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Morning के बारे में बाइबल के वचन

47 वचन · 27 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. परमेश्वर ने प्रकाश को “दिन” तथा अंधकार को “रात” कहा और शाम हुई, फिर सुबह हुई—इस प्रकार पहला दिन हो गया.

  2. परमेश्वर ने इस अंतर को “आकाश” नाम दिया. और शाम हुई, फिर सुबह हुई—इस प्रकार दूसरा दिन हो गया.

  3. फिर शाम हुई, फिर सुबह हुई—इस प्रकार तीसरा दिन हो गया.

  4. और शाम हुई, फिर सुबह हुई—इस प्रकार चौथा दिन हो गया.

  5. तब शाम हुई, फिर सुबह हुई—पांचवां दिन हो गया.

  6. परमेश्वर ने अपनी बनाई हर चीज़ को देखा, और वह बहुत ही अच्छी थी. और शाम हुई, फिर सुबह हुई—इस प्रकार छठवां दिन हो गया.

  7. अगले दिन अब्राहाम ने सुबह जल्दी उठकर अपने गधे पर काठी कसी. उन्होंने अपने साथ दो सेवकों तथा अपने पुत्र यित्सहाक को लिया. जब उन्होंने होमबलि के लिये पर्याप्‍त लकड़ी काट ली, तब वे उस स्थान की ओर चले, जिसके बारे में परमेश्वर ने उन्हें बताया था.

  8. अगले दिन वे बड़े सबेरे उठकर एक दूसरे के साथ शपथ खाई. तब यित्सहाक ने उन्हें विदा किया, और वे शांतिपूर्वक चले गये.

  9. याकोब ने उस पत्थर को, जिसे उसने अपने सिर के नीचे रखा था, एक स्तंभ के जैसे खड़ा कर उस पर तेल डाला,

  10. फिर रोज सुबह जितनी उनको ज़रूरत होती थी उतना ही वे लेते थे.

  11. “और एक-एक साल के दो मेमने वेदी पर रोज चढ़ाना.

  12. एक मेमना सुबह तथा दूसरा शाम को चढ़ाना.

  13. तुम एक मेमना भोर को, तथा दूसरा शाम के समय में;

  14. इसके अलावा अन्‍नबलि के लिए डेढ़ किलो मैदा, जिसे पेरकर निकाले गए एक लीटर तेल में मिलाया गया हो.

  15. यह सीनायी पर्वत पर एक सुखद-सुगंध के लिए ठहराया गया था, कि यह याहवेह के लिए एक भेंट हो जाए.

  16. इसके बाद पेय बलि के लिए, हर एक मेमने के साथ एक लीटर दाखमधु होगी. तुम पवित्र स्थान में याहवेह के लिए बलि उंडेल दोगे.

  17. सातवें दिन वे सबेरे उठ गए, तथा उसी रीति से, परंतु सात बार, नगर के चारों ओर घूमे; केवल सातवें दिन ही वे सात बार घूमे.

  18. बड़े तड़के, जब नगरवासियों ने देखा कि बाल की वेदी गिर पड़ी थी, उसके निकट स्थापित की हुई अशेरा काट डाली गई थी, तथा निर्माण की हुई वेदी पर वह बैल को चढ़ाया गया था.

  19. वह सुबह की आभा के समान है, जब सूर्योदय हो रहा होता है, ऐसी सुबह, जो बादलों से छाई हुई, जब भूमि से बारिश के बाद कोमल घास सूर्य प्रकाश में भूमि से अंकुरित होने लगती है.’

  20. उन्होंने उन्हें दिए गए बछड़े को लेकर उसे बलि के लिए तैयार किया और उन्होंने बाल को बलि देनी शुरू की और सुबह से दोपहर तक वे यह कहकर दोहाई देते रहे, “हे बाल, हमारी सुनो!” किंतु न तो कोई आवाज ही सुनी गई और न किसी से कोई उत्तर ही मिला. वे अपनी बनाई हुई वेदी के आस-पास उछलते-कूदते रहे.

  21. एज़्रा सुबह से लेकर दोपहर तक जल फाटक के सामने इकट्ठा भीड़ के सामने उन स्त्री-पुरुषों के लिए पढ़कर सुनाते रहे, जो सुनकर समझ सकते थे, ये सभी व्यवस्था की पुस्तक पर ध्यान लगाए थे.

  22. इसके संध्या के तारे काले हो जाएं; इसका उजियाला नष्ट हो जाए, इसके लिए प्रभात ही मिट जाए;

  23. जब निशांत तारा सहगान में एक साथ गा रहे थे तथा सभी स्वर्गदूत उल्लासनाद कर रहे थे, तब कहां थे तुम?

  24. “क्या तुमने अपने जीवन में प्रभात को यह आदेश दिया है, कि वह उपयुक्त क्षण पर ही अरुणोदय किया करे,

  25. उसकी छींक तो आग की लपटें प्रक्षेपित कर देती है; तथा उसके नेत्र उषाकिरण समान दिखते हैं.