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Moses

774 वचन · 7 परिवार के सदस्य

Moses का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. याहवेह ने मोशेह को दोबारा आज्ञा दी,

  2. इस प्रकार मोशेह ने इस्राएल के घराने के सामने याहवेह के निर्धारित उत्सवों का विवरण दिया.

  3. फिर याहवेह ने मोशेह को यह आज्ञा दी,

  4. उस इस्राएली स्त्री के पुत्र ने परमेश्वर की निंदा करके परमेश्वर को शाप दिया. तब उसे मोशेह के सामने लाया गया. उस युवक की माता का नाम शेलोमीथ था, जो दान के गोत्र के दिबरी की पुत्री थी.

  5. इसके बाद याहवेह ने मोशेह को आज्ञा दी,

  6. इसके बाद मोशेह ने इस्राएल के घराने को आदेश दिया और वे उस व्यक्ति को छावनी के बाहर ले आए, जिसने परमेश्वर को शाप दिया था, उसका पथराव किया. इस प्रकार इस्राएल के घराने ने वैसा ही किया, ठीक जैसी आज्ञा याहवेह ने मोशेह को दी थी.

  7. याहवेह ने मोशेह को सीनायी पर्वत पर आज्ञा दी,

  8. यही वे विधियां, व्यवस्था और नियम हैं, जिन्हें याहवेह ने, मोशेह के द्वारा सीनायी पर्वत पर अपने और इस्राएल के घराने के बीच ठहराई.

  9. याहवेह ने मोशेह को यह आज्ञा दी,

  10. यही वे आदेश हैं, जिन्हें याहवेह ने मोशेह को इस्राएल के घराने के लिए सीनायी पर्वत पर दिए.

  11. इस्राएल के घराने के मिस्र देश से निकल जाने के बाद दूसरे वर्ष के दूसरे महीने की पहली तारीख पर सीनायी के निर्जन प्रदेश में मिलनवाले तंबू में याहवेह ने मोशेह को यह आज्ञा दी:

  12. फिर मोशेह तथा अहरोन ने इन चुने हुए व्यक्तियों को अपने साथ लिया,

  13. ठीक जैसा याहवेह ने मोशेह को आदेश दिया था. इस प्रकार मोशेह द्वारा सीनायी निर्जन प्रदेश में यह जनगणना पूरी हुई.

  14. ये सभी वे हैं, जो मोशेह तथा अहरोन और इस्राएल के बारह गोत्र के प्रधानों द्वारा जो अपने-अपने परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इस गणना में गिने गए थे.

  15. क्योंकि याहवेह मोशेह को यह संदेश दे चुके थे:

  16. इस्राएल के घराने ने यही किया, जैसा याहवेह द्वारा मोशेह को आज्ञा दी गई थी.

  17. याहवेह ने मोशेह तथा अहरोन को यह आज्ञा दी:

  18. किंतु इस गिनती में लेवी नहीं गिने गए, क्योंकि यह मोशेह को दी गई याहवेह की आज्ञा थी.

  19. इस्राएल के घराने ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली. वे मोशेह को दी गई याहवेह की आज्ञा के अनुसार शिविर डाला करते थे, इसी क्रम में अपने-अपने गोत्र के अनुसार अपने-अपने गोत्र और कुटुंब में यात्रा करते थे.

  20. जब याहवेह ने मोशेह से सीनायी पर्वत पर बातें की, तब मोशेह तथा अहरोन की पीढ़ियां इस प्रकार थीं:

  21. फिर याहवेह ने मोशेह को आज्ञा दी,

  22. याहवेह ने मोशेह को यह आदेश भी दिया,

  23. इसके बाद याहवेह ने सीनायी के निर्जन प्रदेश में मोशेह को यह आज्ञा दी,

  24. इसलिये मोशेह ने उन्हें जैसी आज्ञा दी थी, याहवेह की आज्ञा के अनुसार उनकी गिनती की.

  25. वे, जिन्हें सूर्योदय की दिशा, साक्षी के तंबू के पूर्व में मिलनवाले तंबू के सामने शिविर डालने के लिए नियुक्त किया गया था, वे मोशेह एवं अहरोन तथा उनके पुत्र हैं. वे पवित्र स्थान से संबंधित कार्यों की रखवाली करेंगे, जो इस्राएल के प्रति उनका कर्तव्य होगा. किंतु यदि कोई साधारण व्यक्ति पवित्र स्थान के निकट आए, तो उसको मार दिया जायेगा.