येरेमियाह ५०:१४-३८
१४
“हर एक ओर से बाबेल के विरुद्ध मोर्चा बांधो, तुम सभी धनुर्धारियों. उस पर प्रहार करो कोई भी तुम्हारे बाणों से बचने न पाए, क्योंकि याहवेह की दृष्टि में बाबेल पापिष्ठ है!
१५
चारों ओर से उसके विरुद्ध आवाज की जाए! उसने समर्पण कर दिया है, उसके स्तंभ पृथ्वीशायी हो चुके हैं, उसकी शहरपनाहें भंग की गई हैं. यह याहवेह का निरा बदला है; तुम भी उससे बदला लो, उसने जैसा जैसा अन्यों के साथ किया है; तुम भी उसके साथ वैसा ही करो.
१६
बाबेल से रोपक को नष्ट कर दो और उसे भी, जो कटनी के अवसर पर अपना हंसिया चलाता है. क्योंकि अत्याचारी की तलवार के कारण वे लौटकर अपने ही लोगों के पास भागकर स्वदेश ही चले जाएंगे.
१७
“इस्राएल तितर-बितर की हुई भेड़-बकरियां हैं, सिंहों ने उन्हें खदेड़ दिया है. जिसने उसे सर्वप्रथम निगल डाला था, वह है अश्शूर का राजा; जिसने सबसे अंत में उसकी अस्थियां तोड़ दी हैं, वह है बाबेल का राजा नबूकदनेज्ज़र.”
१८
इसलिये सेनाओं के याहवेह, इस्राएल के परमेश्वर का संदेश यह है: “तुम यह देखना कि मैं बाबेल के राजा तथा उसके देश को दंड देने पर हूं ठीक जिस प्रकार मैंने अश्शूर के राजा को दंड दिया है.
१९
तब मैं इस्राएल को उसकी चराइयों में लौटा ले आऊंगा, तब वह कर्मेल तथा बाशान में चरा करेगा; और पर्वतीय क्षेत्र एफ्राईम तथा गिलआद में उसकी अभिलाषा पूर्ण की जाएगी.
२०
उन दिनों में, उस अवसर पर,” यह याहवेह की वाणी है, “इस्राएल में पापिष्ठता की खोज की जाएगी, किंतु वहां कुछ भी प्राप्त न होगा, वैसे ही यहूदिया में भी पापिष्ठता की खोज की जाएगी, किंतु वहां भी उनमें कुछ पाया न जाएगा, क्योंकि मैं बचे हुए लोगों को क्षमा कर दूंगा, जिन्हें मैंने रख छोड़ा है.
२१
“जाकर मेराथाइम देश पर आक्रमण करो, जाकर पेकोदवासियों पर भी आक्रमण करो. उन्हें घात करो तथा उन्हें पूर्णतः नष्ट कर दो,” यह याहवेह का आदेश है. “वही सब करो, जिसका मैंने तुम्हें आदेश दिया है.
२२
युद्ध की ध्वनि देश में व्याप्त है, विनाश अत्यंत प्रचंड है!
२३
वह, जो सारे विश्व के लिए हथौड़ा था, वह कैसे कट गया, टूट गया! सारे राष्ट्रों के लिए बाबेल आज आतंक का विषय कैसे बन गया है!
२४
बाबेल, मैंने तुम्हारे लिए फंदा डाला, और तुम उसमें जा भी फंसे! तुम्हें इसका आभास ही न हुआ; तुम्हें खोज निकाला गया और तुम पकड़ लिए गए कारण यह था, कि तुमने याहवेह से द्वन्द किया था.
२५
याहवेह ने अपना शस्त्रागार खोल दिया है ओर उन्होंने अपने आक्रोश के शस्त्र बाहर निकाल लिए हैं, क्योंकि कसदियों के देश में यह प्रभु सेनाओं के याहवेह का निष्पादन है.
२६
दूरतम सीमा से उसके निकट आ जाओ. उसके अन्नभण्डार खोल दो; उसे अनाज का ढेर लगाए जैसे कर दो और उसे पूर्णतः. नष्ट कर दो, उसका कुछ भी शेष न रह जाए.
२७
उसके सारे पुष्ट बैल तलवार से घात कर दो; उन सभी का वध कर दो! धिक्कार हो उन पर! क्योंकि उनका समय आ गया है, उनके दंड का समय.
२८
बाबेल से आए शरणार्थियों तथा आश्रयहीनों का स्वर सुनाई दे रहा है, कि ज़ियोन में उनके मंदिर के लिए, याहवेह हमारे परमेश्वर के बदले की घोषणा की जा सके.
२९
“बाबेल पर आक्रमण के लिए उन सभी को बुला लाओ, जो बाण छोड़ने में कुशल है. उसे चारों ओर से घेरकर शिविर डाल दो; कोई भी बचने न पाए. उसके द्वारा किए गए कार्यों के अनुसार ही उसे प्रतिफल दो; उसने जैसा जैसा किया है उसके साथ वैसा ही करो. क्योंकि बाबेल याहवेह के विरुद्ध अहंकारी हो गया है, उनके विरुद्ध, जो इस्राएल के पवित्र परमेश्वर हैं.
३०
इसलिये बाबेल के शूर जवान वहां की सड़कों पर पृथ्वीशायी हो जाएंगे; तथा उसके सभी योद्धा उस दिन नष्ट हो जाएंगे,” यह याहवेह की वाणी है.
३१
“ओ अहंकारी, मैं तुम्हारे विरुद्ध हूं, तुम यह देख लेना,” यह प्रभु सेनाओं के याहवेह की वाणी है, “क्योंकि तुम्हारा समय आ गया है, वह समय, जब मैं तुम्हें दंड दूंगा.
३२
वह, जो अहंकारी है, वह लड़खड़ा कर गिर पड़ेगा और कोई नहीं होगा, जो उसे उठाए; बाबेल के नगरों को मैं भस्म कर दूंगा, इससे उसके निकटवर्ती सारे क्षेत्र भी नष्ट हो जाएंगे.”
३३
सेनाओं के याहवेह का संदेश यह है: “इस्राएल वंशज उत्पीड़ित किए जा रहे हैं, यहूदाह गोत्रज भी; वे सभी, जिन्होंने उन्हें बंदी बनाया है, उन्हें मुक्त नहीं कर रहे.
३४
सशक्त हैं उनके उद्धारक, सेनाओं के याहवेह है उनका नाम. वह उनके सशक्त प्रवक्ता होंगे, कि पृथ्वी पर शांति की स्थापना हो सके, किंतु बाबेलवासियों में अशांति.”
३५
याहवेह की वाणी है, “कसदी तलवार से घात किए जाएंगे, वैसे ही बाबेलवासी भी!” बाबेल के अधिकारी एवं बुद्धिमान तलवार से घात किए जाएंगे!
३६
झूठे भविष्यवक्ताओं पर तलवार का प्रहार होगा! और वे मूर्ख प्रमाणित हो जाएंगे. शूर योद्धाओं पर तलवार का प्रहार होगा! और वे चूर-चूर हो जाएंगे.
३७
तलवार उनके घोड़ों तथा रथों पर भी चलेगी, तथा उन सारे विदेशियों पर भी! जो उनके मध्य में निवास कर रहे हैं, कि वे दुर्बल हो जाएं. तलवार उसके कोषागारों पर भी चलेगी! और वे लूट लिए जाएंगे.
३८
मैं उनके जलाशयों पर अनावृष्टि भेजूंगा! और वे सूख जाएंगे. क्योंकि यह देश प्रतिमाओं का देश हो गया है, यहां के निवासी उन प्रतिमाओं पर उन्मत्त हुए जा रहे हैं.
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