circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- योहन ७:४२लगभग ३३ ई.
क्या पवित्र शास्त्र के अनुसार मसीह का आना दावीद के वंश और उनके नगर बेथलेहेम से न होगा?”
- योहन ७:४३लगभग ३३ ई.
इस प्रकार मसीह येशु के कारण भीड़ में मतभेद हो गया.
- योहन ७:४४लगभग ३३ ई.
कुछ उन्हें बंदी बनाना चाहते थे फिर भी किसी ने भी उन पर हाथ न डाला.
- योहन ७:४५लगभग ३३ ई.
संतरियों के लौटने पर प्रधान पुरोहितों और फ़रीसियों ने उनसे पूछा, “तुम उसे लेकर क्यों नहीं आए?”
- योहन ७:४६लगभग ३३ ई.
संतरियों ने उत्तर दिया, “ऐसा बतानेवाला हमने आज तक नहीं सुना.”
- योहन ७:४७लगभग ३३ ई.
तब फ़रीसियों ने कटाक्ष किया, “कहीं तुम भी तो उसके बहकावे में नहीं आ गए?
- योहन ७:४८लगभग ३३ ई.
क्या प्रधानों या फ़रीसियों में से किसी ने भी उसमें विश्वास किया है?
- योहन ७:४९लगभग ३३ ई.
व्यवस्था से अज्ञान भीड़ तो वैसे ही शापित है.”
- योहन ७:५०लगभग ३३ ई.
तब निकोदेमॉस ने, जो प्रधानों में से एक थे तथा मसीह येशु से पहले मिल चुके थे, उनसे कहा,
- योहन ७:५१लगभग ३३ ई.
“क्या हमारी व्यवस्था किसी व्यक्ति की सुने बिना और उसकी गतिविधि जाने बिना उसे अपराधी घोषित करती है?”
- योहन ७:५२लगभग ३३ ई.
इस पर उन्होंने निकोदेमॉस से पूछा, “कहीं तुम भी तो गलीली नहीं हो? शास्त्रों का मनन करो और देखो कि किसी भी भविष्यवक्ता का आना गलील प्रदेश से नहीं होता.”
- योहन ७:५३लगभग ३३ ई.
[वे सभी अपने-अपने घर लौट गएं].
- योहन ८:१लगभग ३३ ई.
और येशु जैतून पर्वत पर चले गये.
- योहन ८:२लगभग ३३ ई.
भोर को वह दोबारा मंदिर में आए और लोगों के मध्य बैठकर उनको शिक्षा देने लगे.
- योहन ८:३लगभग ३३ ई.
उसी समय फ़रीसियों व शास्त्रियों ने व्यभिचार के कार्य में पकड़ी गई एक स्त्री को लाकर मध्य में खड़ा कर दिया
- योहन ८:४लगभग ३३ ई.
और मसीह येशु से प्रश्न किया, “गुरु, यह स्त्री व्यभिचार करते हुए पकड़ी गई है.
- योहन ८:५लगभग ३३ ई.
मोशेह ने व्यवस्था में हमें ऐसी स्त्रियों को पथराव द्वारा मार डालने की आज्ञा दी है; किंतु आप क्या कहते हैं?”
- योहन ८:६लगभग ३३ ई.
उन्होंने मसीह येशु को परखने के लिए यह प्रश्न किया था कि उन पर आरोप लगाने के लिए उन्हें कोई आधार मिल जाए. किंतु मसीह येशु झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगे.
- योहन ८:७लगभग ३३ ई.
जब वे मसीह येशु से बार-बार प्रश्न करते रहे, मसीह येशु ने सीधे खड़े होकर उनसे कहा, “तुममें से जिस किसी ने कभी कोई पाप न किया हो, वही उसे सबसे पहला पत्थर मारे.”
- योहन ८:८लगभग ३३ ई.
और वह दोबारा झुककर भूमि पर लिखने लगे.
- योहन ८:९लगभग ३३ ई.
यह सुनकर वरिष्ठ से प्रारंभ कर एक-एक करके सब वहां से चले गए—केवल वह स्त्री और मसीह येशु ही वहां रह गए.
- योहन ८:१०लगभग ३३ ई.
मसीह येशु ने सीधे खड़े होते हुए स्त्री की ओर देखकर उससे पूछा, “हे स्त्री! वे सब कहां हैं? क्या तुम्हें किसी ने भी दंडित नहीं किया?”
- योहन ८:११लगभग ३३ ई.
उसने उत्तर दिया, “किसी ने भी नहीं, प्रभु.” मसीह येशु ने उससे कहा, “मैं भी तुम्हें दंडित नहीं करता. जाओ, अब फिर पाप न करना.”
- योहन ८:१२लगभग ३३ ई.
मंदिर में अपनी शिक्षा को दोबारा आरंभ करते हुए मसीह येशु ने लोगों से कहा, “संसार की ज्योति मैं ही हूं. जो कोई मेरे पीछे चलता है, वह अंधकार में कभी न चलेगा क्योंकि जीवन की ज्योति उसी में बसेगी.”
- योहन ८:१३लगभग ३३ ई.
तब फ़रीसियों ने उनसे कहा, “तुम अपने ही विषय में गवाही दे रहे हो इसलिये तुम्हारी गवाही स्वीकार नहीं की जा सकती है.”