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The Vine के बारे में बाइबल के वचन

66 वचन · 42 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. “मैंने इस्राएल को ऐसे पाया, जैसे किसी को निर्जन स्थान में अंगूर का मिलना होता है; जब मैंने तुम्हारे पूर्वजों को देखा, तो यह ऐसा था मानो अंजीर के पेड़ में लगे शुरुआती फल को देखना. पर जब वे बाल-पिओर में आये, तो उन्होंने उस लज्जास्पद मूर्ति के लिये अपने आपको पवित्र किया और वे उतने दुष्ट हो गये जितने वे उन चीज़ों से प्रेम करते थे.

  2. इस्राएल एक बढ़ने वाली अंगूर की लता थी; वह अपने लिये फल देती थी. जैसे जैसे उसके फल बढ़ते गये, उसने और ज्यादा वेदियां बनाई; जैसे जैसे उसका देश समृद्ध होता गया, उसने अपने पवित्र पत्थरों को सजाया.

  3. लोग फिर से उसकी छाया में निवास करेंगे; वे अन्‍न की तरह उन्‍नति करेंगे, वे अंगूर की लता की तरह बढ़ेंगे, इस्राएल की प्रसिद्धि लबानोन के दाखमधु की तरह होगी.

  4. उसने मेरी अंगूर की लताओं को उजाड़ दिया है और मेरे अंजीर के पेड़ों को नष्ट कर दिया है. उसने उनकी छाल को छील दिया है, और उनकी शाखाओं को सफेद छोड़कर उनकी छाल को फेंक दिया है.

  5. अंगूर की लता सूख गई है और अंजीर का पेड़ मुरझा गया है; अनार, खजूर तथा सेब के पेड़— मैदान के सब पेड़—सूख गये हैं. इसमें संदेह नहीं कि लोगों का आनंद जाता रहा है.

  6. हे जंगली जानवरों, मत डरो, क्योंकि निर्जन जगह के चरागाह हरे-भरे हो रहे हैं. पेड़ों में फल लग रहे हैं; अंजीर का पेड़ और अंगूर की लता भरपूर उपज दे रही हैं.

  7. हर एक जन अपनी ही अंगूर की लता और अपने ही अंजीर के वृक्ष के नीचे बैठेगा, और उन्हें कोई नहीं डराएगा, क्योंकि सर्वशक्तिमान याहवेह ने कहा है.

  8. क्या अभी भी कोई बीज खलिहान में बचा है? अब तक, अंगूर की लता, अंजीर के पेड़, अनार के पेड़ और जैतून के पेड़ में कोई फल नहीं लगा है. “ ‘पर आज से मैं तुम्हें आशीष दूंगा.’ ”

  9. “ ‘उस दिन, तुममें से हर एक अपने पड़ोसी को अंगूर और अंजीर पेड़ के नीचे संगति करने के लिए आमंत्रित करेगा.’ सर्वशक्तिमान याहवेह की यह घोषणा है.”

  10. “बीज अच्छी तरह से बढ़ेगा, अंगूर की लता में फल लगेगा, भूमि में फसल होगी, और आकाश से ओस पड़ेगी. मैं ये सब चीज़ें इन लोगों के बचे हुओं को एक उत्तराधिकार के रूप में दूंगा.

  11. मैं तुम्हारी फसल को नाश करनेवाले कीड़ों को रोकूंगा, और तुम्हारे खेतों में अंगूर के फल पकने के पहले कच्चे नहीं गिरेंगे,” सर्वशक्तिमान याहवेह का कहना है.

  12. मैं यह बताना चाहता हूं कि मैं दाख का रस उस दिन तक नहीं पिऊंगा जब तक मैं अपने पिता के राज्य में तुम्हारे साथ दाखरस दोबारा नहीं पिऊं.”

  13. “मैं ही हूं सच्ची दाखलता और मेरे पिता किसान हैं.

  14. मुझमें लगी हुई हर एक डाली, जो फल नहीं देती, उसे वह काट देते हैं तथा हर एक फल देनेवाली डाली को छांटते हैं कि वह और भी अधिक फल लाए.

  15. “दाखलता मैं ही हूं, तुम डालियां हो. वह, जो मुझमें स्थिर बना रहता है और मैं उसमें, बहुत फल देता है; मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते.

  16. यदि कोई मुझमें स्थिर बना नहीं रहता, वह फेंकी हुई डाली के समान सूख जाता है. उन्हें इकट्ठा कर आग में झोंक दिया जाता है और वे भस्म हो जाती हैं.