Skip to content
2 कोरिंथ ११:१७-३३

2 कोरिंथ ११:१७-३३

१७
बेधड़क कहा गया मेरा वचन प्रभु द्वारा दिया गया नहीं है—यह सब तो एक मूर्ख की गर्व में कही गई बात है.
१८
कितने तो अपनी मानवीय उपलब्धियों का गर्व कर रहे हैं, तो मैं भी गर्व क्यों न करूं?
१९
तुम तो ऐसे बुद्धिमान हो कि मूर्खों को खुशी से सह लेते हो.
२०
वस्तुतः तुम तो उसकी तक सह लेते हो, जो तुम्हें दास बना लेता है, जो तुम्हारा शोषण करता है, तुम्हारा अनुचित लाभ उठाता है, स्वयं को उन्‍नत करता है, यहां तक कि वह तुम्हारे मुख पर थप्पड़ तक मार देता है!
२१
मुझे स्वयं लज्जित हो कहना पड़ रहा है कि हम इन सब की तुलना में बहुत दुर्बल थे. कोई किसी भी विषय का अभिमान करने का साहस करे—मैं यह मूर्खतापूर्वक कह रहा हूं—मैं भी उसी प्रकार अभिमान करने का साहस कर रहा हूं.
२२
क्या वे इब्री हैं? इब्री मैं भी हूं, क्या वे इस्राएली हैं? इस्राएली मैं भी हूं, क्या वे अब्राहाम के वंशज हैं? अब्राहाम का वंशज मैं भी हूं.
२३
क्या वे मसीह के सेवक हैं? मैं पागल व्यक्ति की तरह कहता हूं, मैं उनसे कहीं बढ़कर हूं: मैंने उनसे कहीं अधिक परिश्रम किया है, उनसे कहीं अधिक बंदी बनाया गया हूं, अनगिनत बार पीटा गया हूं, अक्सर ही मेरे प्राण संकट में पड़े हैं.
२४
यहूदियों ने मुझे पांच बार एक कम चालीस कोड़े लगाए.
२५
तीन बार मैं बेंत से पीटा गया, एक बार मेरा पथराव किया गया और तीन बार मेरा जलयान ध्वस्त हुआ, एक रात तथा एक दिन मुझे समुद्र में व्यतीत करना पड़ा.
२६
बार-बार मुझे यात्राएं करनी पड़ीं. कभी नदियों के, कभी डाकुओं के, कभी अपने देशवासियों के, कभी गैर-यहूदियों के, कभी नगरों में, कभी बंजर भूमि में, कभी समुद्र में जोखिम का और कभी झूठे विश्वासियों के जोखिम का सामना करना पड़ा है.
२७
मैंने अनेक रातें जाग कर, भूखे-प्यासे रहकर, अक्सर भूखे रहकर, सर्दी और थोड़े वस्त्रों में रहते हुए कठिन परिश्रम किया तथा अनेक कठिनाइयां झेली हैं.
२८
इन सब बाहरी कठिनाइयों के अलावा प्रतिदिन मुझ पर सभी कलीसियाओं की भलाई की चिंता का दबाव रहता है.
२९
कौन कमजोर है, जिसकी कमज़ोरी का अहसास मुझे नहीं होता? किसके पाप में पड़ने से मैं चिंतित नहीं होता?
३०
यदि मुझे गर्व करना ही है तो मैं अपनी कमज़ोरी का गर्व करूंगा.
३१
प्रभु येशु मसीह के परमेश्वर तथा पिता, जो युगानुयुग धन्य हैं, गवाह हैं कि मैं झूठ नहीं बोल रहा:
३२
जब मैं दमिश्क में था तो राजा अरेतॉस के राज्यपाल ने मुझे बंदी बनाने के उद्देश्य से नगर में पहरा बैठा दिया था
३३
किंतु मुझे शहरपनाह के एक झरोखे से एक टोकरे में बैठाकर नीचे उतार दिया गया और इस प्रकार मैं उसके हाथों से बच निकला.

बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.