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Israel

1,007 वचन · 20 परिवार के सदस्य

इन्हें भी कहा जाता है: Jacob

Israel का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. तभी अचानक यह हुआ कि एक इस्राएली स्त्री का पुत्र, जिसका पिता एक मिस्री था, इस्राएल के घराने के बीच जा पहुंचा और छावनी में ही उस इस्राएली स्त्री के पुत्र और एक इस्राएली पुरुष के बीच मार-पीट हो गई.

  2. इस्राएल के घराने को यह आज्ञा दी जाए, ‘जो अपने परमेश्वर को शाप देता है, वह स्वयं अपने पाप का बोझ उठाएगा.

  3. इसके बाद मोशेह ने इस्राएल के घराने को आदेश दिया और वे उस व्यक्ति को छावनी के बाहर ले आए, जिसने परमेश्वर को शाप दिया था, उसका पथराव किया. इस प्रकार इस्राएल के घराने ने वैसा ही किया, ठीक जैसी आज्ञा याहवेह ने मोशेह को दी थी.

  4. “इस्राएल के घराने को यह आज्ञा दो: ‘जब तुम उस देश में प्रवेश करोगे, जो मैं तुम्हें दूंगा, तब याहवेह के लिए उस देश में एक शब्बाथ होगा.

  5. इसलिये जो कुछ भी लेवियों का है, उसको छुड़ाया जा सकता है और नगर में उनकी संपत्ति से बेचा गया वह घर योवेल वर्ष में छुड़ा दिया जाएगा, क्योंकि इस्राएल के घराने के बीच लेवियों के नगरों के घर उनकी संपत्ति हैं.

  6. तुम उन्हें संपत्ति के समान अपने पुत्रों के अधिकार में स्थायी मीरास के रूप में भी दे सकते हो; तथा उनका प्रयोग स्थायी दासों के समान कर सकते हो. किंतु तुम इस्राएल के घराने में से अपने भाई-बंधुओं पर कठोरता पूर्वक शासन न करना.

  7. क्योंकि इस्राएल का घराना मेरा दास है; ये मेरे वे दास हैं, जिन्हें मैं मिस्र देश से छुड़ाकर लाया हूं. मैं याहवेह ही तुम्हारा परमेश्वर हूं.

  8. तो मैं याकोब के साथ अपनी वाचा को, यित्सहाक के साथ अपनी वाचा को और अब्राहाम के साथ अपनी वाचा को, और इस देश को भी स्मरण करूंगा.

  9. यही वे विधियां, व्यवस्था और नियम हैं, जिन्हें याहवेह ने, मोशेह के द्वारा सीनायी पर्वत पर अपने और इस्राएल के घराने के बीच ठहराई.

  10. “इस्राएल के घराने को यह आज्ञा दो: ‘जब कोई किसी व्यक्ति को याहवेह के लिए भेंट करने की विशेष मन्नत माने, तो उस व्यक्ति के ठहराए हुए मूल्य को इस प्रकार तय किया जाए:

  11. यही वे आदेश हैं, जिन्हें याहवेह ने मोशेह को इस्राएल के घराने के लिए सीनायी पर्वत पर दिए.

  12. “इस्राएल के घराने की सारी सभा की, उनके परिवारों की, उनके पितरों के अनुसार हर एक पुरुष की, व्यक्तिगत रूप से गिनती करना.

  13. फिर उनके पितरों के अनुसार बीस वर्ष तथा इससे अधिक अवस्था के युद्ध के लिए योग्य इस्राएल के सभी पुरुषों की गिनती की गई.

  14. सारा इस्राएल अपने-अपने दल के अनुसार डेरा डालेगा, हर एक अपने-अपने ठहराए गए समूह में तथा अपने-अपने झंडे के निकट डेरा डाला करेगा.

  15. किंतु लेवी हमेशा ही साक्षी के तंबू के आस-पास ही पड़ाव डाला करेंगे कि इस्राएल के घराने पर मेरा क्रोध न भड़के. तब लेवी ही साक्षी के तंबू के अधिकारी होंगे.”

  16. इस्राएल के घराने ने यही किया, जैसा याहवेह द्वारा मोशेह को आज्ञा दी गई थी.

  17. “इस्राएल के वंश प्रत्येक अपने-अपने झंडे के नीचे ही पड़ाव डाला करेंगे. ये झंडे उनके पिता के गोत्रों की निशानी होंगे. वे मिलनवाले तंबू के आस-पास उसकी ओर मुख किए हुए अपने-अपने शिविर खड़े करेंगे.”

  18. ये ही थे सारे इस्राएली, जिनकी गिनती उनके गोत्रों के अनुसार की गई थी. वे सभी, जिनकी गिनती उनके दलों के अनुसार की गई थी, संख्या में 6,03,550 थे.

  19. किंतु इस गिनती में लेवी नहीं गिने गए, क्योंकि यह मोशेह को दी गई याहवेह की आज्ञा थी.

  20. इस्राएल के घराने ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली. वे मोशेह को दी गई याहवेह की आज्ञा के अनुसार शिविर डाला करते थे, इसी क्रम में अपने-अपने गोत्र के अनुसार अपने-अपने गोत्र और कुटुंब में यात्रा करते थे.

  21. इस्राएलियों से ज़िम्मेदारियों को निभाने के अलावा वे मिलनवाले तंबू की वस्तुओं का ध्यान रखेंगे, यह उनकी साक्षी के तंबू संबंधित सेवा होगी.

  22. इस प्रबंध के अंतर्गत तुम सारे लेवियों को अहरोन तथा उनके पुत्रों के अधीन कर दोगे, वे सारे इस्राएल में से उन्हें सौंप दिए गए हैं.

  23. वे, जिन्हें सूर्योदय की दिशा, साक्षी के तंबू के पूर्व में मिलनवाले तंबू के सामने शिविर डालने के लिए नियुक्त किया गया था, वे मोशेह एवं अहरोन तथा उनके पुत्र हैं. वे पवित्र स्थान से संबंधित कार्यों की रखवाली करेंगे, जो इस्राएल के प्रति उनका कर्तव्य होगा. किंतु यदि कोई साधारण व्यक्ति पवित्र स्थान के निकट आए, तो उसको मार दिया जायेगा.

  24. इसके बाद याहवेह ने मोशेह को आज्ञा दी, “इस्राएल में एक महीने से अधिक आयु के हर एक पुरुष की गिनती करो तथा उनके नामों की सूची बनाओ.

  25. इस्राएल के घराने के पहिलौठों के तथा इस्राएल के पशुओं के पहिलौठों के स्थान पर तुम मेरे लिए लेवियों को अलग कर लोगे. मैं ही वह याहवेह हूं.”