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Aaron के बारे में बाइबल के वचन

145 वचन · 27 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. अहीतूब सादोक का, सादोक शल्लूम का,

  2. शल्लूम हिलकियाह का, हिलकियाह अज़रियाह का,

  3. अज़रियाह सेराइयाह का, सेराइयाह यहोत्सादाक का,

  4. जब याहवेह ने नबूकदनेज्ज़र द्वारा यहूदिया और येरूशलेम को बंधुआई में भेजा, तब यहोत्सादाक भी बंधुआई में ले जाया गया:

  5. ये अहरोन के वंशज थे: उसका पुत्र एलिएज़र, उसका पुत्र फिनिहास, उसका पुत्र अबीशुआ,

  6. उसका पुत्र बुक्की, उसका पुत्र उज्जी, ज़ेराइयाह.

  7. उसका पुत्र मेराइओथ, उसका पुत्र अमरियाह, उसका पुत्र अहीतूब,

  8. उसका पुत्र सादोक और उसका पुत्र अहीमाज़ था.

  9. अमराम के पुत्र थे: अहरोन और मोशेह. अहरोन को अलग रखा गया था कि वह अति पवित्र वस्तुएं चढ़ाया करें, कि वह और उनके पुत्र हमेशा याहवेह के सामने बलि चढ़ाया करें, उनकी सेवा करें और हमेशा उनके नाम में आशीर्वाद दिया करें.

  10. अहरोन-वंशजों के समूह ये थे: अहरोन के पुत्र थे नादाब, अबीहू, एलिएज़र और इथामार.

  11. मगर नादाब और अबीहू की मृत्यु उनके पिता के देखते-देखते हो गई थी. उनके कोई संतान भी न थी. फलस्वरूप एलिएज़र और इथामार ने पौरोहितिक कार्यभार अपने ऊपर ले लिया.

  12. उन्होंने राजा उज्जियाह को मना करते हुए कहा, “उज्जियाह, याहवेह के लिए धूप जलाना आपका काम नहीं है, यह केवल पुरोहितों के लिए ही ठहराया गया है, जो अहरोन के वंशज और धूप जलाने के लिए अलग किए हुए हैं. आप पवित्र स्थान से बाहर चले जाइए, क्योंकि आप याहवेह परमेश्वर के प्रति सच्चे नहीं रहे हैं, इसलिये आपको उनकी ओर से कोई आदर न मिलेगा.”

  13. एक चरवाहे के समान आप अपनी प्रजा को लेकर आगे बढ़ते गए. मोशेह और अहरोन आपके प्रतिनिधि थे.

  14. मोशेह और अहरोन उनके पुरोहित थे, शमुएल उनके आराधक थे; ये सभी याहवेह को पुकारते थे और वह उन्हें उत्तर देते थे.

  15. तब परमेश्वर ने अपने चुने हुए सेवक मोशेह को उनके पास भेजा, और अहरोन को भी.

  16. मंडप निवासकाल में वे मोशेह और अहरोन से, जो याहवेह के अभिषिक्त थे, डाह करने लगे.

  17. मैंने तुम्हें मिस्र देश से बाहर निकाला है और तुम्हें दासत्व के बंधन से छुड़ाया है. मैंने तुम्हारी अगुवाई करने के लिये मोशेह को भेजा, अहरोन और मिरियम को भी भेजा.

  18. वे हारोन से कहते रहे, ‘हमारे आगे-आगे जाने के लिए देवताओं को स्थापित करो. इस मोशेह की, जो हमें मिस्र साम्राज्य से बाहर लेकर आया है, कौन जाने क्या हुआ!’

  19. किसी भी व्यक्ति को यह सम्मान अपनी कोशिश से नहीं परंतु परमेश्वर की बुलाहट द्वारा प्राप्‍त होती है, जैसे हारोन को.

  20. वहां धूप के लिए सोने की वेदी, सोने की पत्रियों से मढ़ी हुई वाचा का संदूक, जिसमें मन्‍ना से भरा सोने का बर्तन, हमेशा कोमल पत्ते लगते रहनेवाली हारोन की लाठी तथा वाचा की पटियां रखे हुए थे.