circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- योहन ४:३९लगभग ३० ई.
अनेक शमरियावासियों ने उस स्त्री की इस गवाही के कारण मसीह येशु में विश्वास किया: “आओ, एक व्यक्ति को देखो, जिन्होंने मेरे जीवन की सारी बातें सुना दी हैं.”
- योहन ४:४०लगभग ३० ई.
तब शमरियावासियों की विनती पर मसीह येशु दो दिन तक उनके मध्य रहे
- योहन ४:४१लगभग ३० ई.
और उनका प्रवचन सुनकर अनेकों ने उनमें विश्वास किया.
- योहन ४:४२लगभग ३० ई.
उन्होंने उस स्त्री से कहा, “अब हम मात्र तुम्हारे कहने से ही इनमें विश्वास नहीं करते, हमने अब इन्हें स्वयं सुना है और जान गए हैं कि यही वास्तव में संसार के उद्धारकर्ता हैं.”
- योहन ४:४३लगभग ३० ई.
दो दिन बाद मसीह येशु ने गलील प्रदेश की ओर प्रस्थान किया.
- योहन ४:४४लगभग ३० ई.
यद्यपि मसीह येशु स्वयं स्पष्ट कर चुके थे कि भविष्यवक्ता को अपने ही देश में सम्मान नहीं मिलता,
- योहन ४:४५लगभग ३० ई.
गलील प्रदेश पहुंचने पर गलीलवासियों ने उनका स्वागत किया क्योंकि वे फ़सह उत्सव के समय येरूशलेम में मसीह येशु द्वारा किए गए काम देख चुके थे.
- योहन ४:४६लगभग ३० ई.
मसीह येशु दोबारा गलील प्रदेश के काना नगर में आए, जहां उन्होंने जल को दाखरस में बदला था. कफ़रनहूम नगर में एक राजकर्मचारी था, जिसका पुत्र अस्वस्थ था.
- योहन ४:४७लगभग ३० ई.
यह सुनकर कि मसीह येशु यहूदिया प्रदेश से गलील में आए हुए हैं, उसने आकर मसीह येशु से विनती की कि वह चलकर उसके पुत्र को स्वस्थ कर दें, जो मृत्यु-शय्या पर है.
- योहन ४:४८लगभग ३० ई.
इस पर मसीह येशु ने उसे झिड़की देते हुए कहा, “तुम लोग तो चिह्न और चमत्कार देखे बिना विश्वास ही नहीं करते!”
- योहन ४:४९लगभग ३० ई.
राजकर्मचारी ने उनसे दोबारा विनती की, “श्रीमन, इससे पूर्व कि मेरे बालक की मृत्यु हो, कृपया मेरे साथ चलें.”
- योहन ४:५०लगभग ३० ई.
मसीह येशु ने उससे कहा, “जाओ, तुम्हारा पुत्र जीवित रहेगा.” उस व्यक्ति ने मसीह येशु के वचन पर विश्वास किया और घर लौट गया.
- योहन ४:५१लगभग ३० ई.
जब वह मार्ग में ही था, उसके दास उसे मिल गए और उन्होंने उसे सूचना दी, “स्वामी, आपका पुत्र स्वस्थ हो गया है.”
- योहन ४:५२लगभग ३० ई.
“वह किस समय से स्वस्थ होने लगा था?” उसने उनसे पूछा. उन्होंने कहा, “कल लगभग दोपहर एक बजे उसका ज्वर उतर गया.”
- योहन ४:५३लगभग ३० ई.
पिता समझ गया कि यह ठीक उसी समय हुआ जब मसीह येशु ने कहा था, “तुम्हारा पुत्र जीवित रहेगा.” इस पर उसने और उसके सारे परिवार ने मसीह येशु में विश्वास किया.
- योहन ४:५४लगभग ३० ई.
यह दूसरा अद्भुत चिह्न था, जो मसीह येशु ने यहूदिया प्रदेश से लौटकर गलील प्रदेश में किया.
- योहन ५:१लगभग ३१ ई.
इन बातों के पश्चात मसीह येशु यहूदियों के एक पर्व में येरूशलेम गए.
- योहन ५:२लगभग ३१ ई.
येरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक जलाशय है, जो इब्री भाषा में बैथज़ादा कहलाता है और जिसके पांच ओसारे हैं,
- योहन ५:३लगभग ३१ ई.
उसके किनारे अंधे, अपंग और लकवे के अनेक रोगी पड़े रहते थे,
- योहन ५:४लगभग ३१ ई.
[जो जल के हिलने की प्रतीक्षा किया करते थे क्योंकि उनकी मान्यता थी कि परमेश्वर का स्वर्गदूत समय समय पर वहां आकर जल हिलाया करता था. जल हिलते ही, जो व्यक्ति उसमें सबसे पहले उतरता था, स्वस्थ हो जाता था].
- योहन ५:५लगभग ३१ ई.
इनमें एक व्यक्ति ऐसा था, जो अड़तीस वर्ष से रोगी था.
- योहन ५:६लगभग ३१ ई.
मसीह येशु ने उसे वहां पड़े हुए देख और यह मालूम होने पर कि वह वहां बहुत समय से पड़ा हुआ है, उसके पास जाकर पूछा, “क्या तुम स्वस्थ होना चाहते हो?”
- योहन ५:७लगभग ३१ ई.
रोगी ने उत्तर दिया, “श्रीमन, ऐसा कोई नहीं, जो जल के हिलने पर मुझे जलाशय में उतारे—मेरे प्रयास के पूर्व ही कोई अन्य व्यक्ति उसमें उतर जाता है.”
- योहन ५:८लगभग ३१ ई.
मसीह येशु ने उससे कहा, “उठो, अपना बिछौना उठाओ और चलने फिरने लगो.”
- योहन ५:९लगभग ३१ ई.
तुरंत वह व्यक्ति स्वस्थ हो गया और अपना बिछौना उठाकर चला गया. वह शब्बाथ था.