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Government के बारे में बाइबल के वचन

62 वचन · 2 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. गिदोन ने नगर के पुरनियों को पकड़ा और निर्जन प्रदेश की कंटीली झाड़ियां लेकर सुक्कोथ के इन व्यक्तियों को उनके द्वारा किए गए गलत व्यवहार की अच्छी सजा दे डाली.

  2. जब अम्मोन वंशज इस्राएल से युद्ध कर रहे थे, गिलआद के अगुए लोग तोब देश से यिफ्ताह को लेने जा पहुंचे.

  3. उन्होंने यिफ्ताह से विनती की, “आकर हमारे सेनापति का कार्यभार संभाल लो, कि हम अम्मोनियों से युद्ध कर सकें.”

  4. गिलआद के अगुओं को यिफ्ताह ने उत्तर दिया, “क्या आप ही नहीं थे, जिन्होंने घृणा करके मुझे मेरे पिता के घर से बाहर निकाल दिया था? अब, जब आप पर संकट आ पड़ा है, तो आप लोग मेरे पास क्यों आए हैं?”

  5. गिलआद के अगुओं ने यिफ्ताह को उत्तर दिया, “तुम्हारे पास हमारे लौटने का कारण सिर्फ यह है कि तुम हमारे साथ चलो और अम्मोन वंशजों से युद्ध कर सारे गिलआद वासियों के प्रधान बन जाओ.”

  6. इस पर यिफ्ताह ने गिलआद के अगुओं से प्रश्न किया, “अर्थात् यदि आप मुझे अम्मोन वंशजों से युद्ध करने के उद्देश्य से वापस ले जाते हैं, और याहवेह उन्हें मेरे अधीन कर देते हैं, तो मैं आपका प्रधान बन जाऊंगा?”

  7. गिलआद के पुरनियों ने यिफ्ताह को उत्तर दिया, “स्वयं याहवेह हमारे बीच गवाह हैं, निश्चय ही हम ठीक वैसा ही करेंगे जैसा तुमने अभी कहा है.”

  8. सो यिफ्ताह गिलआद के पुरनियों के साथ चला गया. प्रजाजनों ने उसे अपने ऊपर अधिनायक एवं प्रधान नियुक्त कर दिया. यिफ्ताह ने मिज़पाह में याहवेह के सामने पूरी वाचा दोहरा दी.

  9. इसके बाद बोअज़ ने नगर के पुरनियों में से दस को भी वहां बुलवा लिया और उनसे विनती की, “कृपया यहां बैठिए,” सो वे सब बैठ गए.

  10. तब बोअज़ ने उस छुड़ानेवाले से कहा, “नावोमी, जो मोआब देश से लौट आई हैं, एलिमेलेख, हमारे रिश्तेदार की भूमि, का एक भाग बेच रही हैं.”

  11. सो मैं यह सही समझता हूं कि मैं आपको इसकी सूचना इन शब्दों में दे दूं, “इस ज़मीन को इन गवाहों की उपस्थिति में तथा हमारे नागरिकों के पुरनियों की उपस्थिति में खरीद लो. यदि तुम इसको छुड़ाना चाहो, इसको छुड़ा लो. किंतु यदि तुम छुड़ाना न चाहो, मुझसे कह दो, कि मुझे तुम्हारी इच्छा मालूम हो जाए, क्योंकि तुम्हारे अलावा इसका और कोई दूसरा छुड़ाने वाला नहीं है. तुम्हारे बाद मैं छुड़ा सकता हूं.” उस छुड़ानेवाले ने कहा, “मैं इसको छुड़ा लूंगा.”

  12. इस पर बोअज़ ने कहा, “जिस दिन तुम नावोमी से उस ज़मीन को ख़रीदोगे, तुम्हें मोआबी रूथ को, जो उस मृतक रिश्तेदार की विधवा है, भी मोल लेना पड़ेगा कि मृतक का नाम इस संपत्ति के साथ बना रह सके.”

  13. इस पर उस छुड़ानेवाले ने कहा, “इस स्थिति में मैं इसको छुड़ाने में असमर्थ हूं, क्योंकि ऐसा करने पर अपने ही वंश का नुकसान कर बैठूंगा. छुड़ाने का यह अधिकार अब तुम ले लो. क्योंकि मैं यह छुड़ाने में असमर्थ हूं.”

  14. (इस्राएल में पुराने समय से यह प्रथा चली आ रही थी, कि छुड़ाने की प्रक्रिया में लेनदेन को पक्का करने के प्रमाण के रूप में छुड़ाने वाला अपना जूता उतारकर दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया करता था. इस्राएल देश में लेनदेन पक्का करने की यही विधि थी.)

  15. सो जब उस छुड़ानेवाले ने बोअज़ से कहा, “तुम स्वयं ही इसको खरीद लो,” उसने अपना जूता उतारकर बोअज़ को दे दिया.

  16. तब बोअज़ ने पुरनियों तथा सभी उपस्थित लोगों को यह कहा, “आज आप सभी इस बात के गवाह हैं, कि मैंने नावोमी से वह सब खरीद लिया है, जो एलिमेलेख का तथा किल्‍योन तथा मह्‍लोन का था.

  17. साथ ही मैंने मह्‍लोन की विधवा मोआबी रूथ को अपनी पत्नी होने के लिए स्वीकार कर लिया है, कि मृतक की संपत्ति के उत्तराधिकार के लिए संतान पैदा हो, और उसके जन्मस्थान तथा उनके रिश्तेदारों में से मृतक का नाम मिटने न पाए. आप सभी आज इसके गवाह हैं!”

  18. इस पर नगर द्वार की सारी भीड़ तथा नगर के पुरनियों ने उत्तर दिया, “हम इसके गवाह हैं. जो स्त्री तुम्हारे परिवार में प्रवेश कर रही है, याहवेह उसे राहेल तथा लियाह के समान बनाएं, जो दोनों ही इस्राएल के सारे गोत्रों का मूल हैं. तुम एफ़राथा में सम्पन्‍न होते जाओ और बेथलेहेम में तुम्हारा यश फैल जाए.

  19. इसके लिए ईजेबेल ने अहाब के नाम में पत्र लिखे, उन पर अहाब की मोहर लगा उन्हें नाबोथ के नगर के पुरनियों और बड़े लोगों को भेज दिया.

  20. पत्रों में उसने लिखा था: “उपवास की घोषणा करो और नाबोथ को मुख्य स्थान पर बैठाना.

  21. नाबोथ के ही सामने दो दुष्ट लोगों को भी बैठा देना. वे नाबोथ पर यह आरोप लगाएं: ‘तुमने परमेश्वर और राजा को शाप दिया है.’ तब उसे ले जाकर पत्थराव द्वारा उसकी हत्या कर देना.”

  22. नाबोथ के नगरवासी पुरनियों और प्रमुखों ने ऐसा ही किया, जैसा ईजेबेल ने उन्हें आदेश दिया था; ठीक जैसा आदेश उन्हें पत्रों में ईजेबेल द्वारा दिया गया था.

  23. उन्होंने उपवास की घोषणा की और नाबोथ को लोगों के बीच मुख्य स्थान पर बैठाया.

  24. दो दुष्टों ने आकर सबके सामने यह कहकर नाबोथ पर आरोप लगाया: “नाबोथ ने परमेश्वर और राजा को शाप दिया है.” तब वे नाबोथ को नगर के बाहर ले गए, और पत्थराव कर उसकी हत्या कर दी.

  25. इसके बाद उन्होंने ईजेबेल को यह सूचना भेज दी, “नाबोथ का पत्थराव किया चुका है; उसकी मृत्यु हो चुकी है.”