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Tribe Of Ephraim के बारे में बाइबल के वचन

46 वचन · 30 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. सातवें दिन अम्मीहूद के पुत्र एलीशामा ने जो एफ्राईम गोत्र का प्रधान था, भेंट चढ़ाई.

  2. उसने पवित्र स्थान की तौल के अनुसार एक सौ तीस शेकेल चांदी की परात तथा सत्तर शेकेल चांदी का कटोरा तथा सत्तर शेकेल चांदी की कटोरी में तेल मिला हुआ मैदा

  3. दस शेकेल सोने के धूपदान में सुगंधित धूप;

  4. होमबलि के लिए एक बछड़ा, एक मेढ़ा, एक वर्ष का एक नर मेमना;

  5. पापबलि के लिए एक बकरा;

  6. मेल बलि चढ़ाने के लिए दो बछड़े, पांच मेढ़े, पांच बकरे, एक वर्ष के पांच नर मेमने चढ़ाए. यह अम्मीहूद के पुत्र एलीशामा द्वारा चढ़ाई गई थी.

  7. योसेफ़ के संबंध में मोशेह ने कहा: “याहवेह द्वारा उसका देश समृद्धि प्राप्‍त करता जाए, स्वर्ग की सर्वोत्तम वस्तुओं और ओस के द्वारा, और वह जल जो पृथ्वी की गहराई से उत्पन्‍न होता है;

  8. सूर्य के प्रभाव से उत्पन्‍न उत्तम फल, और ऋतुओं में प्राप्‍त उत्तम उपज;

  9. सदा से प्रतिष्ठित पर्वतों से प्राप्‍त फल और सदा की पहाड़ियों से प्राप्‍त सर्वोत्तम वस्तुएं;

  10. पृथ्वी की भरपूरी में से सर्वोत्तम वस्तुएं, और उनकी कृपादृष्टि, जो जलती हुई झाड़ी में प्रकट हुई. यह सब योसेफ़ के सिर पर उतर जाए, उसके सिर पर जो अपने भाइयों से अधिक यशस्वी हुआ.

  11. उसका वैभव वैसा ही है, जैसा सांड़ के पहिलौठे का; उसके सींग जंगली सांड़ के सींगों समान हैं. इनके प्रयोग से वह राष्ट्रों को घायल करेगा, उन्हें एक ही समय पर पृथ्वी के छोर तक हकाल देगा. ये ही हैं एफ्राईम के दस हज़ार; यही हैं मनश्शेह के हज़ार.”

  12. उनके परिवारों के अनुसार एफ्राईम वंश के मीरास की सीमाएं इस प्रकार थी: पूर्व में उनकी सीमा अटारोथ-अद्दार से लेकर उच्चतर बेथ-होरोन तक थी.

  13. यह सीमा पश्चिम की ओर बढ़ती गई: जो उत्तर में मिकमथाथ, फिर पूर्व में तानथ-शिलोह की ओर मुड़ गई, फिर बढ़ते हुए यानोहा में जा पहुंची.

  14. यानोहा से दक्षिण की ओर बढ़ते हुए अटारोथ और नाराह पहुंचकर येरीख़ो पहुंच गई और वहां से निकलकर यरदन पर खत्म हुई.

  15. फिर तप्पूआह से यह सीमा पश्चिम में कानाह नदी की और बढ़ जाती है और भूमध्य-सागर पर जाकर मिल जाती है. एफ्राईम गोत्र के परिवारों के अनुसार उनका हिस्सा यही है,

  16. इसके अलावा कुछ ऐसे गांव एवं नगर भी हैं, जो मनश्शेह की विरासत की सीमा के अंदर थे, जो एफ्राईम वंश को दे दिए गए थे.

  17. इसी तरह योसेफ़ के परिवार ने बेथेल पर हमला कर दिया. याहवेह उनकी ओर थे.

  18. योसेफ़ के परिवार ने बेथेल का भेद लिया. बेथेल नगर का पुराना नाम लूज़ था.

  19. भेद लेने गए जासूसों ने नगर से बाहर आ रहे एक व्यक्ति को देखा. उन्होंने उससे विनती की, “कृपया हमें नगर में जाने का रास्ता दिखाएं. हम तुम पर कृपा करेंगे.”

  20. सो उसने उन्हें नगर में जाने का रास्ता दिखा दिया. उन्होंने पूरे नगर को तलवार से मार दिया, मगर उस व्यक्ति और उसके परिवार को छोड़ दिया.

  21. एफ्राईमवासियों ने गिदोन से कहा, “आपने हमारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया?” आपने मिदियानियों से युद्ध के लिए अपने साथ चलने के लिए हमें आमंत्रित ही नहीं किया! वे गुस्से में गिदोन से विवाद करते रहे.

  22. किंतु गिदोन ने उन्हें उत्तर दिया, “आप लोगों ने जो किया है, उसकी तुलना में मेरा किया हुआ कुछ भी नहीं है. क्या यह सच नहीं कि भूमि पर से बीने गए एफ्राईम के अंगूर अबीएज़ेर की लता से तोड़े गए अंगूरों से गुणों में कहीं ज्यादा अच्छे होते हैं?

  23. परमेश्वर ने मिदियान के शासक ओरेब तथा ज़ेब को तुम्हें सौंप दिया हैं. आप लोगों की तुलना में मैंने किया ही क्या है?” इस पर गिदोन के विरुद्ध उनका क्रोध शांत हो गया.

  24. तब एफ्राईमवासियों ने सेना इकट्ठा किया. उन्होंने ज़ेफोन जाकर यिफ्ताह से यह कहके झगड़ा किया, “क्या मतलब था आपका हमें अपने साथ लिए बिना अम्मोन वंशजों से युद्ध के लिए जाने का? हम आपके साथ आपके घर में आग लगा देंगे.”

  25. यिफ्ताह ने उन्हें उत्तर दिया, “अम्मोन वंशजों के साथ मेरा और मेरे साथियों का बड़ा झगड़ा हो गया था. मैंने आपको बुलाया तो था, किंतु आपने आकर मुझे उनसे नहीं छुड़ाया.