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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. इब्री ७:१७लगभग ६४ ई.

    क्योंकि इस विषय में मसीह येशु से संबंधित यह पुष्टि की गई: “तुम मेलखीज़ेदेक की श्रृंखला में, एक अनंत काल के पुरोहित हो.”

  2. इब्री ७:१८लगभग ६४ ई.

    एक ओर पहली आज्ञा का बहिष्कार उसकी दुर्बलता तथा निष्फलता के कारण कर दिया गया.

  3. इब्री ७:१९लगभग ६४ ई.

    क्योंकि व्यवस्था सिद्धता की स्थिति लाने में असफल रहीं—दूसरी ओर अब एक उत्तम आशा का उदय हो रहा है, जिसके द्वारा हम परमेश्वर की उपस्थिति में पहुंचते हैं.

  4. इब्री ७:२०लगभग ६४ ई.

    यह सब शपथ लिए बिना नहीं हुआ. वास्तव में पुरोहितों की नियुक्ति बिना किसी शपथ के होती थी

  5. इब्री ७:२१लगभग ६४ ई.

    किंतु मसीह की नियुक्ति उनकी शपथ के द्वारा हुई, जिन्होंने उनके विषय में कहा: “प्रभु ने शपथ ली है और वह अपना विचार परिवर्तित नहीं करेंगे: ‘तुम अनंत काल के पुरोहित हो.’ ”

  6. इब्री ७:२२लगभग ६४ ई.

    इसका मतलब यह हुआ कि मसीह येशु एक उत्तम वाचा के जमानतदार बन गए हैं.

  7. इब्री ७:२३लगभग ६४ ई.

    एक पूर्व में पुरोहितों की संख्या ज्यादा होती थी क्योंकि हर एक पुरोहित की मृत्यु के साथ उसकी सेवा समाप्‍त हो जाती थी;

  8. इब्री ७:२४लगभग ६४ ई.

    किंतु दूसरी ओर मसीह येशु, इसलिये कि वह अनंत काल के हैं, अपने पद पर स्थायी हैं.

  9. इब्री ७:२५लगभग ६४ ई.

    इसलिये वह उनके उद्धार के लिए सामर्थ्यी हैं, जो उनके माध्यम से परमेश्वर के पास आते हैं क्योंकि वह अपने विनती करनेवालों के पक्ष में पिता के सामने निवेदन प्रस्तुत करने के लिए सदा-सर्वदा जीवित हैं.

  10. इब्री ७:२६लगभग ६४ ई.

    हमारे पक्ष में सही यह था कि हमारे महापुरोहित पवित्र, निर्दोष, त्रुटिहीन, पापियों से अलग किए हुए तथा स्वर्ग से भी अधिक ऊंचे हों.

  11. इब्री ७:२७लगभग ६४ ई.

    इन्हें प्रतिदिन, पहले तो स्वयं के पापों के लिए, इसके बाद लोगों के पापों के लिए बलि भेंट करने की ज़रूरत ही नहीं थी क्योंकि इसकी पूर्ति उन्होंने एक ही बार अपने आपको बलि के रूप में भेंट कर हमेशा के लिए कर दी.

  12. इब्री ७:२८लगभग ६४ ई.

    व्यवस्था, महापुरोहितों के रूप में मनुष्यों को चुनता है, जो मानवीय दुर्बलताओं में सीमित होते हैं किंतु शपथ के वचन ने, जो व्यवस्था के बाद प्रभावी हुई, एक पुत्र को चुना, जिन्हें अनंत काल के लिए सिद्ध बना दिया गया.

  13. इब्री ८:१लगभग ६४ ई.

    बड़ी सच्चाई यह है: हमारे महापुरोहित वह हैं, जो स्वर्ग में महामहिम के दायें पक्ष में बैठे हैं,

  14. इब्री ८:२लगभग ६४ ई.

    जो वास्तविक मंदिर में सेवारत हैं, जिसका निर्माण किसी मानव ने नहीं, स्वयं प्रभु ने किया है.

  15. इब्री ८:३लगभग ६४ ई.

    हर एक महापुरोहित का चुनाव भेंट तथा बलि अर्पण के लिए किया जाता है. इसलिये आवश्यक हो गया कि इस महापुरोहित के पास भी अर्पण के लिए कुछ हो.

  16. इब्री ८:४लगभग ६४ ई.

    यदि मसीह येशु पृथ्वी पर होते, वह पुरोहित हो ही नहीं सकते थे क्योंकि यहां व्यवस्था के अनुसार भेंट चढ़ाने के लिए पुरोहित हैं.

  17. इब्री ८:५लगभग ६४ ई.

    ये वे पुरोहित हैं, जो स्वर्गीय वस्तुओं के प्रतिरूप तथा प्रतिबिंब मात्र की आराधना करते हैं, क्योंकि मोशेह को, जब वह तंबू का निर्माण करने पर थे, परमेश्वर के द्वारा यह चेतावनी दी गई थी: यह ध्यान रखना कि तुम तंबू का निर्माण ठीक-ठीक वैसा ही करो, जैसा तुम्हें पर्वत पर दिखाया गया था,

  18. इब्री ८:६लगभग ६४ ई.

    किंतु अब मसीह येशु ने अन्य पुरोहितों की तुलना में कहीं अधिक अच्छी सेवकाई प्राप्‍त कर ली है: अब वह एक उत्तम वाचा के मध्यस्थ भी हैं, जिसका आदेश उत्तम प्रतिज्ञाओं पर हुआ है.

  19. इब्री ८:७लगभग ६४ ई.

    यदि वह पहली वाचा निर्दोष होती तो दूसरी की ज़रूरत ही न होती.

  20. इब्री ८:८लगभग ६४ ई.

    स्वयं परमेश्वर ने उस पीढ़ी को दोषी पाकर यह कहा: “यह देख लेना, वे दिन आ रहे हैं, यह प्रभु की वाणी है, जब मैं इस्राएल वंश के साथ तथा यहूदाह गोत्र के साथ एक नयी वाचा स्थापित करूंगा.

  21. इब्री ८:९लगभग ६४ ई.

    वैसी नहीं, जैसी मैंने उनके पूर्वजों से उस समय की थी, जब मैंने उनका हाथ पकड़कर उन्हें मिस्र देश से बाहर निकाला था, क्योंकि वे मेरी वाचा में स्थिर नहीं रहे, इसलिये मैं उनसे दूर हो गया, यह प्रभु का कहना है.

  22. इब्री ८:१०लगभग ६४ ई.

    किंतु मैं इस्राएल के लोगों के साथ यह वाचा बांधूंगा यह प्रभु का कथन है उन दिनों के बाद मैं अपना नियम उनके हृदय में लिखूंगा और उनके मस्तिष्क पर अंकित कर दूंगा. मैं उनका परमेश्वर हो जाऊंगा, तथा वे मेरी प्रजा.

  23. इब्री ८:११लगभग ६४ ई.

    तब हर एक व्यक्ति अपने पड़ोसी को शिक्षा नहीं देंगे, हर एक व्यक्ति अपने सजातीय को पुनः यह नहीं कहेगा, ‘प्रभु को जान लो,’ क्योंकि वे सभी मुझे जान जाएंगे, छोटे से बड़े तक, यह प्रभु की वाणी है.

  24. इब्री ८:१२लगभग ६४ ई.

    क्योंकि मैं उनकी पापिष्ठता क्षमा कर दूंगा तथा इसके बाद उनका पाप मैं पुनः स्मरण ही न करूंगा.”

  25. इब्री ८:१३लगभग ६४ ई.

    जब परमेश्वर एक “नई” वाचा का वर्णन कर रहे थे, तब उन्होंने पहले को अनुपयोगी घोषित कर दिया. जो कुछ अनुपयोगी तथा जीर्ण हो रहा है, वह नष्ट होने पर है.