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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. इफ़ेसॉस ५:२७लगभग ६४ ई.

    कि उसे अपने लिए ऐसी तेजस्वी कलीसिया बनाकर पेश करें जिसमें न कोई कलंक, न कोई झुर्री, न ही इनके जैसा कोई दोष हो परंतु वह पवित्र व निष्कलंक हो.

  2. इफ़ेसॉस ५:२८लगभग ६४ ई.

    इसी प्रकार, पति के लिए उचित है कि वह अपनी पत्नी से वैसे ही प्रेम करे जैसे अपने शरीर से करता है. वह, जो अपनी पत्नी से प्रेम करता है, स्वयं से प्रेम करता. है

  3. इफ़ेसॉस ५:२९लगभग ६४ ई.

    क्योंकि कोई भी अपने शरीर से घृणा नहीं करता परंतु स्नेहपूर्वक उसका पोषण करता है, जिस प्रकार मसीह कलीसिया का करते हैं,

  4. इफ़ेसॉस ५:३०लगभग ६४ ई.

    “क्योंकि हम उनके शरीर के अंग हैं.

  5. इफ़ेसॉस ५:३१लगभग ६४ ई.

    इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा तथा वे दोनों एक देह होंगे”

  6. इफ़ेसॉस ५:३२लगभग ६४ ई.

    यह एक गहरा भेद है और मैं यह मसीह और कलीसिया के संदर्भ में उपयोग कर रहा हूं.

  7. इफ़ेसॉस ५:३३लगभग ६४ ई.

    फिर भी, तुममें से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम करें और पत्नी अपने पति का सम्मान करे.

  8. इफ़ेसॉस ६:१लगभग ६४ ई.

    हे बालको, प्रभु में अपने माता-पिता का आज्ञापालन करें क्योंकि उचित यही है.

  9. इफ़ेसॉस ६:२लगभग ६४ ई.

    “अपने माता-पिता का सम्मान करो”—आज्ञाओं में से यह ऐसी पहली आज्ञा है जिसके साथ प्रतिज्ञा जुड़ी है,

  10. इफ़ेसॉस ६:३लगभग ६४ ई.

    “तुम्हारा भला हो और तुम पृथ्वी पर बहुत दिन तक जीवित रहो.”

  11. इफ़ेसॉस ६:४लगभग ६४ ई.

    तुममें जो पिता हैं, अपनी संतान को क्रोध न दिलाएं, परंतु प्रभु की शिक्षा व अनुशासन में उनका पालन पोषण करें.

  12. इफ़ेसॉस ६:५लगभग ६४ ई.

    जो दास हैं, अपने सांसारिक स्वामियों का आज्ञापालन सच्चाई से व एकचित्त होकर ऐसे करें मानो मसीह का.

  13. इफ़ेसॉस ६:६लगभग ६४ ई.

    यह सब मात्र दिखावे के लिए व उन्हें प्रसन्‍न करने के उद्देश्य मात्र से नहीं परंतु मसीह के दास के रूप में हृदय से परमेश्वर की इच्छा की पूर्ति करते हुए हो.

  14. इफ़ेसॉस ६:७लगभग ६४ ई.

    सच्चे हृदय से स्वामियों की सेवा इस प्रकार करते रहो मानो मनुष्य मात्र की नहीं परंतु प्रभु की सेवा कर रहे हो,

  15. इफ़ेसॉस ६:८लगभग ६४ ई.

    यह जानते हुए कि हर एक मनुष्य चाहे वह दास हो या स्वतंत्र, अपने अच्छे कामों का प्रतिफल प्रभु से प्राप्‍त करेगा.

  16. इफ़ेसॉस ६:९लगभग ६४ ई.

    जो स्वामी हैं, वे भी दासों के साथ ऐसा ही व्यवहार करें और उन्हें डराना-धमकाना छोड़ दें, यह ध्यान रखते हुए कि तुम्हारे व दासों दोनों ही के स्वामी स्वर्ग में हैं, जिनके स्वभाव में किसी भी प्रकार का भेद-भाव नहीं है.

  17. इफ़ेसॉस ६:१०लगभग ६४ ई.

    इसलिये, प्रभु व उनके अपार सामर्थ्य में बलवंत बनो.

  18. इफ़ेसॉस ६:११लगभग ६४ ई.

    परमेश्वर के सभी अस्त्र-शस्त्रों से स्वयं को सुसज्जित कर लो, कि तुम शैतान के छल-बल के प्रतिरोध में खड़े रह सको.

  19. इफ़ेसॉस ६:१२लगभग ६४ ई.

    हमारा मल्ल-युद्ध सिर्फ मनुष्यों से नहीं, परंतु प्रधानों, अधिकारियों, अंधकार की सांसारिक शक्तियों और आकाशमंडल में दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है.

  20. इफ़ेसॉस ६:१३लगभग ६४ ई.

    इसलिये स्थिर खड़े रहने के लिए सभी ज़रूरतों को पूरी कर परमेश्वर के सभी अस्त्र-शस्त्रों से स्वयं को सुसज्जित कर लो कि तुम उस बुरे दिन में सामना कर सको.

  21. इफ़ेसॉस ६:१४लगभग ६४ ई.

    इसलिये अपनी कमर सच से कसकर, धार्मिकता का कवच धारण कर स्थिर खड़े रहो,

  22. इफ़ेसॉस ६:१५लगभग ६४ ई.

    पांवों में शांति के ईश्वरीय सुसमाचार के प्रचार की तत्परता के जूते धारण कर लो.

  23. इफ़ेसॉस ६:१६लगभग ६४ ई.

    इनके अलावा विश्वास की ढाल भी, कि तुम दुष्ट के सभी जलते हुए बाणों को बुझा सको.

  24. इफ़ेसॉस ६:१७लगभग ६४ ई.

    तब उद्धार का टोप तथा आत्मा की तलवार, परमेश्वर का वचन धारण कर लो.

  25. इफ़ेसॉस ६:१८लगभग ६४ ई.

    तथा आत्मा में हर समय विनती और प्रार्थना की जाती रहे. जागते हुए लगातार बिना थके प्रयास करना तुम्हारा लक्ष्य हो. सभी पवित्र लोगों के लिए निरंतर प्रार्थना किया करो.