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Aaron
Aaron का उल्लेख करने वाले वचन
एलियाब के तीन पुत्र थे—नमूएल, दाथान और अबीराम. याद रखो कि दाथान और अबीराम वे दो नेता थे, जो मोशेह और अहरोन के विरोधी हो गए थे. वे कोराह के अनुयायी थे और कोराह याहवेह का विरोधी हो गया था.
अमराम की पत्नी का नाम योकेबेद था. वह भी लेवी के परिवार समूह की थी. उसका जन्म मिस्र में हुआ था. अमराम और योकेबेद के दो पुत्र अहरोन और मोशेह थे. उनकी एक पुत्री मिरियम भी थी.
नादाब, अबीहू, एलिएज़र तथा इथामार का पिता था अहरोन.
बहुत समय पहले, मोशेह और पुरोहित अहरोन ने इस्राएल के लोगों को सीनायी मरुभूमि में गिना था. किंतु वे सभी लोग मर चुके थे. मोआब के मैदान में मोशेह ने जिन लोगों को गिना, वे पहले गिने गए लोगों से भिन्न थे.
जब तुम इस देश को देख लोगे, तुम भी अपने भाई अहरोन के समान अपने लोगों में मिला लिए जाओगे,
यह उस यात्रा का वर्णन है, जो इस्राएलियों द्वारा मिस्र देश से निकलकर उनकी सेना के द्वारा मोशेह तथा अहरोन के नेतृत्व में की गई थी.
इसके बाद पुरोहित अहरोन याहवेह के आदेश पर होर पर्वत पर चढ़ गया और वहीं उसकी मृत्यु हो गई. यह इस्राएलियों के मिस्र देश से निकलने का चालीसवां वर्ष था. यह पांचवें महीने की पहली तारीख थी.
अहरोन की आयु इस अवसर पर एक सौ तेईस वर्ष थी, जब होर पर्वत पर उसकी मृत्यु हुई.
अहरोन पर तो याहवेह इतने क्रुद्ध थे, कि वह उसे नाश कर देने पर उतारू हो गए; तब मैंने उसी अवसर पर अहरोन के लिए विनती की.
(इस अवसर पर इस्राएलियों ने बेने-जआकन के कुंओं से मोसेराह की ओर कूच किया. यहां अहरोन की मृत्यु हो गई और उसे वहीं गाड़ दिया गया. उसके स्थान पर उसके पुत्र एलिएज़र ने पौरोहितिक सेवा शुरू की.
तब तुम जिस पर्वत पर चढ़ोगे, वहीं अपने प्राण विसर्जित कर देना और अपने पूर्वजों में सम्मिलित हो जाना, जिस प्रकार तुम्हारे भाई अहरोन ने होर पर्वत पर जा अपने प्राण विसर्जित किए थे, और वह अपने पूर्वजों में सम्मिलित हो गया.
पहला नाम कोहाथ के परिवारों का आया, जो अहरोन वंश के लेवियों में से थे. यहूदाह, शिमओन तथा बिन्यामिन गोत्र को बांटी गई भूमि में से तेरह नगर उन्हें मिले.
ये अहरोन वंश, जो कोहाथियों के परिवारों में से लेवी वंश के थे, पहला नाम उन्हीं का आया था.
उन्होंने अहरोन के वंशजों को ये नगर दिए: हेब्रोन (जो शरण शहर था), और लिबनाह,
इस प्रकार अहरोन वंश के पुरोहितों के लिए कुल तेरह नगर उनके चराइयों सहित अलग कर दिए गए.
“ ‘तब मैं, याहवेह ने मोशेह तथा अहरोन को उनके बीच भेजा. मैंने मिस्र देश पर विपत्तियां भेजी, फिर मैं तुम्हें वहां से निकाल लाया.
फिर अहरोन के पुत्र एलिएज़र की मृत्यु हो गई. उन्होंने उसे गिबियाह में गाड़ दिया. यह उसके पुत्र फिनिहास का नगर था, जो एफ्राईम के पर्वतीय प्रदेश में उसे मिला था.
अहरोन का पोता, एलिएज़र का पुत्र फिनिहास संदूक के सामने सेवा के लिए चुना गया था. इस्राएल वंशजों ने याहवेह से पूछा, “क्या हम अब भी अपने बंधु बिन्यामिन पर हमला करने जाएं या यह विचार त्याग दें?” याहवेह ने उत्तर दिया, “जाओ, कल मैं उन्हें तुम्हारे हाथों में सौंप दूंगा.”
शमुएल ने जनसभा को संबोधित करते हुए आगे कहा, “स्वयं याहवेह ही हैं, जिन्होंने मोशेह तथा अहरोन को चुना कि वे तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश से बाहर निकाल लाएं.
“जब याकोब मिस्र देश में जाकर बस गए, उनके वंशजों ने याहवेह की दोहाई दी और याहवेह ने उनके पास मोशेह तथा अहरोन को भेज दिया. उन्होंने तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश से निकास किया. और वे इस स्थान में आकर बस गए.
अमराम की संतान: अहरोन, मोशेह और मिरियम. अहरोन के पुत्र: नादाब, अबीहू, एलिएज़र और इथामार.
मगर अहरोन और उसके पुत्र वेदी पर होमबलि चढ़ाते और धूप वेदी पर धूप जलाते, परम पवित्र स्थान संबंधित कार्य और परमेश्वर के सेवक मोशेह के आदेश अनुसार इस्राएल के लिए प्रायश्चित किया करते थे.
ये अहरोन के वंशज थे: उसका पुत्र एलिएज़र, उसका पुत्र फिनिहास, उसका पुत्र अबीशुआ,
उनकी सीमाओं ही के भीतर, उनके शिविरों के आधार पर उनके उपनिवेश इस प्रकार थे मतपत्रों के आधार पर सर्वप्रथम स्थान अहरोन के पुत्रों के परिवार को प्राप्त हुआ था. (अहरोन-वंशजों को जो कोहाथि कुल के थे, क्योंकि चिट्ठी डालकर वे ही इसके लिए पहले स्थान के लिए चुने गए थे):
अहरोन के पुत्रों को उन्होंने शरण शहर दे दिए: हेब्रोन, लिबनाह और इसकी सभी चरागाह,