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Boaz

24 वचन · 4 परिवार के सदस्य

इन्हें भी कहा जाता है: Booz

Boaz का उल्लेख करने वाले वचन

  1. नावोमी के पति के बोअज़ नाम के एक रिश्तेदार था. वह एलिमेलेख के परिवार से एक नामी और धनी व्यक्ति था.

  2. सो रूथ ने खेत में जाकर फसल काटनेवालों के पीछे-पीछे बालें इकट्ठी करना शुरू कर दिया. संयोग से यह खेत एलिमेलेख के रिश्तेदार बोअज़ का था.

  3. कुछ ही समय बाद, जब बोअज़ बेथलेहेम नगर से वहां खेत में आए, उन्होंने फसल काटनेवालों को नमस्कार करते हुए उनसे कहा, “याहवेह आपके साथ रहें!” उन्होंने इसके उत्तर में कहा, “याहवेह की कृपादृष्टि आप पर बनी रहे.”

  4. बोअज़ ने फसल काटनेवालों के प्रभारी से पूछा, “यह युवती कौन है?”

  5. तब बोअज़ ने रूथ से कहा, “बेटी, ध्यान से सुनो. किसी दूसरे खेत में बालें बीनने न जाना, और न ही इस खेत से बाहर जाना. बेहतर होगा कि तुम मेरी इन दासियों के पास ही बनी रहे.

  6. बोअज़ ने उत्तर दिया, “अपने पति की मृत्यु से लेकर अब तक तुमने अपनी सास के लिए जो कुछ किया है, तथा जिस प्रकार तुम अपने माता-पिता का घर तथा अपनी मातृभूमि को छोड़कर पूरी तरह से अनजाने लोगों के बीच आ गई हो, इसका पूरा वर्णन मुझे सुनाया गया है.

  7. भोजन के समय बोअज़ ने रूथ से कहा, “यहां आ जाओ, मेरे साथ भोजन करो, और अपने कौर को सिरके में डुबोती जाओ.” सो वह फसल काटनेवालों के साथ बैठ गई और बोअज़ ने उसे भुना हुआ अनाज भी दे दिया, जिसे उसने न केवल भरपेट खाया बल्कि उसके पास कुछ अन्‍न बचा भी रह गया.

  8. जब वह गिरी हुई बालें इकट्ठी करने के लिए दोबारा उठी, बोअज़ ने दासों को आज्ञा दी, “यदि वह पूलियों के बीच से भी इकट्ठा करने लगे, न उसे रोकना और न उसे डांटना.

  9. उसकी सास ने उससे पूछा, “तुमने बालें कहां से बीनीं? तुम किस जगह पर काम करती रही? धन्य है वह व्यक्ति, जिसने तुम्हारा ध्यान रखा!” तब रूथ ने अपनी सास को बताया कि उसने किसके साथ काम किया था, “जिस व्यक्ति के यहां मैंने आज काम किया है, उनका नाम बोअज़ है.”

  10. तो जौ और गेहूं की कटनी खत्म होने तक रूथ बोअज़ की दासियों के साथ साथ ही बनी रही. वह अपनी सास के साथ ही रहती थी.

  11. सुनो, बोअज़ हमारे रिश्तेदार हैं, जिनकी दासियों के साथ तुम काम कर रही थी. देखो, आज शाम वह खलिहान में जौ फटकेंगे.

  12. बोअज़ बहुत ही खुश थे, जब उन्होंने खाना-पीना खत्म किया, वह अनाज के ढेर के पास सोने के लिए चले गए. तब रूथ दबे पांव वहां आई, और बोअज़ के पैरों की चादर उठाकर वहां लेट गई.

  13. उसी समय बोअज़ नगर द्वार पर जाकर बैठ गए, और जब वहां वह छुड़ाने वाला आया, जिसका वर्णन बोअज़ रूथ से कर चुके थे, बोअज़ ने उनसे कहा, “मित्र यहां आइए और मेरे पास बैठिए.” सो वह आकर बोअज़ के पास बैठ गया.

  14. इस पर बोअज़ ने कहा, “जिस दिन तुम नावोमी से उस ज़मीन को ख़रीदोगे, तुम्हें मोआबी रूथ को, जो उस मृतक रिश्तेदार की विधवा है, भी मोल लेना पड़ेगा कि मृतक का नाम इस संपत्ति के साथ बना रह सके.”

  15. सो जब उस छुड़ानेवाले ने बोअज़ से कहा, “तुम स्वयं ही इसको खरीद लो,” उसने अपना जूता उतारकर बोअज़ को दे दिया.

  16. तब बोअज़ ने पुरनियों तथा सभी उपस्थित लोगों को यह कहा, “आज आप सभी इस बात के गवाह हैं, कि मैंने नावोमी से वह सब खरीद लिया है, जो एलिमेलेख का तथा किल्‍योन तथा मह्‍लोन का था.

  17. बोअज़ ने रूथ से विवाह कर लिया और जब वह उसके पास गया, याहवेह ने रूथ को गर्भधारण की क्षमता दी, और उसे एक पुत्र पैदा हुआ.

  18. सलमोन बोअज़ के, बोअज़ ओबेद के,

  19. उन्होंने मंदिर के बरामदा में खंभे बनाए, एक दक्षिण दिशा में, दूसरा उत्तर दिशा में. दक्षिण खंभे को उन्होंने याकिन नाम दिया और उत्तरी खंभे को बोअज़.

  20. नाहशोन पिता था सालमा का, सालमा बोअज़ का,

  21. बोअज़ ओबेद का, ओबेद, यिशै का.

  22. उन्होंने मंदिर के सामने खंभे बनाए, एक दक्षिण दिशा में, दूसरा उत्तर दिशा में. दक्षिण खंभे को उन्होंने याकिन नाम दिया और उत्तरी खंभे को बोअज़.

  23. सलमोन और राहाब से बोअज़, बोअज़ और रूथ से ओबेद, ओबेद से यिशै तथा

  24. दावीद यिशै के, यिशै ओबेद के, ओबेद बोअज़ के, बोअज़ सलमोन के, सलमोन नाहश्शोन के,