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Psalms के बारे में बाइबल के वचन

896 वचन · 16 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. समस्त मैदान और उनमें चलते फिरते रहे सभी प्राणी उल्‍लसित हों; तब वन के समस्त वृक्ष आनंद में गुणगान करने लगेंगे.

  2. वे सभी याहवेह की उपस्थिति में गाएं, क्योंकि याहवेह आनेवाला हैं और पृथ्वी पर उनके आने का उद्देश्य है पृथ्वी का न्याय करना. उनका न्याय धार्मिकतापूर्ण होगा; वह मनुष्यों का न्याय अपनी ही सच्चाई के अनुरूप करेंगे.

  3. यह याहवेह का शासन है, पृथ्वी उल्‍लसित हो; दूर के तटवर्ती क्षेत्र आनंद मनाएं.

  4. प्रभु के आस-पास मेघ और गहन अंधकार छाया हुआ है; उनके सिंहासन का आधार धार्मिकता और सच्चाई है.

  5. जब वह आगे बढ़ते हैं, अग्नि उनके आगे-आगे बढ़ते हुए उनके समस्त शत्रुओं को भस्म करती जाती है.

  6. उनकी बिजलियां समस्त विश्व को प्रकाशित कर देती हैं; यह देख पृथ्वी कांप उठती है.

  7. याहवेह की उपस्थिति में पर्वत मोम समान पिघल जाते हैं, उनके सामने, जो समस्त पृथ्वी के अधिकारी हैं.

  8. आकाशमंडल उनके सत्य की घोषणा करती है, समस्त मनुष्य उनके तेज के दर्शक हैं.

  9. मूर्तियों के उपासक लज्जित कर दिए गए, वे सभी, जो व्यर्थ प्रतिमाओं का गर्व करते हैं; समस्त देवताओ, याहवेह की आराधना करो!

  10. यह सब सुनकर ज़ियोन आनंदित हुआ, याहवेह, आपके निर्णयों के कारण यहूदिया प्रदेश के समस्त नगर हर्षित हो गए.

  11. क्योंकि याहवेह, आप समस्त रचना में सर्वोच्च हैं; समस्त देवताओं से आप कहीं अधिक महान एवं उत्तम ठहरे हैं.

  12. यह उपयुक्त है कि वे सभी, जिन्हें याहवेह से प्रेम है, बुराई से घृणा करें, प्रभु अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा करते हैं, वह उन्हें दुष्टों की युक्ति से छुड़ाते हैं.

  13. धर्मियों के जीवन प्रकाशित किए जाते हैं तथा निष्ठों के हृदय आनन्दविभोर.

  14. समस्त धर्मियो, याहवेह में प्रफुल्लित हो और उनके पवित्र नाम का स्तवन करो.

  15. याहवेह शासक हैं, राष्ट्र कांपते रहें; उन्होंने अपना आसन करूबों के मध्य स्थापित किया है, पृथ्वी कांप जाए.

  16. ज़ियोन में याहवेह तेजस्वी हैं; वह समस्त राष्ट्रों के ऊपर बसे हैं.

  17. उपयुक्त है उनका आपके महान और भय-योग्य नाम की वंदना करना— पवित्र हैं वह.

  18. राजा शक्ति-सम्पन्‍न हैं, वह जो न्याय को प्रिय मानता है, उन्होंने इस्राएल में समता की स्थापना की है; जो न्याय संगत और उचित है.

  19. याहवेह, हमारे परमेश्वर की महिमा की जाए, उनके चरणों में गिर आराधना की जाए; वह पवित्र हैं.

  20. मोशेह और अहरोन उनके पुरोहित थे, शमुएल उनके आराधक थे; ये सभी याहवेह को पुकारते थे और वह उन्हें उत्तर देते थे.

  21. मेघ-स्तंभ में से याहवेह ने उनसे वार्तालाप किया; उन्होंने उनके अधिनियमों तथा उनके द्वारा सौंपे गए आदेशों का पालन किया.

  22. याहवेह, हमारे परमेश्वर, आप उन्हें उत्तर देते थे; इस्राएल के लिए आप क्षमा शील परमेश्वर रहे, यद्यपि आप उनके अपराधों का दंड देते रहे.

  23. याहवेह, हमारे परमेश्वर की महिमा को ऊंचा करो, उनके पवित्र पर्वत पर उनकी आराधना करो, क्योंकि पवित्र हैं हमारे याहवेह परमेश्वर.

  24. दावीद की रचना. एक स्तोत्र. मेरे गीत का विषय है आपका करुणा-प्रेम तथा आपका न्याय; याहवेह, मैं आपका स्तवन करूंगा.

  25. निष्कलंक जीवन मेरा लक्ष्य है, आप कब मेरे पास आएंगे? अपने आवास में मेरा आचरण निष्कलंक रहेगा.