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circa 1446 BC

Sinai & The Law

God meets Israel at Mount Sinai, reveals the Ten Commandments, and establishes the Tabernacle and the priestly covenant.

1,657 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. निर्गमन ३५:१७लगभग १४९१ ई.पू.

    आंगन के लिए पर्दा, खंभे और कुर्सियां, और आंगन के द्वार का पर्दा;

  2. निर्गमन ३५:१८लगभग १४९१ ई.पू.

    निवास और आंगन दोनों की खूंटियां तथा रस्सियां;

  3. निर्गमन ३५:१९लगभग १४९१ ई.पू.

    पवित्र स्थान में सेवा के अवसर पर बुने हुए वस्त्र, अहरोन तथा उनके पुत्रों के लिए पवित्र वस्त्र, जो पुरोहित के पद पर कार्य करते समय पहना जायेगा.”

  4. निर्गमन ३५:२०लगभग १४९१ ई.पू.

    इसके बाद इस्राएल के सारे लोग मोशेह के पास से चले गये.

  5. निर्गमन ३५:२१लगभग १४९१ ई.पू.

    जिसका मन आनंद से भर गया वे अपनी इच्छा से मिलनवाले तंबू के बनाने के कार्य के लिये और सेवकाई में और पवित्र वस्त्र बनाने के लिए याहवेह के लिए भेंट लाने लगे.

  6. निर्गमन ३५:२२लगभग १४९१ ई.पू.

    तब वे सभी स्त्री-पुरुष, अपनी इच्छा से अपने-अपने गहने, नथुनी, अंगूठी, कंगन और सोने के गहने लाए और हर एक पुरुष ने याहवेह को सोना भेंट किया.

  7. निर्गमन ३५:२३लगभग १४९१ ई.पू.

    हर व्यक्ति, जिसके पास नीले बैंगनी तथा लाल वस्त्र, बकरे के रोम, लाल रंग में रंगी गई मेढ़े की खाल तथा सूंस की खाल थी, सब ले आए.

  8. निर्गमन ३५:२४लगभग १४९१ ई.पू.

    और जो चांदी तथा कांसे भेंट करना चाहते थे उन्होंने याहवेह के लिए वह दी, जिनके पास बबूल की लकड़ी थी, जो सेवकाई में काम आ सके उन्होंने वही दिया.

  9. निर्गमन ३५:२५लगभग १४९१ ई.पू.

    प्रत्येक निपुण स्त्रियां अपने हाथों से कात कर जो उनके पास था उसे ले आईं—नीले, बैंगनी तथा लाल सूत और सन,

  10. निर्गमन ३५:२६लगभग १४९१ ई.पू.

    और जो स्त्रियां इच्छुक थीं और कातने में निपुण थीं, उन्होंने बकरे के रोम के सूत काते.

  11. निर्गमन ३५:२७लगभग १४९१ ई.पू.

    प्रधान जन सुलेमानी गोमेद और दूसरे वे सारे रत्न जो एफ़ोद और सीनाबंद के लिये थे, वे ले आये.

  12. निर्गमन ३५:२८लगभग १४९१ ई.पू.

    लोग सुगंध द्रव्य और जैतून का तेल दीपकों के लिए, अभिषेक के तेल के लिए तथा सुगंधित धूप बनाने के लिए ले आए.

  13. निर्गमन ३५:२९लगभग १४९१ ई.पू.

    सभी इस्राएली स्त्री-पुरुष जिनकी इच्छा थी, याहवेह के लिये मोशेह को दी गई आज्ञा के अनुसार सारे कार्य करने के लिये याहवेह के लिए भेंट लाए.

  14. निर्गमन ३५:३०लगभग १४९१ ई.पू.

    तब मोशेह ने इस्राएलियों से कहा, “सुनो, याहवेह ने यहूदाह गोत्र से हूर के पौत्र उरी के पुत्र बसलेल को चुना है,

  15. निर्गमन ३५:३१लगभग १४९१ ई.पू.

    और परमेश्वर ने उन्हें अपने आत्मा से प्रवीणता, समझ, बुद्धि और सब कामों की समझ देकर भर दिया है.

  16. निर्गमन ३५:३२लगभग १४९१ ई.पू.

    ताकि वह सोना, चांदी एवं कांसे पर कलात्मक रचना कर सकें,

  17. निर्गमन ३५:३३लगभग १४९१ ई.पू.

    और जड़ने के उद्देश्य से पत्थर काटने में कुशल तथा लकड़ी के खोदने में बुद्धि से कलाकारी का काम कर सकें.

  18. निर्गमन ३५:३४लगभग १४९१ ई.पू.

    याहवेह ने बसलेल तथा दान के गोत्र के अहीसामक के पुत्र ओहोलियाब को दूसरों को सिखाने की शक्ति दी.

  19. निर्गमन ३५:३५लगभग १४९१ ई.पू.

    याहवेह ने उन्हें कौशल से भर दिया है कि वह एक कारीगर के किए जानेवाले सारे कामों को कर सके; खोदने, गढ़ने, नीले, बैंगनी तथा लाल रंग के मलमल पर कशीदाकारी करने और बुनने वाले वस्त्र को नए-नए तरीके से बनाएं.

  20. निर्गमन ३६:१लगभग १४९१ ई.पू.

    बसलेल, ओहोलियाब और उन सारे लोगों को जिन्हें याहवेह ने कौशल, समझ, बुद्धि और ज्ञान दिया है कि वह पवित्र स्थान को बनाने के कार्य को कैसे करना है. वे उन कामों को उसी प्रकार से करेंगे जैसे याहवेह ने आज्ञा दी है.”

  21. निर्गमन ३६:२लगभग १४९१ ई.पू.

    तब मोशेह ने बसलेल, ओहोलियाब और उन सारे लोगों को जिन्हें याहवेह ने कौशल दिया, और जो अपनी इच्छा से सेवकाई करना चाहते थे, बुलवाया.

  22. निर्गमन ३६:३लगभग १४९१ ई.पू.

    इन्होंने मोशेह से इस्राएलियों द्वारा पवित्र स्थान को बनाने के लिये जो भी भेंट लाई गई थी, उन चीज़ों को लिया, और लोग सुबह दर सुबह स्वेच्छा से वस्तुएं लाते गये.

  23. निर्गमन ३६:४लगभग १४९१ ई.पू.

    पवित्र स्थान को बनाने में जितने भी योग्य कारीगर थे वह अपने कार्य को छोड़ मोशेह के पास आये.

  24. निर्गमन ३६:५लगभग १४९१ ई.पू.

    उन्होंने मोशेह से कहा, “पवित्र स्थान, जैसे याहवेह ने कहा है, वैसे बनाने में जितने सामान की ज़रूरत थी, लोग उससे कहीं ज्यादा हमारे पास ला रहे हैं.”

  25. निर्गमन ३६:६लगभग १४९१ ई.पू.

    तब मोशेह ने आज्ञा दी और इस बात की पूरी छावनी में घोषणा हुई कि कोई भी स्त्री या पुरुष अब पवित्र स्थान के लिये भेंट स्वरूप कुछ न लाये. इस प्रकार लोगों को कुछ और न लाने के लिये पाबंद किया गया.