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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 1 पेतरॉस १:७लगभग ६० ई.

    कि मसीह येशु के दोबारा आगमन के अवसर पर तुम्हारे विश्वास के प्रमाण का परिणाम प्रशंसा, गौरव और सम्मान में देखा जा सके. तुम्हारा यह विश्वास नाशमान सोने से कहीं अधिक कीमती है—यद्यपि इसे आग में परखा जाता है.

  2. 1 पेतरॉस १:८लगभग ६० ई.

    हालांकि तुमने प्रभु को नहीं देखा है, फिर भी उनसे प्रेम करते हो; और तुम उन्हें इस समय नहीं देख रहे हो, फिर भी तुम उनमें विश्वास करते हो और ऐसे आनंद से, जो वर्णन से बाहर है भरा हुआ हो. जो ईश्वरीय महिमा से भरा है,

  3. 1 पेतरॉस १:९लगभग ६० ई.

    जिसे तुमने अपने विश्वास के परिणामस्वरूप प्राप्‍त किया है—वही तुम्हारी आत्मा का उद्धार.

  4. 1 पेतरॉस १:१०लगभग ६० ई.

    इसी उद्धार के संबंध में भविष्यद्वक्ताओं ने अपनी भविष्यवाणियों में तुम्हारे आनेवाले अनुग्रह की प्राप्‍ति के विषय में खोज और छानबीन की,

  5. 1 पेतरॉस १:११लगभग ६० ई.

    उनकी खोज का विषय था उनमें बसा हुआ मसीह के आत्मा द्वारा पहले से बताई गई मसीह की उत्पीड़न तथा उनके बाद उनकी महिमा का संकेत किस व्यक्ति तथा किस काल की ओर था.

  6. 1 पेतरॉस १:१२लगभग ६० ई.

    उन पर यह प्रकट कर दिया गया था कि यह सब उनकी अपनी सेवा में, उन्ही के जीवनकाल में नहीं, परंतु वर्षों बाद तुम्हारे जीवनकाल में सम्पन्‍न होगा. अब तुम तक यही ईश्वरीय सुसमाचार उनके द्वारा लाया गया है, जिन्होंने स्वर्ग से भेजे गए पवित्र आत्मा द्वारा प्रचार क्षमता प्राप्‍त की थी. स्वर्गदूत तक इनकी एक झलक पाने के लिए लालायित रहते हैं.

  7. 1 पेतरॉस १:१३लगभग ६० ई.

    इसलिये मानसिक रूप से कमर कस लो, सचेत रहो और अपनी आशा पूरी तरह उस अनुग्रह पर केंद्रित करो, जो मसीह येशु के प्रकट होने पर तुम्हें प्रदान किया जाएगा.

  8. 1 पेतरॉस १:१४लगभग ६० ई.

    परमेश्वर की आज्ञाकारी संतान होने के कारण उन अभिलाषाओं को तृप्‍त न करो, तुम पहले अज्ञानतावश जिनके अधीन थे.

  9. 1 पेतरॉस १:१५लगभग ६० ई.

    अपने पवित्र बुलानेवाले के समान तुम स्वयं अपने सारे स्वभाव में पवित्र हो जाओ;

  10. 1 पेतरॉस १:१६लगभग ६० ई.

    लिखा है: “पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं.”

  11. 1 पेतरॉस १:१७लगभग ६० ई.

    यदि तुम उन्हें पिता कहते हो, जो मनुष्यों के कामों के आधार पर बिना पक्षपात के निर्णय करते हैं तो तुम पृथ्वी पर अपने रहने का समय उन्हीं के भय में बिताओ,

  12. 1 पेतरॉस १:१८लगभग ६० ई.

    इस अहसास के साथ कि पूर्वजों से चली आ रही तुम्हारे निकम्मे चालचलन से तुम्हारी छुटकारा नाशमान सोने के या चांदी के द्वारा नहीं,

  13. 1 पेतरॉस १:१९लगभग ६० ई.

    परंतु मसीह के बहुमूल्य लहू से हुआ है—निर्दोष और निष्कलंक मेमने के लहू से.

  14. 1 पेतरॉस १:२०लगभग ६० ई.

    यद्यपि वह सृष्टि के पहले से ही चुने हुए थे किंतु इन अंतिम दिनों में तुम्हारे लिए प्रकट हुए हैं.

  15. 1 पेतरॉस १:२१लगभग ६० ई.

    तुम, जो प्रभु द्वारा परमेश्वर में विश्वास करते हो, जिन्होंने उन्हें मरे हुओं में से जीवित कर गौरवान्वित किया, जिसके परिणामस्वरूप तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर में है.

  16. 1 पेतरॉस १:२२लगभग ६० ई.

    इसलिये कि तुमने उस सच्चाई की आज्ञा मानने के द्वारा अपनी आत्मा को निश्छल भाईचारे के लिए पवित्र कर लिया है, अब तुममें आपस में उत्तम हार्दिक प्रेम ही देखा जाए.

  17. 1 पेतरॉस १:२३लगभग ६० ई.

    तुम्हारा नया जन्म नाशवान नहीं परंतु अनंत जीवन तत्व अर्थात् परमेश्वर के जीवित और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा हुआ है

  18. 1 पेतरॉस १:२४लगभग ६० ई.

    क्योंकि, “सभी मनुष्य घास के समान, तथा उनकी शोभा जंगली फूलों के समान है; घास मुरझा जाती तथा फूल झड़ जाता है,

  19. 1 पेतरॉस १:२५लगभग ६० ई.

    परंतु प्रभु का वचन युगानुयुग बना रहता है.” यही है वह वचन जो तुम्हें सुनाया गया था.

  20. 1 पेतरॉस २:१लगभग ६० ई.

    इसलिये सब प्रकार का बैरभाव, सारे छल, कपट, डाह तथा सारी निंदा को दूर करते हुए

  21. 1 पेतरॉस २:२लगभग ६० ई.

    वचन के निर्मल दूध के लिए तुम्हारी लालसा नवजात शिशुओं के समान हो कि तुम उसके द्वारा उद्धार के पूर्ण अनुभव में बढ़ते जाओगे.

  22. 1 पेतरॉस २:३लगभग ६० ई.

    अब तुमने यह चखकर जान लिया है कि प्रभु कृपानिधान हैं.

  23. 1 पेतरॉस २:४लगभग ६० ई.

    अब तुम उनके पास आए हो, जो जीवित पत्थर हैं, जो मनुष्यों द्वारा त्यागा हुआ किंतु परमेश्वर के लिए बहुमूल्य और प्रतिष्ठित हैं.

  24. 1 पेतरॉस २:५लगभग ६० ई.

    तुम भी जीवित पत्थरों के समान पवित्र पौरोहित्य के लिए एक आत्मिक भवन बनते जा रहे हो कि मसीह येशु के द्वारा परमेश्वर को भानेवाली आत्मिक बलि भेंट करो.

  25. 1 पेतरॉस २:६लगभग ६० ई.

    पवित्र शास्त्र का लेख है: “देखो, मैं ज़ियोन में एक उत्तम पत्थर, एक बहुमूल्य कोने के पत्थर की स्थापना कर रहा हूं, वह, जो उनमें विश्वास करता है कभी भी लज्जित न होगा.”