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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. यशायाह १०:५लगभग ७१३ ई.पू.

    “अश्शूर पर हाय, जो मेरे क्रोध का सोंटा तथा लाठी है!

  2. यशायाह १०:६लगभग ७१३ ई.पू.

    मैं उसको एक श्रद्धाहीन जाति के विरुद्ध भेजूंगा, और उन लोगों के विरुद्ध जिनसे मैं क्रोधित हूं, उसे आज्ञा दे रहा हूं कि वह इसे उजाड़ दे, लूट ले और गलियों के कीचड़-समान रौंद डाले.

  3. यशायाह १०:७लगभग ७१३ ई.पू.

    किंतु फिर भी उसकी इच्छा यह नहीं और न ही उसके हृदय में ऐसी कोई युक्ति है; परंतु उसका यह उद्देश्य है, कि वह अनेक देशों को नष्ट करे और मिटा डाले.

  4. यशायाह १०:८लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि वह यह कहता है, ‘क्या मेरे सब हाकिम राजा नहीं?

  5. यशायाह १०:९लगभग ७१३ ई.पू.

    क्या कलनो कर्कमीश व हामाथ अरपाद के और शमरिया दमेशेक के समान नहीं है?

  6. यशायाह १०:१०लगभग ७१३ ई.पू.

    इसलिये कि मेरा हाथ मूर्तियों के राज्य में पहुंच गया है, जिनकी गढ़ी हुई मूर्ति येरूशलेम और शमरिया से अधिक थी—

  7. यशायाह १०:११लगभग ७१३ ई.पू.

    क्या मैं येरूशलेम और उसकी मूर्तियों के साथ वही करूंगा जैसा मैंने शमरिया और उसकी मूर्तियों के साथ किया था?’ ”

  8. यशायाह १०:१२लगभग ७१३ ई.पू.

    तब अब ऐसा होगा जब प्रभु ज़ियोन पर्वत और येरूशलेम में अपना सब काम पूरा कर चुके होंगे, तब वे अश्शूर के राजा को उसके विचारों और घमंड को तोड़ देंगे.

  9. यशायाह १०:१३लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि उनका यह मानना था: “ ‘अपनी ही समझ और बल से राज्य की सीमाओं को मैंने हटाया और उनके धन को लूट लिया.

  10. यशायाह १०:१४लगभग ७१३ ई.पू.

    देश के लोगों की धन-संपत्ति इस प्रकार कब्जे में की, जिस प्रकार चिड़िया घोंसलों को और बचे हुए अण्डों को इकट्ठा करती है.’ ”

  11. यशायाह १०:१५लगभग ७१३ ई.पू.

    क्या कुल्हाड़ी अपनी प्रशंसा करेगी, या आरी स्वयं को जो उसे खींचता है अच्छा होने का दावा करेगी? यह तो उसी प्रकार है जैसे लाठी उसे उठाए जो काठ है ही नहीं, या मुगदर अपने प्रयोक्ता को चलाए!

  12. यशायाह १०:१६लगभग ७१३ ई.पू.

    तब सर्वशक्तिमान याहवेह, उनके बलवान योद्धाओं को कमजोर कर देंगे; और उनके ऐश्वर्य के नीचे आग की सी जलन होगी.

  13. यशायाह १०:१७लगभग ७१३ ई.पू.

    इस्राएल की ज्योति आग और पवित्र ज्वाला होगी; और उसके झाड़ आग में जल जाएंगे.

  14. यशायाह १०:१८लगभग ७१३ ई.पू.

    वे उसके वन और फलदायक उद्यान के वैभव को ऐसे नष्ट कर देंगे, जैसे एक रोगी की देह और प्राण कमजोर होते हैं.

  15. यशायाह १०:१९लगभग ७१३ ई.पू.

    उसके वन में शेष रह गए वृक्षों की संख्या इतनी अल्प हो जाएगी कि कोई बालक भी इसकी गणना कर लेगा.

  16. यशायाह १०:२०लगभग ७१३ ई.पू.

    उस दिन इस्राएल के बचे हुए लोग, और याकोब वंश के भागे हुए लोग, अपने मारने वाले पर फिर विश्वास नहीं करेंगे, बल्कि याहवेह इस्राएल के पवित्र परमेश्वर पर भरोसा रखेंगे.

  17. यशायाह १०:२१लगभग ७१३ ई.पू.

    याकोब में से बचे हुए लोग पराक्रमी परमेश्वर के पास लौट आएंगे.

  18. यशायाह १०:२२लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि हे इस्राएल, चाहे तुम्हारी प्रजा समुद्र के बालू के समान भी हो, किंतु उनमें से कुछ ही बच पाएंगे. लेकिन विनाश पूरे न्याय के साथ होगा.

  19. यशायाह १०:२३लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि विनाश करने का निर्णय प्रभु, सेनाओं के याहवेह ने ले लिया है.

  20. यशायाह १०:२४लगभग ७१३ ई.पू.

    इसलिये प्रभु, सेनाओं के याहवेह यों कहते हैं: “हे ज़ियोन में रहनेवाले, अश्शूरियों से न डरना; चाहे वे सोंटे से और लाठी से तुम्हें मारें.

  21. यशायाह १०:२५लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि कुछ ही समय में तुम पर मेरा गुस्सा शांत हो जाएगा और मैं उनको नाश कर दूंगा.”

  22. यशायाह १०:२६लगभग ७१३ ई.पू.

    सर्वशक्तिमान याहवेह उनको चाबुक से ऐसा मारेंगे, जैसा उन्होंने ओरेब की चट्टान पर मिदियान को मारा था. उनकी लाठी समुद्र पर होगी और वे इसे ऐसे उठा लेंगे, जैसे उन्होंने मिस्र में किया था.

  23. यशायाह १०:२७लगभग ७१३ ई.पू.

    उस दिन उनका बोझ तुम्हारे कंधों से हट जाएगा, और उनका जूआ तुम्हारी गर्दन से; यह जूआ अभिषेक के साथ तोड़ दिया जाएगा.

  24. यशायाह १०:२८लगभग ७१३ ई.पू.

    उन्होंने अय्याथ पर हमला कर दिया है; और वे मिगरोन में से होकर निकल गये हैं; मिकमाश में उन्होंने अपने हथियार रखे हैं.

  25. यशायाह १०:२९लगभग ७१३ ई.पू.

    वे घाटी पार करके, “वे गेबा में रात रुकेंगे.” रामाह डरा हुआ है; शाऊल का गिबियाह भाग गया है.