्होंने ग्यारह शिष्यों और अन्यों को, जो वहां इकट्ठा थे, यह कहते पाया,
- लूकॉस २४:३४लगभग ३३ ई.
“हां, यह सच है! प्रभु मरे हुओं में से दोबारा जीवित हो गए हैं और शिमओन को दिखाई भी दिए हैं.”
- लूकॉस २४:३५लगभग ३३ ई.
तब इन दो शिष्यों ने भी मार्ग में हुई घटना का ब्यौरा सुनाया कि किस प्रकार भोजन करते समय वे प्रभु येशु को पहचानने में समर्थ हो गए थे.
- लूकॉस २४:३६लगभग ३३ ई.
जब वे इस बारे में बातें कर ही रहे थे, स्वयं प्रभु येशु उनके बीच आ खड़े हुए और उनसे बोले, “तुममें शांति बनी रहे.”
- लूकॉस २४:३७लगभग ३३ ई.
वे अचंभित और भयभीत हो गए और उन्हें लगा कि वे किसी दुष्टात्मा को देख रहे हैं.
- लूकॉस २४:३८लगभग ३३ ई.
प्रभु येशु ने उनसे कहा, “तुम घबरा क्यों हो रहे हो? क्यों उठ रहे हैं तुम्हारे मन में ये संदेह?
- लूकॉस २४:३९लगभग ३३ ई.
देखो, ये मेरे हाथ और पांव. यह मैं ही हूं. मुझे स्पर्श करके देख लो क्योंकि दुष्टात्मा के हाड़-मांस नहीं होता, जैसा तुम देख रहे हो कि मेरे हैं.”
- लूकॉस २४:४०लगभग ३३ ई.
यह कहकर उन्होंने उन्हें अपने हाथ और पांव दिखाए
- लूकॉस २४:४१लगभग ३३ ई.
और जब वे आश्चर्य और आनंद की स्थिति में विश्वास नहीं कर पा रहे थे, प्रभु येशु ने उनसे प्रश्न किया, “क्या यहां कुछ भोजन है?”
- लूकॉस २४:४२लगभग ३३ ई.
उन्होंने प्रभु येशु को भूनी हुई मछली का एक टुकड़ा दिया
- लूकॉस २४:४३लगभग ३३ ई.
और प्रभु येशु ने उसे लेकर उनके सामने खाया.
- लूकॉस २४:४४लगभग ३३ ई.
तब प्रभु येशु ने उनसे कहा, “तुम्हारे साथ रहते हुए मैंने तुम लोगों से यही कहा था: वह सब पूरा होना ज़रूरी है, जो मेरे विषय में मोशेह की व्यवस्था, भविष्यद्वक्ताओं के लेख तथा भजन की पुस्तकों में लिखा गया है.”
- लूकॉस २४:४५लगभग ३३ ई.
तब प्रभु येशु ने उनकी समझ खोल दी कि वे पवित्र शास्त्र को समझ सकें
- लूकॉस २४:४६लगभग ३३ ई.
और उनसे कहा, “यह लिखा है कि मसीह यातनाएं सहे और तीसरे दिन मरे हुओं में से दोबारा जीवित किया जाए,
- लूकॉस २४:४७लगभग ३३ ई.
और येरूशलेम से प्रारंभ कर सभी राष्ट्रों में उसके नाम में पाप क्षमा के लिए पश्चाताप की घोषणा की जाए.
- लूकॉस २४:४८लगभग ३३ ई.
तुम सभी इन घटनाओं के गवाह हो.
- लूकॉस २४:४९लगभग ३३ ई.
जिसकी प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है, उसे मैं तुम्हारे लिए भेजूंगा किंतु आवश्यक यह है कि तुम येरूशलेम में उस समय तक ठहरे रहो, जब तक स्वर्ग से भेजी गई सामर्थ्य से परिपूर्ण न हो जाओ.”
- लूकॉस २४:५०लगभग ३३ ई.
तब प्रभु येशु उन्हें बैथनियाह नामक गांव तक ले गए और अपने हाथ उठाकर उन्हें आशीष दी.
- लूकॉस २४:५१लगभग ३३ ई.
जब वह उन्हें आशीष दे ही रहे थे वह उनसे विदा हो गए और स्वर्ग में उठा लिये गये.
- लूकॉस २४:५२लगभग ३३ ई.
तब उन्होंने येशु की आराधना की और बहुत ही आनंद में येरूशलेम लौट गए.
- लूकॉस २४:५३लगभग ३३ ई.
वे मंदिर में नियमित रूप से परमेश्वर की स्तुति करते रहते थे.