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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. इफ़ेसॉस ५:२लगभग ६४ ई.

    तुम्हारा स्वभाव प्रेममय हो, जिस प्रकार मसीह ने तुमसे प्रेम किया है. वह हमारे लिए परमेश्वर के सामने स्वयं मनमोहक सुगंधित भेंट व बलि हो गए.

  2. इफ़ेसॉस ५:३लगभग ६४ ई.

    जैसा कि पवित्र लोगों के लिए सही है, तुम्हारे बीच व्यभिचारिता, किसी भी प्रकार की मलिनता और किसी भी प्रकार के लोभ का वर्णन तक न हो.

  3. इफ़ेसॉस ५:४लगभग ६४ ई.

    और न ही तुम्हारे बीच निर्लज्जता और मूर्खता भरी बातचीत या अश्लील मज़ाक हो, जो हमेशा ही व्यर्थ है परंतु तुम्हारे बीच धन्यवाद ही सुना जाए.

  4. इफ़ेसॉस ५:५लगभग ६४ ई.

    क्योंकि तुम यह अच्छी तरह से जानते हो कि किसी भी व्यभिचारी, मलिन तथा लोभी व्यक्ति का, जो मूर्तिपूजक ही है, मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं है.

  5. इफ़ेसॉस ५:६लगभग ६४ ई.

    कोई तुम्हें व्यर्थ की बातों के जाल में न फंसा पाए क्योंकि इन सबके कारण अनाज्ञाकारी व्यक्ति परमेश्वर के क्रोध के भागी होते हैं.

  6. इफ़ेसॉस ५:७लगभग ६४ ई.

    इसलिये उनके सहभागी न बनो.

  7. इफ़ेसॉस ५:८लगभग ६४ ई.

    इसके पहले तुम अंधकार थे, मगर अब प्रभु में ज्योति हो. इसलिये ज्योति की संतान की तरह स्वभाव करो.

  8. इफ़ेसॉस ५:९लगभग ६४ ई.

    (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की धार्मिकता, सदाचार और सच में है)

  9. इफ़ेसॉस ५:१०लगभग ६४ ई.

    यह डूंढ़ो कि हमारे किन कामों से प्रभु संतुष्ट होते हैं.

  10. इफ़ेसॉस ५:११लगभग ६४ ई.

    अंधकार के निष्फल कामों में शामिल न हो परंतु उन्हें संकोच प्रकाश में लाओ.

  11. इफ़ेसॉस ५:१२लगभग ६४ ई.

    उन कामों की तो चर्चा करना भी लज्जास्पद है, जो अनाज्ञाकारियों द्वारा गुप्‍त में किए जाते हैं.

  12. इफ़ेसॉस ५:१३लगभग ६४ ई.

    ज्योति में आने पर सब कुछ प्रकट हो जाता है क्योंकि ज्योति ही है, जो सब कुछ प्रकट करती है.

  13. इफ़ेसॉस ५:१४लगभग ६४ ई.

    इस पर कहा गया है: “सोए हुए, जागो, मरे हुओं में से जी उठो, मसीह तुम पर ज्योति चमकाएंगे.”

  14. इफ़ेसॉस ५:१५लगभग ६४ ई.

    अपने स्वभाव के विषय में विशेष रूप से सावधान रहो. तुम्हारा स्वभाव मूर्खों सा न हो परंतु बुद्धिमानों सा हो,

  15. इफ़ेसॉस ५:१६लगभग ६४ ई.

    समय का सदुपयोग करो, क्योंकि यह बुरे दिनों का समय है.

  16. इफ़ेसॉस ५:१७लगभग ६४ ई.

    इसलिये निर्बुद्धि नहीं परंतु प्रभु की इच्छा के ज्ञान के लिए विवेक प्राप्‍त करो.

  17. इफ़ेसॉस ५:१८लगभग ६४ ई.

    दाखरस से मतवाले न हो क्योंकि इससे भ्रष्टाचार पैदा होती है. परंतु, पवित्र आत्मा से भर जाओ,

  18. इफ़ेसॉस ५:१९लगभग ६४ ई.

    तब प्रभु के लिए आपस में सारे हृदय से तुम भजन, स्तुति गान व आत्मिक गीत गाते रहो,

  19. इफ़ेसॉस ५:२०लगभग ६४ ई.

    हर एक विषय के लिए हमेशा हमारे प्रभु येशु मसीह के नाम में पिता परमेश्वर के प्रति धन्यवाद देते रहो.

  20. इफ़ेसॉस ५:२१लगभग ६४ ई.

    मसीह में आदर के कारण एक दूसरे के प्रति समर्पित रहो.

  21. इफ़ेसॉस ५:२२लगभग ६४ ई.

    पत्नी, अपने पति के अधीन उसी प्रकार रहे, जैसे प्रभु के.

  22. इफ़ेसॉस ५:२३लगभग ६४ ई.

    क्योंकि पति उसी प्रकार अपनी पत्नी का सिर है, जिस प्रकार मसीह अपनी देह कलीसिया के सिर हैं, जिसके वह उद्धारकर्ता भी हैं.

  23. इफ़ेसॉस ५:२४लगभग ६४ ई.

    जिस प्रकार कलीसिया मसीह के अधीन है, उसी प्रकार पत्नी हर एक विषय में पति के अधीन रहे.

  24. इफ़ेसॉस ५:२५लगभग ६४ ई.

    पति, अपनी पत्नी से, उसी प्रकार प्रेम करे जिस प्रकार मसीह ने कलीसिया से प्रेम किया और स्वयं को उसके लिए बलिदान कर दिया

  25. इफ़ेसॉस ५:२६लगभग ६४ ई.

    कि वह उसे वचन के स्‍नान के द्वारा पाप से शुद्ध कर अपने लिए अलग करे,