circa AD 48–96
Letters to the Churches
Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.
इस काल के वचन
- फ़िलिप्पॉय ४:१४लगभग ६४ ई.
तुमने मेरी विषम परिस्थितियों में मेरा साथ देकर सराहनीय काम किया है.
- फ़िलिप्पॉय ४:१५लगभग ६४ ई.
फ़िलिप्पॉयवासियो, ईश्वरीय सुसमाचार प्रचार के प्रारंभ में मकेदोनिया से यात्रा प्रारंभ करते समय तुम्हारे अतिरिक्त किसी भी कलीसिया से मुझे आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई;
- फ़िलिप्पॉय ४:१६लगभग ६४ ई.
इसी प्रकार थेस्सलोनिकेयुस में भी तुमने मेरी ज़रूरत में अनेक बार सहायता की.
- फ़िलिप्पॉय ४:१७लगभग ६४ ई.
यह नहीं कि मैं आर्थिक सहायता पाने की इच्छा रखता हूं, परंतु मैं ऐसे प्रतिफल की कामना करता हूं, जिससे तुम्हारा लाभ बढ़ता जाए.
- फ़िलिप्पॉय ४:१८लगभग ६४ ई.
इपाफ़्रोदितॉस के द्वारा जो सहायता तुमने भेजी है, उससे मैंने सब कुछ प्राप्त किया है और अधिकाई में प्राप्त कर लिया है. यह मेरे लिए काफ़ी है. वह परमेश्वर के लिए मनमोहक सुगंध, ग्रहण योग्य बलि व आनंदजनक है.
- फ़िलिप्पॉय ४:१९लगभग ६४ ई.
हमारे पिता परमेश्वर, अपने अपार धन के अनुरूप मसीह येशु में तुम्हारी हर एक ज़रूरत पूरा करेंगे.
- फ़िलिप्पॉय ४:२०लगभग ६४ ई.
परमेश्वर हमारे पिता की महिमा युगानुयुग बनी रहे, आमेन.
- फ़िलिप्पॉय ४:२१लगभग ६४ ई.
मसीह येशु में सभी पवित्र लोगों को मेरी शुभकामनाएं. मेरे साथी भाई बहनों की ओर से तुम्हें शुभकामनाएं.
- फ़िलिप्पॉय ४:२२लगभग ६४ ई.
तथा सभी पवित्र लोगों की ओर से अभिनंदन, विशेषकर कयसर के घराने की ओर से.
- फ़िलिप्पॉय ४:२३लगभग ६४ ई.
तुम पर प्रभु येशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारी आत्मा के साथ बना रहे. आमेन!
- कोलोस्सॉय १:१लगभग ६४ ई.
परमेश्वर की इच्छा से मसीह येशु के प्रेरित पौलॉस तथा हमारे भाई तिमोथियॉस की ओर से,
- कोलोस्सॉय १:२लगभग ६४ ई.
कोलोस्सॉय के पवित्र लोगों और मसीह में सच्चे विश्वासी भाई बहनों को, हमारे पिता परमेश्वर की ओर से अनुग्रह और शांति.
- कोलोस्सॉय १:३लगभग ६४ ई.
तुम्हारे लिए प्रार्थना करते समय हम हमारे प्रभु येशु मसीह के पिता परमेश्वर के सामने हमेशा अपना आभार प्रकट करते हैं,
- कोलोस्सॉय १:४लगभग ६४ ई.
क्योंकि हमने मसीह येशु में तुम्हारे विश्वास तथा सभी पवित्र लोगों के प्रति तुम्हारे प्रेम के विषय में सुना है.
- कोलोस्सॉय १:५लगभग ६४ ई.
इनका आधार है वह विश्वास और प्रेम जो उपजा है उस आशा से जो आपके लिए स्वर्ग में रखी हुई है तथा जिसके विषय में तुम पहले ही सच्चाई का वर्णन—उद्धार के सुसमाचार में सुन चुके हो
- कोलोस्सॉय १:६लगभग ६४ ई.
जिसे तुमने प्राप्त किया है, यह सुसमाचार लगातार पूरे संसार में और तुममें भी उसी दिन से फूल और फल रहा है, जिस दिन से तुमने इसे सुना और तुम्हें तभी परमेश्वर के अनुग्रह का अहसास हुआ.
- कोलोस्सॉय १:७लगभग ६४ ई.
ठीक जिसे तुमने हमारे प्रिय सहकर्मी दास एपाफ़्रास से सीखा, जो तुम्हारे लिए मसीह का सच्चा सेवक है.
- कोलोस्सॉय १:८लगभग ६४ ई.
वह हमें पवित्र आत्मा में तुम्हारे प्रेम के विषय में सूचित भी करता रहा है.
- कोलोस्सॉय १:९लगभग ६४ ई.
इसी कारण जिस दिन से हमने यह सुना है, हमने तुम्हारे लिए प्रार्थना करना नहीं छोड़ा और हम यह विनती करते हैं कि तुम पूरे आत्मिक ज्ञान और समझ में परमेश्वर की इच्छा के सारे ज्ञान में भरपूर होते जाओ,
- कोलोस्सॉय १:१०लगभग ६४ ई.
कि तुम्हारा स्वभाव प्रभु के योग्य हो, जो उन्हें हर प्रकार से प्रसन्न करनेवाला हो, जो हर एक भले कार्य में फलदाई हो तथा परमेश्वर के सारे ज्ञान में उन्नत होते हुए तुम,
- कोलोस्सॉय १:११लगभग ६४ ई.
सारी सहनशीलता और धीरज के लिए उनकी महिमा की शक्ति के अनुसार सारे सामर्थ्य से बलवान होते जाओ तथा
- कोलोस्सॉय १:१२लगभग ६४ ई.
पिता का खुशी से आभार मानो, जिन्होंने तुम्हें ज्योति के राज्य में पवित्र लोगों की मीरास में शामिल होने के लिए योग्य बना दिया.
- कोलोस्सॉय १:१३लगभग ६४ ई.
क्योंकि वही हमें अंधकार के वश से निकालकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में ले आए हैं.
- कोलोस्सॉय १:१४लगभग ६४ ई.
उन्हीं में हमारा छुटकारा, अर्थात् पाप की क्षमा है.
- कोलोस्सॉय १:१५लगभग ६४ ई.
वह तो अनदेखे परमेश्वर का स्वरूप हैं. वह सारी सृष्टि में पहलौठे हैं.