मुख्य सामग्री पर जाएँ

circa 1446 BC

Sinai & The Law

God meets Israel at Mount Sinai, reveals the Ten Commandments, and establishes the Tabernacle and the priestly covenant.

1,657 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. निर्गमन ३१:३लगभग १४९१ ई.पू.

    मैंने उसे मेरे आत्मा से प्रवीणता, समझ, बुद्धि और सब कामों की समझ देकर भर दिया है,

  2. निर्गमन ३१:४लगभग १४९१ ई.पू.

    ताकि वह सोना, चांदी एवं कांसे पर कलात्मक रचना कर सके,

  3. निर्गमन ३१:५लगभग १४९१ ई.पू.

    जड़ने के उद्देश्य से पत्थर काटने में कुशल तथा लकड़ी के खोदने में बुद्धि से कलाकारी का काम कर सके.

  4. निर्गमन ३१:६लगभग १४९१ ई.पू.

    और मैंने उसके साथ दान गोत्र के अहीसामक के पुत्र ओहोलियाब को सहायक चुना है. “तथा उन सभी में जो योग्य हैं, उनको मैं समझ देता हूं कि वे वह सब बनाएं, जो मैंने तुमसे कहा.

  5. निर्गमन ३१:७लगभग १४९१ ई.पू.

    “जैसे मिलनवाले तंबू, साक्षी पत्र का संदूक, उसके ऊपर करुणासन, और तंबू का सारा सामान,

  6. निर्गमन ३१:८लगभग १४९१ ई.पू.

    मेज़ तथा उसका सारा सामान, सोने का दीया तथा उसका सारा सामान, तथा धूप वेदी,

  7. निर्गमन ३१:९लगभग १४९१ ई.पू.

    होमबलि की वेदी तथा उसका सारा सामान, तथा पाया सहित उसकी हौदी,

  8. निर्गमन ३१:१०लगभग १४९१ ई.पू.

    बुने हुए वस्त्र, तथा पुरोहित अहरोन तथा उसके पुत्रों के पवित्र वस्त्र, जो वे पुरोहित का काम करते वक्त पहनेंगे;

  9. निर्गमन ३१:११लगभग १४९१ ई.पू.

    अभिषेक का तेल और सुगंधित धूप, जो पवित्र स्थान के लिए है, “इन सब चीज़ों को वे परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार तैयार करें.”

  10. निर्गमन ३१:१२लगभग १४९१ ई.पू.

    फिर याहवेह ने मोशेह से कहा,

  11. निर्गमन ३१:१३लगभग १४९१ ई.पू.

    “तुम इस्राएलियों से कहना, ‘तुम मेरे विश्राम दिन को मानना; क्योंकि यह तुम्हारे पीढ़ी से पीढ़ी तक मेरे एवं तुम्हारे बीच में एक चिन्ह होगा, ताकि तुम यह जान लो कि मैं ही याहवेह हूं, जो तुम्हें पवित्र करता हूं.

  12. निर्गमन ३१:१४लगभग १४९१ ई.पू.

    “ ‘तुम्हें विश्राम दिन को मानना ही है, क्योंकि यह तुम्हारे लिए पवित्र है. और जो इसे अपवित्र करेगा, वह निश्चय मार डाला जायेगा; जो कोई विश्राम दिन पर कोई भी काम करेगा, वह व्यक्ति उसके समाज में से मिटा दिया जाए.

  13. निर्गमन ३१:१५लगभग १४९१ ई.पू.

    छः दिन तुम काम कर सकते हो, परंतु सातवां दिन पूरा विश्राम का दिन होगा जो याहवेह के लिए पवित्र है.

  14. निर्गमन ३१:१६लगभग १४९१ ई.पू.

    इस्राएलियों में इस दिन को विश्राम दिन मानकर उनकी सारी पीढ़ी हमेशा इस वाचा को याद रखते हुए इस दिन को माने.

  15. निर्गमन ३१:१७लगभग १४९१ ई.पू.

    यह मेरे तथा इस्राएलियों के बीच में पक्का वादा और चिन्ह है; क्योंकि छः दिनों में याहवेह ने स्वर्ग तथा पृथ्वी को बनाया, लेकिन सातवें दिन उन्होंने आराम किया.’ ”

  16. निर्गमन ३१:१८लगभग १४९१ ई.पू.

    जब याहवेह सीनायी पर्वत पर मोशेह से बात कर चुके, तब परमेश्वर ने मोशेह को अपने हाथ से लिखी हुई साक्षी की दो पत्थर की पट्टियां दीं.

  17. निर्गमन ३२:१लगभग १४९१ ई.पू.

    जब लोगों ने देखा कि पर्वत से आने में मोशेह विलम्‍ब कर रहे हैं, तब लोगों ने अहरोन के पास जाकर उनसे कहा, “हमारे लिए एक देवता बनाइए जो हमारे आगे-आगे चलकर हमारी अगुवाई करे, क्योंकि मोशेह हमें मिस्र से तो निकालकर ले आये, परंतु अब मोशेह का कोई पता नहीं. अब आगे क्या होगा नहीं मालूम.”

  18. निर्गमन ३२:२लगभग १४९१ ई.पू.

    यह सुनकर अहरोन ने कहा, “अपनी-अपनी पत्नियों और पुत्र, पुत्रियों के गहने उतारकर यहां ले आओ.”

  19. निर्गमन ३२:३लगभग १४९१ ई.पू.

    सभी अपने-अपने कानों से गहने उतारकर अहरोन के पास ले आए.

  20. निर्गमन ३२:४लगभग १४९१ ई.पू.

    अहरोन ने उनसे सोना ले लिया और एक औज़ार से उसे बछड़े का एक रूप ढाल लिया, सबने यह नारा लगाया: “इस्राएल, यह है तुम्हारे देवता, जो तुम्हें मिस्र देश से निकाल लाए है.”

  21. निर्गमन ३२:५लगभग १४९१ ई.पू.

    तब अहरोन ने इस बछड़े के लिए एक वेदी बनाई और कहा, “कल याहवेह के लिए एक उत्सव होगा.”

  22. निर्गमन ३२:६लगभग १४९१ ई.पू.

    दूसरे दिन वे सब जल्दी उठ गए और उन्होंने होमबलि चढ़ाई, और वे मेल बलियां लाए और खाने-पीने बैठ गए; और खड़े होकर रंगरेलियां मनाने लगे.

  23. निर्गमन ३२:७लगभग १४९१ ई.पू.

    याहवेह ने मोशेह से कहा, “जल्दी नीचे जाओ, क्योंकि लोगों ने, जिन्हें तुम मिस्र देश से निकालकर लाए, अपने आपको अपवित्र कर दिया है.

  24. निर्गमन ३२:८लगभग १४९१ ई.पू.

    वे इतनी जल्दी उन सब विधियों को भूल गये, जिन्हें मैंने बताई थी. उन्होंने अपने लिए एक बछड़ा बनाया और उसकी उपासना करने लगे. उन्होंने इसके लिए बलि चढ़ाई और कहा, ‘इस्राएल, तुम्हारे देवता यही है जो तुम्हें मिस्र देश से निकालकर लाए हैं!’ ”

  25. निर्गमन ३२:९लगभग १४९१ ई.पू.

    याहवेह ने मोशेह से कहा, “मैंने इन लोगों को देख लिया कि उन्होंने क्या किया है; ये हठीले लोग हैं.