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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. गलातिया ४:२५लगभग ५८ ई.

    हागार अराबिया में सीनाय पर्वत है, जो वर्तमान येरूशलेम का प्रतीक है क्योंकि वह संतानों सहित दासत्व में है.

  2. गलातिया ४:२६लगभग ५८ ई.

    किंतु स्वर्गीय येरूशलेम स्वतंत्र है. वह हमारी माता है.

  3. गलातिया ४:२७लगभग ५८ ई.

    जैसा कि लिखा है: “बांझ, तुम, जो संतान पैदा करने में असमर्थ हो, आनंदित हो. तुम, जो प्रसव पीड़ा से अनजान हो, जय जयकार करो, क्योंकि त्यागी हुई की संतान, सुहागन की संतान से अधिक है.”

  4. गलातिया ४:२८लगभग ५८ ई.

    प्रिय भाई बहनो, तुम यित्सहाक के समान प्रतिज्ञा की संतान हो.

  5. गलातिया ४:२९लगभग ५८ ई.

    किंतु जैसे उस समय शरीर से जन्मा पुत्र आत्मा से जन्मे पुत्र को सताया करता था, वैसी ही स्थिति इस समय भी है.

  6. गलातिया ४:३०लगभग ५८ ई.

    पवित्र शास्त्र का लेख क्या है? “दासी व उसके पुत्र को निकाल दो क्योंकि दासी का पुत्र कभी भी स्वतंत्र स्त्री के पुत्र के साथ वारिस नहीं होगा.”

  7. गलातिया ४:३१लगभग ५८ ई.

    इसलिये, प्रिय भाई बहनो, हम दासी की नहीं, परंतु स्वतंत्र स्त्री की संतान हैं.

  8. गलातिया ५:१लगभग ५८ ई.

    इसी स्वतंत्रता में बने रहने के लिए मसीह ने हमें स्वतंत्र किया है. इसलिये स्थिर रहो और दोबारा दासत्व के जूए में न जुतो.

  9. गलातिया ५:२लगभग ५८ ई.

    यह समझ लो! मैं, पौलॉस, तुम्हें बताना चाहता हूं कि यदि तुम ख़तना के पक्ष में निर्णय लेते हो तो तुम्हारे लिए मसीह की कोई उपयोगिता न रह जायेगी.

  10. गलातिया ५:३लगभग ५८ ई.

    मैं ख़तना के हर एक समर्थक से दोबारा कहना चाहता हूं कि वह सारी व्यवस्था का पालन करने के लिए मजबूर है.

  11. गलातिया ५:४लगभग ५८ ई.

    तुम, जो धर्मी ठहराए जाने के लिए व्यवस्था पर निर्भर रहना चाहते हो, मसीह से अलग हो गए हो और अनुग्रह से तुम गिर चुके हो.

  12. गलातिया ५:५लगभग ५८ ई.

    किंतु हम पवित्र आत्मा के द्वारा विश्वास से धार्मिकता की आशा की बाट जोहते हैं.

  13. गलातिया ५:६लगभग ५८ ई.

    ख़तनित होना या न होना मसीह येशु में किसी महत्व का नहीं है; महत्व है सिर्फ विश्वास का जिसका प्रभाव दिखता है प्रेम में.

  14. गलातिया ५:७लगभग ५८ ई.

    दौड़ में बहुत बढ़िया था तुम्हारा विकास. कौन बन गया तुम्हारे सच्चाई पर चलने में रुकावट?

  15. गलातिया ५:८लगभग ५८ ई.

    यह उकसावा उनकी ओर से नहीं है, जिन्होंने तुम्हें बुलाया.

  16. गलातिया ५:९लगभग ५८ ई.

    “थोड़ा-सा खमीर सारे आटे को खमीर कर देता है.”

  17. गलातिया ५:१०लगभग ५८ ई.

    प्रभु में मुझे तुम पर भरोसा है कि तुम किसी अन्य विचार को स्वीकार न करोगे. जो भी तुम्हें भरमाएगा व डांवा-डोल करेगा, वह दंड भोगेगा, चाहे वह कोई भी क्यों न हो.

  18. गलातिया ५:११लगभग ५८ ई.

    प्रिय भाई बहनो, यदि मैं अब तक ख़तना का प्रचार कर रहा हूं तो मुझ पर यह सताना क्यों? इस स्थिति में तो क्रूस के प्रति विरोध समाप्‍त हो गया होता.

  19. गलातिया ५:१२लगभग ५८ ई.

    उत्तम तो यही होता कि वे, जो तुम्हें डांवा-डोल कर रहे हैं, स्वयं को नपुंसक बना लेते!

  20. गलातिया ५:१३लगभग ५८ ई.

    प्रिय भाई बहनो, तुम्हारा बुलावा स्वतंत्रता के लिए किया गया है. अपनी स्वतंत्रता को अपनी शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति का सुअवसर मत बनाओ परंतु प्रेमपूर्वक एक दूसरे की सेवा करो.

  21. गलातिया ५:१४लगभग ५८ ई.

    क्योंकि सारी व्यवस्था का सार सिर्फ एक वाक्य में छिपा हुआ है: “जैसे तुम स्वयं से प्रेम करते हो, वैसे ही अपने पड़ोसी से भी प्रेम करो.”

  22. गलातिया ५:१५लगभग ५८ ई.

    यदि तुम एक दूसरे को हिंसक पशुओं की भांति काटते-फाड़ते रहे, तो सावधान! कहीं तुम्हीं एक दूसरे का नाश न कर बैठो.

  23. गलातिया ५:१६लगभग ५८ ई.

    मेरी सलाह यह है, तुम्हारा स्वभाव आत्मा से प्रेरित हो, तब तुम किसी भी प्रकार से शारीरिक लालसाओं की पूर्ति नहीं करोगे.

  24. गलातिया ५:१७लगभग ५८ ई.

    शरीर आत्मा के विरुद्ध और आत्मा शरीर के विरुद्ध लालसा करता है. ये आपस में विरोधी हैं कि तुम वह न कर सको, जो तुम करना चाहते हो.

  25. गलातिया ५:१८लगभग ५८ ई.

    यदि तुम पवित्र आत्मा द्वारा चलाए चलते हो तो तुम व्यवस्था के अधीन नहीं हो.