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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. यशायाह २४:१०लगभग ७१२ ई.पू.

    निर्जन नगर को गिरा दिया गया है; हर घर के द्वार बंद कर दिए गए हैं कि कोई उनमें जा न सके.

  2. यशायाह २४:११लगभग ७१२ ई.पू.

    दाखरस की कमी के कारण गलियों में हल्ला हो रहा है; सब खुशी दुःख में बदल गई है; पृथ्वी पर से खुशी मिट गई है.

  3. यशायाह २४:१२लगभग ७१२ ई.पू.

    नगर सुनसान पड़ा, और सब कुछ नष्ट कर दिया गया है.

  4. यशायाह २४:१३लगभग ७१२ ई.पू.

    जिस प्रकार जैतून वृक्ष को झड़ाया जाता और दाख की उपज के बाद उसको जमा करने पर कुछ बच जाता है, उसी प्रकार पृथ्वी पर लोगों के बीच वैसा ही होगा.

  5. यशायाह २४:१४लगभग ७१२ ई.पू.

    लोग आनंदित होकर ऊंची आवाज में गाते हैं; वे याहवेह के वैभव के लिए पश्चिम दिशा से जय जयकार करते हैं.

  6. यशायाह २४:१५लगभग ७१२ ई.पू.

    तब पूर्व दिशा में याहवेह की प्रशंसा करो; समुद्रतटों में, याहवेह इस्राएल के परमेश्वर की महिमा करो.

  7. यशायाह २४:१६लगभग ७१२ ई.पू.

    पृथ्वी के छोर से हमें सुनाई दे रहा है: “धर्मी की महिमा और प्रशंसा हो.” परंतु, “मेरे लिए तो कोई आशा ही नहीं है! हाय है मुझ पर! विश्वासघाती विश्वासघात करते हैं! और उनका विश्वासघात कष्टदायक होता जा रहा है!”

  8. यशायाह २४:१७लगभग ७१२ ई.पू.

    हे पृथ्वी के लोगों, डरो, गड्ढे और जाल से तुम्हारा सामना होगा.

  9. यशायाह २४:१८लगभग ७१२ ई.पू.

    तब जो कोई डर से भागेगा वह गड्ढे में गिरेगा; और गड्ढे से निकला हुआ जाल में फंस जायेगा. क्योंकि आकाश के झरोखे खोल दिये गये हैं, और पृथ्वी की नींव हिल गई है.

  10. यशायाह २४:१९लगभग ७१२ ई.पू.

    पृथ्वी टुकड़े-टुकड़े होकर, फट गई है और हिला दी गई है.

  11. यशायाह २४:२०लगभग ७१२ ई.पू.

    पृथ्वी झूमती है और लड़खड़ाती है, और एक झोपड़ी समान डोलती है; और इतना अपराध बढ़ गया है, कि पाप के बोझ से दब गई और फिर कभी भी उठ न पाएगी.

  12. यशायाह २४:२१लगभग ७१२ ई.पू.

    उस दिन याहवेह आकाश में सेना को तथा पृथ्वी पर राजाओं को दंड देंगे.

  13. यशायाह २४:२२लगभग ७१२ ई.पू.

    उन सभी को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया जाएगा; और बहुत दिनों तक उन्हें दंड दिया जाएगा.

  14. यशायाह २४:२३लगभग ७१२ ई.पू.

    तब चंद्रमा और सूर्य लज्जित होगा, क्योंकि सर्वशक्तिमान याहवेह ज़ियोन पर्वत से येरूशलेम में शासन करेंगे, और उनका वैभव उनके धर्मवृद्धों पर प्रकट होगा.

  15. यशायाह २५:१लगभग ७१२ ई.पू.

    याहवेह, आप ही मेरे परमेश्वर हैं; मैं आपकी प्रशंसा करूंगा और आपके नाम की महिमा करूंगा, क्योंकि आपने बड़े अद्भुत काम किए हैं, और उन सनातन योजनाओं को पूरी विश्वस्तता एवं सच्चाई से आपने पूरा किया है.

  16. यशायाह २५:२लगभग ७१२ ई.पू.

    आपने नगरों को गिरा दिया, और खंडहर कर दिया, परदेशियों का अब कोई नगर नहीं; और न ही उन्हें फिर बसाया जाएगा.

  17. यशायाह २५:३लगभग ७१२ ई.पू.

    इसलिये बलवंत प्रजा आपकी महिमा करेगी; और निर्दयी आपका भय मानेंगे.

  18. यशायाह २५:४लगभग ७१२ ई.पू.

    दीनों के लिए आप शरणस्थान, और विपत्ति के समय आप उनके लिए ढाल होंगे, दरिद्रों के लिये उनके शरण और रक्षक होंगे.

  19. यशायाह २५:५लगभग ७१२ ई.पू.

    जैसे निर्जल देश में बादल से ठंडक होती है; वैसे ही परदेशियों का कोलाहल, और निर्दयी लोगों का जय जयकार शांत हो जाएगा.

  20. यशायाह २५:६लगभग ७१२ ई.पू.

    इसी पर्वत पर सर्वशक्तिमान याहवेह सब लोगों को भोजन खिलाएंगे, जिसमें पुराना दाखरस— और उत्तम से उत्तम चिकना भोजन जो अच्छा और स्वादिष्ट होगा.

  21. यशायाह २५:७लगभग ७१२ ई.पू.

    इस पर्वत पर आकर सब जातियों और देशों के बीच जो पर्दा, और दीवार है तोड़ देगा;

  22. यशायाह २५:८लगभग ७१२ ई.पू.

    वह सदा-सर्वदा के लिए मृत्यु को नाश करेंगे. और प्रभु याहवेह सभी के चेहरों से आंसुओं को पोंछ देंगे; वह अपने लोगों की निंदा को दूर कर देंगे. याहवेह का यह संदेश है.

  23. यशायाह २५:९लगभग ७१२ ई.पू.

    उस दिन लोग यह कहेंगे, “कि, यही हैं हमारे परमेश्वर; यही हैं वह याहवेह जिनका हमने इंतजार किया. आओ, हम उनके उद्धार में आनंद मनाएं और प्रसन्‍न रहेंगे.”

  24. यशायाह २५:१०लगभग ७१२ ई.पू.

    क्योंकि याहवेह का हाथ सदा बना रहेगा; मोआब उनके द्वारा रौंद दिया जाएगा जिस प्रकार गोबर-कुण्ड में एक तिनके को रौंद दिया जाता है.

  25. यशायाह २५:११लगभग ७१२ ई.पू.

    जिस प्रकार एक तैराक अपने हाथों को फैलाता है, उसी प्रकार मोआब भी अपने हाथों को फैलाएगा. किंतु याहवेह उसके घमंड को चूर-चूर और उसके हाथों की कुशलता को कमजोर कर देंगे.